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कृषि क़ानून: किसान संघों ने 26 मार्च को भारत बंद का आह्वान किया

नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे किसान आंदोलन के चार महीने पूरे होने के मौक़े पर किसान संघों ने 26 मार्च को भारत बंद का आह्वान किया है. किसान नेता बूटा सिंह बुर्जगिल ने कहा कि किसान और ट्रेड यूनियन मिलकर 15 मार्च को पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि और रेलवे के निजीकरण के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करेंगे.

कृषि कानूनों को रद्द करने के साथ दिसंबर 2020 में हुए भारत बंद के दौरान एक प्रदर्शन. (फोटो: पीटीआई)

कृषि कानूनों को रद्द करने के साथ दिसंबर 2020 में हुए भारत बंद के दौरान एक प्रदर्शन. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: किसान संघों ने केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ 26 मार्च को अपने आंदोलन के चार महीने पूरे होने के मौके पर भारत बंद का आह्वान किया है.

किसान नेता बूटा सिंह बुर्जगिल ने बुधवार को कहा कि किसान और ट्रेड यूनियन मिलकर 15 मार्च को पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि और रेलवे के निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे.

उन्होंने कहा, ‘डीज़ल, पेट्रोल और एलपीजी की बढ़ती कीमतों के खिलाफ जिलाधिकारियों को ज्ञापन दिए जाएंगे. निजीकरण के खिलाफ समूचे देश में रेलवे स्टेशनों पर प्रदर्शन किए जाएंगे.’

उन्होंने सिंघू बॉर्डर पर पत्रकारों से कहा, ‘हम 26 मार्च को अपने आंदोलन के चार महीने पूरे होने के मौके पर पूर्ण रूप से भारत बंद करेंगे. शांतिपूर्ण बंद सुबह से शाम तक प्रभावी रहेगा.’

उन्होंने कहा कि किसान 19 मार्च को ‘मंडी बचाओ-खेती बचाओ’ दिवस मनाएंगे.

किसान संघों ने भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव का शहीदी दिवस मनाने का भी फैसला लिया है.

बुर्जगिल ने कहा कि उस दिन देश के सभी हिस्सों से युवा दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के प्रदर्शन में शामिल होंगे.

किसान नेताओं ने कहा कि उन्होंने 28 मार्च को होलिका दहन के दौरान नए कृषि कानूनों की प्रतियां जलाने का भी निर्णय लिया है.

उन्होंने कहा कि 11 मार्च को बिहार में ‘किसान यात्रा’ निकाली जाएगी जो 18 मार्च को किसान क्रांति दिवस पर खत्म होगी.

बता दें कि, इससे पहले केंद्र के नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान संगठनों के आह्वान पर पिछले साल आठ दिसबंर को ‘भारत बंद’ हुआ था. इस दौरान देश के कई हिस्सों में दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे और परिवहन पर असर पड़ा था. उस भारत बंद को विभिन्न राजनीतिक दलों समेत क्षेत्रीय संगठनों का भी समर्थन मिला था.

नए कृषि कानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए कानूनी गारंटी की मांग को लेकर दिल्ली के- सिंघू, टीकरी और गाज़ीपुर बॉर्डर पर किसान पिछले साल नवंबर के अंत से धरना दे रहे हैं. इनमें अधिकतर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)