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बिहारः यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में डांस करने पर निलंबित 13 शिक्षकों बोले- कुछ ग़लत नहीं किया

मामला छपरा की जेपी यूनिवर्सिटी का है, जहां बीते दिसंबर में एक कार्यक्रम में बाद वायरल हुए वीडियो में कुछ शिक्षक हिंदी गीतों पर नाचते देखे गए, जिसे लेकर एक कॉलेज प्रिंसिपल सहित 12 शिक्षकों को सस्पेंड कर दिया गया. शिक्षकों ने निलंबन को ग़लत बताते हुए कहा है कि यह अनुचित मोरल पुलिसिंग है.

जेपी यूनिवर्सिटी. (फोटो साभार: बिहार सरकार)

जेपी यूनिवर्सिटी. (फोटो साभार: बिहार सरकार)

पटनाः बिहार के छपरा की जयप्रकाश यूनिवर्सिटी के एक कॉलेज के प्रिंसिपल और 12 शिक्षकों को कथित तौर पर कॉलेज के कार्यक्रम में हिंदी गानों पर कथित तौर पर नाचने के लिए सस्पेंड करने के एक दिन बाद शिक्षकों ने उन्हें जारी किए गए कारण बताओ नोटिस पर अपना जवाब भेजा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने इन शिक्षकों को उनके निलंबन पत्र के साथ यह नोटिस भेजा था.

इस नोटिस पर जवाब देते हुए शिक्षकों ने दुराचार और कर्तव्यों में लापरवाही बरतने के आरोपों से इनकार किया है. इन शिक्षकों में से एक ने बताया कि आधिकारिक कार्यक्रम होने और राष्ट्रगान के बाद उन्होंने छात्रों के साथ डांस किया था.

यह निलंबन आदेश 13 फरवरी को जारी किया गया था और शिक्षकों को इन कारण बताओ नोटिस पर जवाब के लिए पंद्रह दिनों का समय दिया गया था.

बता दें कि पिछले साल तीन दिसंबर को जेपी यूनिवर्सिटी के तहत छपरा के राजेंद्र कॉलेज, गोरेयाकोठी के एन कॉलेज और कुछ अन्य कॉलेज के लगभग 60 शिक्षक देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती के मौके पर राजेंद्र कॉलेज में इकट्ठा हुए थे.

इसके एक दिन बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें हिंदी के लोकप्रिय गानों पर कुछ शिक्षकों को डांस करते देखा जा सकता था.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग आठ घंटे के कार्यक्रम के समापन पर राष्ट्रगान के बाद वहां मौजूद लोगों की फरमाइश पर भोजपुरी गाने भी बजाए गए.

सोशल मीडिया पर कार्यक्रम के वायरल वीडियो में पीछे डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती का बैनर लगा हुआ है. इसके बाद राजभवन ने इस मामले को गंभीरता से लिया और राजभवन के निर्देश के बाद जेपी यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कार्यक्रम में शामिल शिक्षकों के निलंबन का आदेश दिया. सभी को अनुशासनहीनता का दोषी माना गया.

इस मामले के सामने आने के बाद वीसी डॉ. फारुक अली के आदेश पर एक जांच समिति का गठन किया गया. समिति ने कथित तौर पर समारोह में शामिल सभी लोगों से पूछताछ नहीं की.

13 दिसंबर को यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने राजेंद्र कॉलेज के 12 सहायक प्रोफेसर विवेक तिवारी, रूपा मुखर्जी, तनु गुप्ता, गोपाल कुमार साहनी, इकबाल जफर अंसारी, तनुका चटर्जी, बेतियार सिंह साहू, अब्दुल राशीद के., ऋचा मिश्रा, रमेश कुमार, रामानुज यादव और शादाब हाशमी और एन कॉलेज के प्रिंसिपल प्रमेंद्र रंजन सिंह के खिलाफ निलंबन आदेश जारी किया.

पत्र में कहा गया कि शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है.

इसके साथ ही शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया और यह पूछा गया कि राष्ट्रगान के बाद आइटम नंबर पर डांस करने के लिए उनके इस दुर्व्यवहार और कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतने के लिए उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए.

वहीं, निलंबित किए गए शिक्षक प्रमेंद्र रंजन ने कहा, ‘जांच समिति ने भी स्वीकार किया है कि राष्ट्रगान के बाद शिक्षकों ने डांस किया. यह स्पष्ट है कि हिंदी गाने पर हमारा डांस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था. हमने किसी अश्लील या भद्दे गाने पर भी डांस नहीं किया. हमने अपनी गरिमा बरकरार रखते हुए हमारे बच्चों के साथ डांस किया. हमें ताज्जुब है कि आखिर क्यों समिति ने कार्यक्रम में शिरकत करने वाले शिक्षकों को निलंबित किया.’

एक निलंबित असिस्टेंट प्रोफेसर ने द टेलीग्राफ को बताया, ‘हमने सिर्फ पांच मिनट डांस किया. हम हमारे छात्रों, सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के साथ डांस कर रहे थे. कोई यह कैसे सोच सकता है कि इसमें किसी तरह की अश्लीलता थी. वह एक सामान्य कार्यक्रम था, जिसमें हर कोई खुश था.’

एक अन्य शिक्षक ने बताया, ‘हम देश के प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के छात्रों के रूप में इस तरह के कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे. यह उन लोगों द्वारा अनुचित मोरल पुलिसिंग हैं, जो खुद को संस्कृति का ठेकेदार मानते हैं.’

राजेंद्र कॉलेज के शिक्षक संघ ने भी शिक्षकों के निलंबन पर आपत्ति जताई है.

वहीं, शिक्षक एसोसिएशन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ‘क्या परिवार के सदस्यों और बच्चों के साथ डांस करना अश्लील हो सकता है? अगर ऐसा है तो इसका निर्धारण करने की नैतिक जिम्मेदारी किसकी है?’