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लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा की शिकायतों में हुई बढ़ोतरी बरक़रार: राष्ट्रीय महिला आयोग

लॉकडाउन ख़त्म होने के एक साल बाद भी आयोग को हर महीने महिलाओं के विरुद्ध अपराध की दो हज़ार से अधिक शिकायतें मिल रही हैं, जिनमें से लगभग एक चौथाई घरेलू हिंसा से संबंधित हैं. राष्ट्रीय महिला आयोग को वर्ष 2019 में आयोग को घरेलू हिंसा से संबंधित 2,960 शिकायतें मिली थीं, जबकि 2020 में 5,297 शिकायतें प्राप्त हुई हैं.

(फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स /CC BY-SA 2.0)

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नई दिल्ली: गत वर्ष लॉकडाउन के दौरान जब ज्यादातर लोग घरों में बंद थे, राष्ट्रीय महिला आयोग को मिलने वाली घरेलू हिंसा की शिकायतों की संख्या में 2019 के मुकाबले वृद्धि देखने को मिली.

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 में आयोग को घरेलू हिंसा से संबंधित 2,960 शिकायतें मिली थीं जबकि 2020 में 5,297 शिकायतें प्राप्त हुईं और यह सिलसिला अब भी बरकरार है.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 में आयोग को महिलाओं के विरुद्ध किए गए अपराध की कुल 19,730 शिकायतें मिलीं, जबकि 2020 में यह संख्या 23,722 पर पहुंच गई.

लॉकडाउन खत्म होने के एक साल बाद भी आयोग को हर महीने महिलाओं के विरुद्ध अपराध की दो हजार से अधिक शिकायतें मिल रही हैं, जिनमें से लगभग एक चौथाई घरेलू हिंसा से संबंधित हैं.

राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2021 से 25 मार्च 2021 के बीच महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की 1,463 शिकायतें प्राप्त हुईं.

लॉकडाउन लगाए जाने के बाद आयोग को घरेलू हिंसा की इतनी शिकायतें मिलने लगी थीं कि आयोग ने इसके लिए समर्पित एक वॉट्सऐप नंबर की शुरुआत की थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, घरेलू हिंसा की शिकायतों की संख्या लॉकडाउन के महीनों के दौरान बढ़ती गई और जुलाई 2020 में 660 ऐसी शिकायतें प्राप्त हुईं.

एनसीडब्ल्यू के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल, 2020 से अब तक महिलाओं के खिलाफ अपराध की 25,886 शिकायतें मिली हैं, जिसमें घरेलू हिंसा की 5,865 शिकायतें शामिल हैं.

इसके अलावा एनसीडब्ल्यू को 2020 में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की 23,722 शिकायतें मिलीं, जिसमें एक चौथाई शिकायतें घरेलू हिंसा की हैं जो पिछले छह सालों में सर्वाधिक है.

आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा था कि आर्थिक असुरक्षा, तनाव में वृद्धि, वित्तीय समस्याएं और परिवार की ओर से मिलने वाले भावनात्मक समर्थन की कमी वर्ष 2020 में घरेलू हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी का कारण हो सकते हैं.

महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना ‘पीपुल अगेंस्ट रेप इन इंडिया’ (परी) नामक संस्था की अध्यक्ष हैं.

उन्होंने कहा, ‘इस तरह की घटनाओं में वृद्धि दर्ज हुई है क्योंकि महिलाओं में भी जागरूकता बढ़ रही है. वे इसकी रिपोर्टिंग कर रही हैं और इसके बारे में बात कर रही हैं. पहले वे अपनी शिकायतों को दबाती थीं.’

बता दें कि बीते दिसंबर में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) ने एक रिपोर्ट जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि पांच राज्यों की 30 फीसदी से अधिक महिलाएं अपने पति द्वारा शारीरिक एवं यौन हिंसा की शिकार हुई हैं.

महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामलों में सबसे बुरा हाल कर्नाटक, असम, मिजोरम, तेलंगाना और बिहार में है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)