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सत्ता से सवाल पूछना ही लोकतंत्र की सच्ची ताकत: सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज

सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक जवाबदेही एवं पारदर्शिता की मुखर समर्थक अंजलि भारद्वाज को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा हाल ही में स्थापित इंटरनेशनल एंटी करप्शन चैंपियंस अवॉर्ड के लिए चुना गया है. उनके अलावा दुनियाभर के 11 अन्य लोगों को यह सम्मान दिया गया है.

सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज. (फोटो: द वायर)

सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज. (फोटो: द वायर)

नई दिल्लीः अमेरिकी प्रशासन ने सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक जवाबदेही एवं पारदर्शिता की मुखर समर्थक अंजलि भारद्वाज को सम्मानित किया है.

अंजलि पिछले दो दशक से भी अधिक समय से सूचना के अधिकार आंदोलन की एक सक्रिय सदस्य रही हैं.

अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘दुनियाभर में भ्रष्टाचार के कारण सुरक्षा और स्थायित्व खतरे में है, यह आर्थिक वृद्धि को रोकता है, लोकतंत्र और मानव अधिकारों को कमजोर करता है, सार्वजनिक संस्थानों के प्रति विश्वास को खत्म करता है, अपराध को बढ़ाता है और निजी एवं सार्वजनिक संसाधनों को हड़प जाता है.’

विज्ञप्ति के अनुसार, ‘बाइडन प्रशासन इस बात से वाकिफ है कि हम प्रतिबद्ध लोगों के साथ काम करके इन चुनौतियों का सामना कर सकते हैं. यह ऐसे साहसी लोग हैं जो भ्रष्टाचार के खिलाफ डटकर खड़े हैं.’

सतर्क नागरिक संगठन की संस्थापक और वर्ष 1999 से जवाबदेही और पारदर्शिता के सवाल पर अपनी आवाज बुलंद करने वाली अंजलि भारद्वाज को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा हाल ही में स्थापित इंटरनेशनल एंटी करप्शन चैंपियंस अवॉर्ड के लिए चुना गया है.

उनके अलावा दुनियाभर के 11 अन्य लोगों को यह सम्मान दिया गया है.

अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि यह अवॉर्ड उन लोगों को मान्यता प्रदान करता है, जिन्होंने पारदर्शिता की रक्षा, भ्रष्टाचार को समाप्त करने और अपने देशों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास किए.

भारद्वाज ने कहा, ‘यह सम्मान ऐसे समय में दिया जा रहा है, जब सवाल पूछने वालों पर हमले किए जा रहे हैं. ये हमले उन माध्यमों पर किए जा रहे हैं, जिनके जरिये लोग पारदर्शिता चाहते हैं. आरटीआई एक्ट में पहली बार 2019 में संशोधन किया गया था और इसने सूचना आयुक्तों की स्वतंत्रता को कमजोर किया.’

अंजलि ने 2003 में सतर्क नागरिक संगठन की स्थापना की, जो सूचना के अधिकार के माध्यम से सरकारी नुमाइंदों की जवाबदेही को बेहतर बनाने में मदद करता है और उनके संगठन द्वारा जन प्रतिनिधियों के कामकाज की लगातार समीक्षा की जाती है.

वह 2008 में स्थापित आरटीआई आकलन और सलाहकार समूह के साथ काम करती रही हैं, जिसे सूचना का अधिकार कानून के कार्यान्वयन पर नजर रखने के लिए गठित किया गया था. उन्हें 2009 में सामाजिक भागीदारी बढ़ाने में योगदान के लिए ‘अशोका फैलोशिप’ प्रदान की गई थी.

दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने वाली अंजलि भारद्वाज ने वर्ल्ड बैंक के ऊंचे ओहदे को छोड़कर भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन को अपने जीवन का लक्ष्य बनाने का फैसला किया.

उनका मानना है कि पिछले दो दशक में कतार में सबसे पीछे खड़े लोगों को भी यह समझ में आने लगा है कि वह हाकिमों के हर फैसले के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं और लाख दुश्वारियों के बावजूद कहीं न कहीं उनकी आवाज की गूंज जरूर सुनाई देगी.

लोगों को सूचना के अधिकार कानून के जरिये भ्रष्टाचार और हर तरह की अव्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करने वाली अंजलि सवाल पूछने की ताकत को लोकतंत्र की सच्ची मजबूती बताती हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)