विज्ञान

केरल में पाई गई केंचुए की दो नई प्रजातियां

शोधकर्ताओं ने केरल में पाई गई नई प्रजातियों को द्राविडा पॉलीडाइवरटिकुलाटा और द्राविडा थॉमसी नाम दिया है.

(प्रतीकात्मक फोटो : रॉयटर्स )

(प्रतीकात्मक फोटो : रॉयटर्स )

तिरुवनंतपुरम: वैज्ञानिकों ने केरल में पश्चिमी घाट पर्वतीय श्रेणी में केंचुए की दो नई प्रजातियों की खोज की है. समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार केरल में महात्मा गांधी विश्वविद्यालय और हिमाचल प्रदेश के शूलिनी विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने केंचुए की नई प्रजातियों को द्राविडा पॉलीडाइवरटिकुलाटा और द्राविडा थॉमसी नाम दिए हैं.

अनसुंधानकर्ताओं ने बताया कि द्रविड़ पॉलीडाइवरटिकुलाटा इराविकुलम राष्ट्रीय पार्क,पाम्पादुन शोला राष्ट्रीय पार्क और चिन्नार वन्यजीव अभयारण्य समेत मुन्नार क्षेत्र के संरक्षित शोला ग्रासलैंड में व्यापक रूप से पायी जाती है.

उनके अनुसार केंचुए की दूसरी नई प्रजाति द्राविडा थॉमसी मलाप्पुरम और कोझािकोड़ के बीच सीमा पर कक्कादाम्पोयिल के निकट कोझीप्पारा झरने से इकठ्ठा की गयी.

एनडीटीवी की ख़बर के अनुसार आदिम परिवार मोनिलीगेसट्रिडे से जुड़ी नई प्रजातियों के अतिरिक्त, वैज्ञानिकों ने उसी वंश की पांच प्रजातियों के होने की पुष्टि की है जिनकी उपस्थिति पहले कभी भी राज्य द्वारा दर्ज नहीं की गई हैं.

शोधकर्ताओं के अनुसार आज की तारीख़ में द्राविडा वंश की 73 प्रजातियां भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाती हैं. जिनमें से सबसे 43 प्रजातियां व्यापक रूप में  पश्चिमी घाट में पाई जाती हैं. केरल इन प्रजातियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र है.

पत्रिका ‘ज़ू कीज़’ में प्रकाशित इस अध्ययन से पहले, राज्य में पाई जाने वाली 16 द्राविडा प्रजातियां थीं, जिनमें से दस अनूठी थीं. दो नई प्रजातियों और पांच नए स्थानीय रिकॉर्ड की वर्तमान खोज ने राज्य में इस वंश की विशाल प्रजातियों की समृद्धि में योगदान देते हुए इसका विस्तार किया है.

वर्तमान में द्राविडा वंश में लगभग 200 प्रजातियां ज्ञात हैं. इनका विस्तार भारत-चीन क्षेत्र से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया और उत्तर में जापान में भी फैला हुआ है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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