भारत

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गुजरात के दो पुलिस अधिकारियों ने दिया इस्तीफा

फर्ज़ी मुठभेड़ के आरोप में कई साल न्यायिक हिरासत में रह चुके एनके अमीन और तरुण बारोट को रिटायर होने के बाद गुजरात सरकार ने पुलिस अधीक्षक पद पर नियुक्त किया था.

NK Amin Tarun Barot PTI

एनके अमीन और तरुण बारोट. (फोटो: पीटीआई)

अहमदाबाद/दिल्ली: कथित फर्ज़ी मुठभेड़ मामलों के आरोपी गुजरात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी एनके अमीन और तरुण बारोट ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पद छोड़ने संबंधी हलफनामा देने के बाद गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

पिछले साल पुलिस अधीक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए अमीन तापी ज़िले के पुलिस अधीक्षक के तौर पर सेवा दे रहे थे. बारोट को उनकी सेवानिवृत्ति के एक साल बाद पिछले साल अक्टूबर में वडोदरा में पश्चिम रेलवे के पुलिस उपाधीक्षक के तौर पर फिर से नियुक्ति दी गई थी.

अमीन ने सोहराबुद्दीन और इशरत जहां फर्ज़ी मुठभेड़ मामले में मुकदमे का सामना किया. बारोट इशरत इशरत जहां और सादिक जमाल मुठभेड़ मामले में आरोपी थे. अमीन पिछले वर्ष अगस्त में पुलिस अधीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे और उसके बाद उन्हें एक वर्ष के अनुबंध के आधार पर फिर से गुजरात के महीसागर ज़िले का एसपी नियुक्त किया गया.

अमीन ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में चल रहे मुकदमे को देखते हुए प्रदेश सरकार को किसी शर्मिंदगी से बचाने के लिये उन्होंने और बारोट ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा देने का फैसला किया है.

अमीन ने बताया, किसी शर्मिंदगी से सरकार को बचाने के लिए हमने इस्तीफा देने का फैसला किया. मैं तापी ज़िले और गुजरात के लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं.

बारोट ने कहा कि इस्तीफा देने के अलावा उनके पास कोई और विकल्प नहीं बचा था. उन्होंने कहा, उच्चतम न्यायालय द्वारा इस्तीफा देने के लिए कहे जाने के बाद मैं और क्या कर सकता था. मैंने अपना इस्तीफा राज्य सरकार को भेज दिया.

इससे पहले गुरुवार को अमीन और बारोट ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वे गुरुवार को ही अपने पदों से इस्तीफा दे देंगे.

प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने दोनों पुलिस अधिकारियों की ओर से पेश अधिवक्ता के बयान पर गौर किया और उनसे गुरुवार को ही अपने पदों से इस्तीफा देने को कहा.

इसके बाद पीठ ने दोनों पुलिस अधिकारियों की पुन: भर्ती के ख़िलाफ़ पूर्व आईपीएस अधिकारी राहुल शर्मा की याचिका का निपटारा कर दिया.

पूर्व आईपीएस अधिकारी शर्मा ने अधिवक्ता वीरेंद्र कुमार शर्मा के ज़रिये दायर अपनी याचिका में उच्चतम न्यायालय के उस आदेश का ज़िक्र किया जिसमें गुजरात सरकार को राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारी पीपी पांडेय की पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक के पद छोड़ने की पेशकश स्वीकार करने की इजाज़त दी गई थी.

दोनों पुलिस अधिकारियों की पुन: भर्ती के ख़िलाफ़ दायर याचिका गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा ख़ारिज किए जाने को शर्मा ने चुनौती दी थी.

याचिका में आरोप लगाया गया कि मुठभेड़ के दो मामलों में सीबीआई के आरोप पत्र में अमीन का नाम आया था और वह पहले ही न्यायिक हिरासत में लगभग आठ वर्ष रह चुके हैं, यही नहीं रिहा किए जाने के तुरंत बाद उन्हें एसपी पद पर नियुक्ति दे दी गई.

इसके अलावा तरुण बारोट भी अपहरण और हत्या के मामलों में आरोपी रह चुके हैं, आरोप पत्र में उनका नाम भी आया है. इन मामलों में उनकी गिरफ्तारी भी हुई है और वे भी लगभग तीन वर्षों तक न्यायिक हिरासत में रहे हैं. लेकिन उक्त राज्य ने बारोट की रिहाई के तुरंत बाद उन्हें वडोदरा में पश्चिमी रेलवे का उपाधीक्षक बना दिया.

याचिका के मुताबिक यह जानते हुए कि दोनों अधिकारियों का इतिहास संदिग्ध रहा है, उन्हें नियुक्ति दी गई जो कि उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है. यह जन विश्वास के सिद्धांत का भी उल्लंघन है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)