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आईआईएमसी में अब संस्कृत में भी पढ़ाई जाएगी पत्रकारिता

भारतीय जनसंचार संस्थान उर्दू, मराठी, मलयालम, मराठी के बाद संस्कृत में पत्रकारिता का तीन महीने का शॉर्ट टर्म कोर्स शुरू करने जा रहा है.

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(फोटो साभार: आईआईएमसी)

राजधानी दिल्ली का भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) अब संस्कृत पत्रकारिता को लेकर एक नया पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है. पिछले हफ़्ते हुई कार्यकारी परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया. इसका ऐलान गुरुवार को किया गया है.

संस्थान के महानिदेशक केजी सुरेश के अनुसार यह पाठ्यक्रम तीन महीनों का शॉर्ट टर्म कोर्स होगा. संस्थान में इससे पहले भी उर्दू, मलयालम, मराठी और उड़िया भाषा में पत्रकारिता पाठ्यक्रम है.

हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार से बात करते हुए केजी सुरेश कहते हैं, ‘भारतीय भाषा विभाग नाम से एक नया विभाग बनाया है. यह विभाग संस्कृत के अलावा दूसरी भाषाओं में पाठ्यक्रम शुरू करेगा.’

उन्होंने बताया, इसके लिए श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापाठ के साथ समझौता किया गया है. यह संस्थान भाषा पर काम करेगा और आईआईएमसी पाठ्यक्रम तैयार करने का काम करेगा.’

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाला आईआईएमसी प्रमुख संस्थान है. आईआईएमसी से पत्रकारिता, एडवरटाइज़िंग और जनसंपर्क में कोर्स उपलब्ध हैं. इसके अलावा यहां भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी, विदेश में संवाददाता बनने और सशस्त्र बलों के कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी होता है.

संस्कृत पत्रकारिता पर केजी सुरेश कहते हैं, ‘अभी संस्कृत के कुछ ही प्रकाशन हैं, इसके अलावा आॅल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर संस्कृत भाषा में कार्यक्रम होते हैं. हमारे शोध से पता चला है कि भारतीय भाषाओं में पत्रकारिता के लिए बढ़ता हुआ बाज़ार है.’

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, देश में अख़बार और मैगज़ीन के प्रसार का आंकड़ा जांचने वाली संस्था आॅडिट ब्यूरो आॅफ सर्कुलेशन के अनुसार जून से लेकर दिसंबर 2015 के बीच अंग्रेज़ी और हिंदी प्रकाशन में क्रमश: 17.6 प्रतिशत और 37.8 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है. वहीं बंगाली, मलयालम और मराठी प्रकाशनों ने 5-9 प्रतिशन की बढ़ोतरी दर्ज की है.

2016 में देश का पहला संस्कृत अख़बार ‘सुधर्मा’ ने फंड के लिए मदद की अपील की थी. सूत्रों के अनुसार अख़बार प्रबंधन ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से भी विज्ञापन के लिए संपर्क किया था लेकिन इस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका.

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए केजी सुरेश ने कहा, ‘संस्कृत मीडिया विकास प्रक्रिया में है और ऐसे लोग हैं जो इसमें रुचि रखते हैं. जो लोग पत्रकार बनना चाहते हैं उन्हें बेहतर तैयारी की ज़रूरत होती है. हम अपने सामुदायिक रेडियो स्टेशन से उन्हें प्रशिक्षण देंगे.’