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उत्तर प्रदेश: रेप पीड़िता के पिता की मौत के मामले में तीन पुलिसकर्मी निलंबित

कानपुर के सजेती इलाके में एक पुलिसकर्मी के दो बेटों समेत तीन लोगों पर 13 वर्षीय लड़की को अगवा कर सामूहिक बलात्कार करने का आरोप है. इसके बाद दस मार्च को पीड़िता के पिता की कथित ट्रक दुर्घटना में मौत हो गई. परिजनों ने इसे सुनियोजित हत्या बताते हुए पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार की बात कही है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक नाबालिग बलात्कार पीड़िता के पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में लापरवाही बरतने के आरोपी दो पुलिस उप-निरीक्षकों और एक सिपाही को गुरुवार को निलंबित कर दिया गया.

कानपुर के पुलिस महानिरीक्षक प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि सजेती थाने के बीट इंचार्ज राम शिरोमणि और कॉन्स्टेबल आदेश कुमार को सामूहिक बलात्कार के मामले में लापरवाही बरतने आरोप में निलंबित किया गया है.

वहीं, घाटमपुर पुलिस चौकी के प्रभारी अब्दुल कलाम को बलात्कार पीड़िता के पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित किया गया है.

उन्होंने बताया कि घाटमपुर के पुलिस क्षेत्राधिकारी द्वारा की गई शुरुआती जांच में दोषी पाए जाने पर इन तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है. निलंबित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई है.

सिंह ने बताया कि अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) बृजेश श्रीवास्तव को यह जांच सौंपते हुए उनसे जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है. विभागीय जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर निलंबित पुलिस कर्मियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर कोई फैसला किया जाएगा.

गौरतलब है कि 13 वर्षीय एक बलात्कार पीड़िता के पिता की 10 मार्च को कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र में उस वक्त एक ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई थी, जब पास में ही स्थित अस्पताल में उनकी बेटी का मेडिकल परीक्षण किया जा रहा था.

परिवार के सदस्यों ने इसे सुनियोजित हत्या का मामला करार दिया था. इसके अलावा पीड़िता के परिजनों द्वारा पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

उनका कहना है कि जब से गैंगरेप का मामला दर्ज हुआ, तबसे उन्हें आरोपियों के परिवार द्वारा धमकाया जा रहा था और पुलिस इसमें उनका साथ दे रही थी.

बीते 8 मार्च को लड़की मवेशियों के लिए चारा लाने गई थी, तब उसे आरोपियों ने अगवा कर लिया और किसी अज्ञात स्थान पर ले गए, जहां उन्होंने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया. लड़की ने किसी तरह घर पहुंचकर आपबीती परिवार वालों को सुनाई, जिसके बाद परिवार ने थाने में शिकायत दर्ज कराई.

पुलिस के अनुसार  इस घटना के सिलसिले में दीपू यादव, उसके भाई सौरभ यादव और दोस्त गोलू यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. गोलू को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया था.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, परिवार ने आरोप लगाया है कि एक सर्किल पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर पीड़िता के पिता को अपमानित किया था. परिवार ने ये भी आरोप लगाया कि अधिकारी गिरीश चंद्र ने लड़की को भी परेशान और अपमानित किया था.

परिजनों ने कहा कि पुलिस शुरू में सामूहिक बलात्कार की शिकायत दर्ज करने के लिए भी अनिच्छुक थी और उन्होंने पांच बार पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराने के लिए बाध्य किया.

परिवार के एक सदस्य ने कहा कि चंद्र मेडिकल परीक्षण के लिए लड़की को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजते रहे. उन्होंने कहा कि चंद्र ने दूसरे के सामने उनके भाई और भतीजी को अनेकों बार गालियां भी दी थीं.

उन्होंने कहा, ‘कितनी बार किसी पीड़ित की चिकित्सकीय जांच की जाती है? अस्पताल में भी उन्होंने कई बार उनके साथ दुर्व्यवहार किया. उन्होंने अन्य पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उनके चरित्र पर सवाल उठाए जो उस पर हंसे भी थे.’

रिपोर्ट के अनुसार, गिरीश चंद्र ने इन आरोपों का कोई जवाब नहीं दिया है.

उधर, पुलिस उपमहानिरीक्षक ने इस बात की पुष्टि की कि बलात्कार का दूसरा आरोपी दीपू यादव भी गिरफ्तार कर लिया गया है. गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी गोलू यादव के भाई सौरभ की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं.

इस बीच बलात्कार के मुख्य आरोपी गोलू यादव के पिता पुलिस उप-निरीक्षक देवेंद्र यादव को भी निलंबित कर दिया गया है. यादव को जालौन जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के मद्देनजर वीआईपी ड्यूटी पर भेजा गया था. उसके बाद से वह लापता है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)