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मध्य प्रदेश: हिंदू महासभा 14 मार्च को यात्रा निकालकर गोडसे से जुड़े ‘तथ्यों’ का प्रचार करेगी

अखिल भारतीय हिंदू महासभा की ओर से कहा गया है कि वह महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे एवं सह-षड्यंत्रकारी नारायण राव आप्टे से जुड़े तथ्यों की जानकारी देने के लिए 14 मार्च को ग्वालियर से दिल्ली तक वाहन रैली निकालेगी. इस पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि हिंदू महासभा, भाजपा और आरएसएस के कुछ तत्व नफ़रत के सौदागर हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: ट्विटर)

(प्रतीकात्मक फोटो: ट्विटर)

ग्वालियर/इंदौर: अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने रविवार को कहा कि वह 14 मार्च को ग्वालियर से दिल्ली तक वाहन रैली निकालेगी और इस दौरान महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे एवं सह-षड्यंत्रकारी नारायण राव आप्टे से जुड़े तथ्यों से लोगों को अवगत कराएगी.

हिंदू महासभा ने इस साल 10 जनवरी को ग्वालियर में दौलतगंज स्थित अपने दफ्तर में नाथूराम गोडसे की ज्ञानशाला की शुरुआत की थी, लेकिन ग्वालियर जिला प्रशासन के दखल देने के बाद उसे 12 जनवरी को बंद कर दिया था.

अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. जयवीर भारद्वाज ने कहा, ‘हाल ही में महासभा के पदाधिकारियों की बैठक हुई थी जिसमें तय किया गया कि अब समय आ गया है कि देश के युवाओं तक देश विभाजन के तथ्य बताए जाएं और उस समय हिंदुओं पर जो अत्याचार हुए, उसकी जानकारी दी जाए.’

उन्होंने कहा कि इसके लिए 14 मार्च को दोपहर 12 बजे ग्वालियर के हिंदू महासभा कार्यालय से एक यात्रा दिल्ली तक के लिए निकाली जाएगी. इस यात्रा में महासभा के 17 राज्यों की इकाइयों के प्रमुख शामिल होंगे.

भारद्वाज ने बताया कि ये सभी पदाधिकारी दिल्ली में महासभा भवन में एकत्र होंगे और 15 मार्च को दिल्ली में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने का प्रयास करेंगे.

उन्होंने कहा, ‘इस यात्रा का मुख्य उद्देश नाथूराम गोडसे एवं नारायण राव आप्टे के बारे में जानकारी लोगों तक, खासतौर से युवाओं तक पहुंचाना है.’

बीते साल मार्च में अखिल भारत हिंदू महासभा ने गांधीवाद को देश में बढ़ते आतंकवाद की वजह बताते हुए सभी सरकारी दफ्तरों में लगी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीरों और प्रतिमाओं को तुरंत हटाए जाने की मांग की थी.

गोडसे ज्ञानशाला खोलने के अलावा हिंदू महासभा इससे पहले भी इस तरह के आयोजन कर चुका है. 30 जनवरी 2019 को हिंदू महासभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में गांधी के प्रतीकात्मक पुतले को गोली मारी गई थी.

मई 2019 में अखिल भारत हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग स्थानों पर नाथूराम गोडसे के जन्मदिन पर कार्यक्रमों का आयोजन किया था. संगठन ने दिल्ली में गांधी की समाधि राजघाट को तोड़ने की भी मांग राष्ट्रपति से की थी.

इससे पहले साल 2017 में महासभा ने ग्लालियर स्थित अपने कार्यालय में गोडसे का एक मंदिर बना दिया था.

नफरत के सौदागर हैं भाजपा, संघ और हिंदू महासभा के कुछ तत्व: दिग्विजय सिंह

अखिल भारत हिंदू महासभा की 14 मार्च को प्रस्तावित यात्रा की कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने रविवार को कड़ी निंदा करते हुए आरोप लगाया कि महासभा, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ तत्व नफरत के सौदागर हैं.

गोडसे यात्रा को लेकर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर सिंह ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदू महासभा के कुछ तत्व भारत वर्ष की सर्वधर्म समभाव की परंपरा, संस्कार और संस्कृति के विरोधी हैं. ये (तत्व) नफरत के सौदागर हैं और नफरत फैला कर हिंसा करते हैं.’

उन्होंने कहा कि इन तत्वों की कथित तौर पर वही विचारधारा है, जिस विचारधारा के चलते नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी जैसे महान व्यक्तित्व की हत्या की थी, इसलिए वह गोडसे को लेकर हिंदू महासभा की प्रस्तावित यात्रा की निंदा करते हैं.

बहरहाल, इन दिनों स्वयं कांग्रेस को ग्वालियर नगर निगम के पार्षद बाबूलाल चौरसिया को पार्टी में वापस लेने पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है जो पिछले चुनावों में हिंदू महासभा से जुड़कर पार्षद बने थे और गोडसे की अर्धप्रतिमा की स्थापना में कथित तौर पर शामिल रहे थे.

दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस में चौरसिया की वापसी को मीडिया निरर्थक तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है.

उन्होंने कहा, ‘चौरसिया ने हिंदू महासभा में रहने के दौरान गोडसे के पक्ष में जो बयानबाजी की थी, हम उसकी निंदा करते हैं. वैसे इस बयानबाजी को लेकर उन्होंने पहले ही माफी मांग ली है.’

केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ सिंह की अगुवाई में सूबे में जगह-जगह किसान महापंचायतों का आयोजन किया जा रहा है. लेकिन अब तक इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को शामिल होते नहीं देखा गया है.

इस बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा, ‘ये किसान महापंचायतें गैर राजनीतिक हैं. इनमें कमलनाथ की ओर से उनके वे प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं जो किसान संगठनों से जुड़े हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)