राजनीति

हिमाचल: जल मिशन फंड का क़रीब आधा भाग सीएम और जल शक्ति मंत्री के क्षेत्र में आवंटित करने का आरोप

विधानसभा में विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा रखे गए कटौती प्रस्ताव में कहा गया कि 2019-20 में अगस्त तक हिमाचल प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत ख़र्च किए गए कुल 939 करोड़ रुपये में से जल शक्ति मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में 263 करोड़ और मुख्यमंत्री के क्षेत्र में 181 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. इस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र को विकास की सख़्त ज़रूरत थी.

विधानसभा में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर. (फोटो: ट्विटर/@jairamthakurbjp)

विधानसभा में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर. (फोटो: ट्विटर/@jairamthakurbjp)

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने मंगलवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह पर आरोप लगाया कि विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत कोष आवंटन के दौरान वे केवल अपने विधानसभा क्षेत्रों का ही ख्याल रखते हैं और बाकी सभी क्षेत्रों की उपेक्षा करते हैं.

राज्य विधानसभा के बजट सत्र में ‘सिंचाई, जल आपूर्ति तथा स्वच्छता’ विषय पर बोलते हुए अग्निहोत्री ने जल जीवन मिशन के तहत कोष के आवंटन पर श्वेत पत्र जारी करविपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्रीने की मांग की.

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री तथा जल शक्ति मंत्री विकास संबंधी विभिन्न योजनाओं के कोष आवंटन के वक्त केवल अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों क्रमश: सिराज तथा धरमपुर का ही ध्यान रखते हैं.

वहीं, डलहौजी से कांग्रेस विधायक आशा कुमारी ने कहा कि ‘हम दो हमारे दो’ सिद्धांत केंद्र के साथ-साथ राज्य में भी चल रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आशा कुमारी ने पिछले हफ्ते सदन में रखे गए कटौती प्रस्ताव पर जल शक्ति मंत्रालय से जवाब मांगा.

इसमें कहा गया था कि 2019-20 में अगस्त तक राज्य में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत खर्च किए गए कुल 939 करोड़ रुपये में से धरमपुर में 263 करोड़ रुपये और सिराज में 181 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. इस तरह से कुल आवंटन का 47.3 फीसदी इन दो विधानसभा क्षेत्रों में खर्च किया गया.

इसके विपरीत ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र में मात्र 4 लाख रुपये का उपयोग किया गया था, जहां से भाजपा विधायक रमेश धवाला ने पिछले सप्ताह मिशन के तहत धन आवंटित करने में विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों के बीच इस असमानता पर कड़ी आपत्ति जताई थी.

हालांकि, इन आरोपों से इनकार करते हुए ठाकुर ने कहा कि विकास कार्यों के लिए कोष आवंटित करने के दौरान राज्य के सभी 68 निर्वाचन क्षेत्रों का ध्यान रखा जाता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने जवाली निर्वाचन क्षेत्र के लिए हाल में 162 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन किया है तथा अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे कदम उठाए गए हैं.

ठाकुर ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र को विकास की सख्त जरूरत थी. उन्होंने सवाल उठाया, ‘क्या आप जानते हैं कि सिराज में क्या स्थिति थी? सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं के बिना कितनी पंचायतें थीं? यहां तक कि अगर कुछ विकास कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुसार हुए हैं, तो समस्या क्या है?’

कटौती प्रस्ताव पर जवाब देते हुए जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि धन आवंटित करते समय सिराज के साथ हरोली (विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री के निर्वाचन क्षेत्र) की तुलना नहीं की जा सकती क्योंकि सिराज बहुत बड़ा भौगोलिक क्षेत्र है, जबकि हरोली बहुत छोटा है.

उन्होंने आगे कहा, ‘पच्छाद, शिलाई और किन्नौर जैसे बड़े निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना हरोली से नहीं की जा सकती. इसलिए 68 निर्वाचन क्षेत्रों में से प्रत्येक में समान राशि आवंटित नहीं की जा सकती है.’

उन्होंने कहा कि हर घर में 2024 तक जल जीवन मिशन के तहत नल का जल कनेक्शन मिलेगा और किसी भी निर्वाचन क्षेत्र की उपेक्षा नहीं की जाएगी.

मंत्री ने जलवायु परिवर्तन पर चिंता व्यक्त की और उन्होंने कहा कि यह कोरोना वायरस की तुलना में अधिक घातक साबित हो सकता है.

उन्होंने कहा, ‘लाहौल-स्पीति में रोहतांग के रूप में खतरनाक स्थिति उत्पन्न हो गई है क्योंकि इस मौसम में सामान्य 30-40 फीट बर्फबारी की तुलना में केवल 3-4 फीट बर्फबारी हुई है, जिससे न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी आने वाली गर्मियों में पानी की कमी हो सकती है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘जलवायु परिवर्तन केवल सत्तारूढ़ दल या विपक्ष के लिए संकट नहीं है, बल्कि आम आदमी भी इसके कारण उभर रही स्थिति को लेकर चिंतित है.’

कई विधायकों ने राज्य में बढ़ती पानी की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई जगहों पर गर्मी से पहले ही पानी की कमी देखी जाने लगी है.

आशा कुमारी ने कहा कि शिमला शहर के कुछ हिस्से और चंबा में बनीखेत पानी की आपूर्ति की कमी का सामना कर रहे हैं.

रामपुर के विधायक नंद लाल ने कहा कि उनके क्षेत्र के एक गांव में आठ दिनों के बाद पानी की आपूर्ति होती है, जबकि रोहड़ू के विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के हिस्सों को हफ्तों या कभी-कभी एक महीने के बाद पानी मिलता है.

नैना देवी के विधायक राम लाल ठाकुर और शिला विधायक हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत पानी के पाइप बिछाने वाले ठेकेदार अनुबंध शर्तों के अनुसार उन्हें जमीन के नीचे स्थापित नहीं कर रहे हैं, जिससे पाइप को नुकसान हो रहा है.

दैनिक जागरण के अनुसार, अग्निहोत्री ने अन्य प्रोजेक्टों में भी भेदभाव का आरोप लगाया. इस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर व उनके बीच हल्की नोक-झोंक भी हुई. इसके बाद कटौती प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)