राजनीति

घायल ममता बनर्जी को लेकर भाजपा अध्यक्ष ने कहा, साड़ी में टांग दिखाना बंगाल की संस्कृति नहीं

विधानसभा चुनाव राउंड-अप: पश्चिम बंगाल के एक स्थानीय नेता के चार पाकिस्तान बनने के दावे वाले कथित वीडियो से उपजा विवाद. असम में शाह ने कहा, ‘लव एंड लैंड जिहाद’ रोकने के लिए क़ानून बनाएगी भाजपा. कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा कि असम के लोग चुनाव में भाजपा की नफ़रत की राजनीति को ख़ारिज कर देंगे. तमिलनाडु में जेपी नड्डा बोले- द्रमुक-कांग्रेस की राजनीति को ख़ारिज करें.

दिलीप घोष. (फोटो: पीटीआई)

दिलीप घोष. (फोटो: पीटीआई)

खड़गपुर: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अपनी विवादास्पद टिप्पणी को उचित ठहराते हुए पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने बृहस्पतिवार को कहा कि साड़ी पहनकर कोई महिला अपनी टांग दिखाए, यह बंगाली संस्कृति नहीं है.

पुरुलिया में मंगलवार को एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए घोष ने बनर्जी को उनके जख्मी पैर को लेकर निशाना बनाया था और कहा कि अगर वोटों के लिए उन्हें अपने ‘टूटे हुए पैर’ दिखाना है तो वे बरमूडा पहन सकती हैं, जिससे लोग उसे स्पष्ट रूप से देख पाएंगे.

गौरतलब है कि 10 मार्च को नंदीग्राम में अपना नामांकन दाखिल करने के बाद मुख्यमंत्री चोटिल हो गई थीं, जिसके बाद से उनके एक पैर पर प्लास्टर लगा हुआ है.

खबरों के अनुसार, घोष ने कहा, ‘लोग उनका चेहरा नहीं देखना चाहते हैं, इसलिए वह अपना टूटा पैर दिखा रही हैं. वह साड़ी पहन रही हैं, जो एक पैर को ढंक रहा है और दूसरे को दिखा रहा है. कभी किसी को इस तरह से साड़ी पहनते नहीं देखा है. अगर आप अपना पैर दिखाना चाहती हैं तो बरमूडा पहनिए.’

इस टिप्पणी के बारे में पूछने पर घोष ने संवाददाताओं से कहा, ‘महिला मुख्यमंत्री होने के नाते हम उनसे कुछ अदब की उम्मीद करते हैं, जो बंगाल की संस्कृति और परंपरा के मुताबिक हो और बंगाली महिलाओं के मूल्यों के अनुरूप हो.’

उन्होंने कहा, ‘बहरहाल, हम यहां साड़ी पहनी हुई एक महिला को देख रहे हैं जो अपनी टांग अकसर दिखाती हैं. क्या आप इसे बंगाल की संस्कृति के मुताबिक मानते हैं? मैंने इसका विरोध किया है.’

खबरों के अनुसार, घोष ने यह भी कहा, ‘मैं नहीं जानता जिस डॉक्टर ने उनके बाएं पैर का प्लास्टर किया, वह कहा से आया था, जबकि चोट दाएं पैर पर लगी थी. हमने कोई रिपोर्ट नहीं देखी है. क्या फ्रैक्चर हुआ था, तभी प्लास्टर को सिर्फ दो दिन में उतारा नहीं जा सकता. इसमें 21 दिन का समय लगता है. ऐसे डॉक्टर कहां से पास हुए हैं.’

घोष की प्रतिक्रिया पर तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि ‘बंगाल की बेटी’ के अपमान को लेकर भाजपा अध्यक्ष रक्षात्मक मुद्रा में हैं और लोग ‘महिला विरोधी’ को दंडित करेंगे.

पार्टी ने ट्वीट किया, ‘चाहे साड़ी पहनी महिला हो या फटी जींस पहनी महिला, बंगाल माफ नहीं करेगा.’

राज्य के मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल की महिलाएं ऐसी मानसिकता वाले लोगों को एक भी वोट नहीं देंगी.

दिलीप घोष की टिप्पणी पर ट्वीट करते हुए टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, ‘भाजपा के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष ने जनसभा में पूछा कि ममता दी साड़ी क्यों पहन रही हैं, उन्हें बरमूडा शॉर्ट्स पहनना चाहिए जिससे अपना पैर अच्छे से दिखा सकें. इन विकृतों (लोगों को) को लगता है कि वे बंगाल जीतने जा रहे हैं.’

बंगालः नेता के चार पाकिस्तान बनने के दावे वाले वीडियो से उपजा विवाद

नानूर: एक कथित वीडियो क्लिप में एक स्थानीय नेता को हाथ में टीएमसी का पोस्टर लेकर यह कहते हुए सुना गया, ‘अगर भारत के 30 प्रतिशत मुसलमान एकजुट हो जाएं तो चार पाकिस्तान बनाए जा सकते हैं.’

इस बयान की भाजपा ने जोरदार आलोचना करते हुए जानना चाहा कि क्या बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी इस तरह के बयान का समर्थन करती है.

बहरहाल, टीएमसी ने खुद को बयान से अलग करते हुए कहा कि वीडियो में दिख रहा शेख आलम टीएमसी का सदस्य नहीं है और उसने जो कहा है, पार्टी उसका समर्थन नहीं करती है.

बीरभूम के नानूर में बनाया गया 30 सेकेंड का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है.

कथित वीडियो क्लिप में आलम को यह कहते हुए सुना जा सकता है, ‘हम अल्पसंख्यक 30 फीसदी (आबादी का) हैं. शेष 70 फीसदी हैं. वे (भाजपा) सोचते हैं कि वे 70 प्रतिशत के सहयोग से सत्ता में आएंगे (बंगाल में). अगर 30 फीसदी अल्पसंख्यक एकजुट हो जाएं, अगर भारत के मुस्लिम एकजुट हो जाएं, तो चार पाकिस्तान बन सकते हैं. फिर भारत के 70 प्रतिशत कहां जाएंगे?’

क्लिप पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय सचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इससे टीएमसी की वास्तविक मंशा का पता चलता है.

उन्होंने कहा, ‘इस वीडियो से टीएमसी की सच्चाई बाहर आ गई है. यह गंभीर बात है. भारत में रहने वाला कोई व्यक्ति कैसे दावा कर सकता है कि वह देश को पाकिस्तान बना देगा? हम ऐसा कभी नहीं होने देंगे. ममता जी राज्य और देश के लोगों को जवाब दें.’

भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित मालवीय ने एक ट्वीट में पूछा कि क्या ममता बनर्जी आलम के रूख का समर्थन करती हैं.

बहरहाल, टीएमसी के बीरभूम जिला के अध्यक्ष अनुब्रत मंडल ने स्पष्ट किया कि आलम सत्तारूढ़ दल का नेता नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘शेख आलम न तो पार्टी का सदस्य है न ही नानूर से नेता है. हमारा उससे कोई संबंध नहीं है. हम इस तरह के बयान का समर्थन नहीं करते हैं. भारत धर्मनिरपेक्ष देश है और रहेगा.’

मनमोहन ने असम के लोगों से कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन को जिताने की अपील की

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. (फोटो: पीटीआई)

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को असम के लोगों का आह्वान किया कि वे राज्य में समावेशी विकास के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाले ‘महाजोत’ (महागठबंधन) के पक्ष में मतदान करें.

करीब तीन दशक तक राज्यसभा में असम का प्रतिनिधित्व करने वाले सिंह ने भाजपा पर लोगों को धर्म और भाषा के नाम पर बांटने का भी आरोप लगाया.

उन्होंने असम में पहले चरण के मतदान के लिए प्रचार अभियान थमने से कुछ घंटे पहले एक वीडियो संदेश में कहा, ‘कई वर्षों तक असम मेरा दूसरा घर रहा है. यह मेरा सौभाग्य रहा कि मैंने राज्यसभा में असम का 28 वर्षों तक प्रतिनिधित्व किया. मैं असम के लोगों के स्नेह और समर्थन के लिए उनका आभारी हूं.’

उन्होंने कहा, ‘असम के लोगों ने मुझे पांच साल तक देश के वित्त मंत्री और 10 साल तक प्रधानमंत्री के तौर पर देश की सेवा का मौका दिया. आज समय आ गया है कि इस विधानसभा चुनाव में लोग समझदारी के साथ मतदान करें.’

उन्होंने भाजपा का नाम लिए बगैर उस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘नोटबंदी और गलत ढंग से जीएसटी लागू करने से अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई है. युवा रोजगार के लिए परेशान हैं. पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से आम आदमी परेशान है. गरीब और गरीब हो रहे हैं. कोविड के संकट ने लोगों के लिए और भी मुश्किल पैदा कर दी है.’

सिंह ने जनता का आह्वान किया, ‘आपको एक ऐसी सरकार के लिए वोट करना चाहिए जो संविधान और लोकतंत्र के सिद्धांतों को बरकरार रखे, हर नागरिक की परवाह करे और समावेशी विकास करे. असम में कांग्रेस उसकी भाषा, इतिहास और संस्कृति की रक्षा करने और विकास के लिए प्रतिबद्ध है.’

असम के लोग चुनाव में भाजपा की नफरत की राजनीति को खारिज कर देंगे: कमलनाथ

गुवाहाटी: वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भाजपा पर असमिया भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में असम के लोग समाज को विभाजित करने और नफरत फैलाने की भाजपा की राजनीति को खारिज कर देंगे.

कमलनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिए बिना आरोप लगाया कि दिल्ली में बैठे दो लोग असम के फैसले करते हैं.

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘असम या कहीं और के फैसले दिल्ली में बैठे दो लोगों द्वारा किए जाते हैं. उनके लिए पार्टी अध्यक्ष या राज्य के नेताओं के पद का कोई मूल्य है. गुजराती आकाओं ने फैसला किया है कि मुख्यमंत्री कौन होगा और असम को कैसे चलाना चाहिए.’

उन्होंने आरोप लगाया कि असम में भाजपा नीत सरकार ने अपने चुनावी वादों को पूरा नहीं किया और ‘पिछले पांच वर्षों के लिए प्रदर्शन का स्कोर कार्ड’ पेश करने में नाकाम रही.

कमलनाथ ने कहा, ‘पहले चरण के चुनाव के लिए भाजपा का अभियान नकारात्मक रहा है और उसने नफरत की राजनीति की बात की. कांग्रेस का मानना है कि हमें असम के लिए अपने सपनों को पूरा करने की खातिर काम करना चाहिए और अपनी दृष्टि को वास्तविकता में बदलना चाहिए.’

कमलनाथ ने गुवाहाटी में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसान 120 दिनों से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं लेकिन प्रधानमंत्री को उनसे बातचीत करने का समय नहीं है.

असम में शाह ने कहा, ‘लव एंड लैंड जिहाद’ रोकने के लिए कानून बनाएगी भाजपा

कमालपुर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि भाजपा असम में सत्ता में आएगी तो ‘लव एंड लैंड जिहाद’ के खतरे पर काबू के लिये कानून बनाएगी.

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (फोटोः पीटीआई)

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (फोटोः पीटीआई)

शाह ने एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि असमिया संस्कृति और सभ्यता को मजबूत बनाने के लिए उचित कानून और नीतियां तैयार की जाएंगी.

घोषणा पत्र में यह वादा भी किया गया है कि सांप्रदायिक बहिष्कार और अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले संगठनों और व्यक्तियों की पहचान और उन्हें खत्म करने के लिए एक नीति लागू की जाएगी.

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस का घोषणा पत्र महज चुनावी प्रचार का साधन है लेकिन भाजपा का घोषणा पत्र क्रियान्वयन के लिए है.’

उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को असम की पहचान का प्रतिनिधि बताने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘वह (गांधी) असम और उसकी पहचान को नहीं समझते.’

उन्होंने कहा, ‘हम अजमल को असम की पहचान का प्रतीक नहीं बनने देंगे चाहे कांग्रेस ऐसा करने के कितने भी प्रयास कर लें. क्या कांग्रेस और एआईयूडीएफ राज्य को अवैध घुसपैठ से बचा सकते हैं?’

उन्होंने कहा, ‘राहुल बाबा को यह याद होना चाहिए कि उनके ही मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कभी एआईयूडीएफ प्रमुख को खारिज किया था और पूछा था ‘अजमल कौन है?’ और अब यह वही कांग्रेस है जिसने वोट के लिए अजमल से हाथ मिला लिया है.’

गांधी को एक ‘पर्यटक’ करार देते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस नेता को राज्य में सिर्फ चुनाव के समय दो-तीन दिनों के लिए देखा जाता है और फिर अगले पांच साल वह गायब हो जाते हैं.

असम विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 47 सीटों पर चुनाव प्रचार समाप्त

गुवाहाटी: असम में पहले चरण की 47 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव प्रचार बृहस्पतिवार शाम को समाप्त हो गया. इन सीटों पर 27 मार्च को मतदान होगा.

शनिवार को होने वाले मतदान में मतदाता 264 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे.

राज्य में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को लागू किया जाना प्रमुख मुद्दा है. इसे लेकर राज्य में प्रदर्शन और हिंसा तक हुई, हालांकि प्रदेश भाजपा इस पर चुप है. यह मुद्दा न तो पार्टी के प्रचार के दौरान सुनाई दिया और न ही इसे पार्टी के घोषणा पत्र में स्थान मिला.

हालांकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने टिप्पणी की है कि यह संसद का कार्य है और इस पर अमल किया जाएगा.

वहीं, कांग्रेस और अन्य दलों ने सत्ता में आने पर असम में इसे लागू नहीं किए जाने को लेकर इसके खिलाफ विधानसभा में विधेयक लाने का आश्वासन दिया है.

पहले चरण की 47 सीटों में से 39 पर भाजपा जबकि 10 पर इसका सहयोगी दल असम गण परिषद एजीपी मैदान में हैं. इनमें से दो पर उसका भगवा दल के साथ मित्रवत मुकाबला भी होगा.

वहीं, कांग्रेस 43 सीटों पर जबकि उसके सहयोगी दल एआईयूडीएफ, राजद, आंचलिक गण मोर्चा (स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर) और सीपीआई-एमएल एक-एक सीट पर चुनाव मैदान में है.

असम जातीय परिषद 41 सीटों पर, जबकि रायजर दल 19 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है. पहले चरण में 78 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं.

चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार पहले चरण में 23 महिला उम्मीदवार भी हैं.

राहुल गांधी ने केंद्र, एलडीएफ सरकार पर साधा निशाना

पलक्कड़: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने छह अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए शुक्रवार को अपने प्रचार अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत करते हुए कमजोर आर्थिक स्थितियों के लिए केंद्र और एलडीएफ सरकारों पर निशाना साधा.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी. (फोटो: पीटीआई)

कांग्रेस नेता राहुल गांधी. (फोटो: पीटीआई)

गांधी ने यहां एक चुनावी सभा में कहा, ‘देश और राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर है और नोटबंदी व त्रुटिपूर्ण जीएसटी के कारण यह बद्तर हो गई है. दोनों ही सरकारें अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में नाकाम रहीं.’

कोयंबटूर से हेलिकॉप्टर के जरिये यहां पहुंचे कांग्रेस नेता दो दिवसीय दौरे पर हैं और इस दौरान पलक्कड़ व मलाप्पुरम जिलों में सभाओं को संबोधित करेंगे.

माकपा के नेतृत्व वाली सत्ताधारी एलडीएफ पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने का उसका प्रयास वैसा ही है, जैसा कोई बिना पेट्रोल के कार को चालू करने की कोशिश करे.

राहुल ने कहा, ‘हमें अर्थव्यवस्था में पूंजी डालने की जरूरत है. जब हमने रोजगार गारंटी योजना को शुरू करने का प्रयास किया तो बहुत से लोगों ने कहा कि यह धन की बर्बादी है. लेकिन बाद में उन्हें मानना पड़ा कि इससे अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला.’

उन्होंने दावा किया कि ‘न्याय’ (न्यूनतम आय गारंटी) योजना से अर्थव्यवस्था में पैसा आएगा और आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ेगी इसलिये उत्पादन सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा.

उन्होंने कहा, ‘इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.’

केरल में कई सीटों पर माकपा और भाजपा के बीच गुपचुप सहमति है: चांडी

कोयंबटूर: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ओम्मन चांडी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि केरल में आगामी विधानसभा चुनाव में कई सीटों को लेकर माकपा तथा भाजपा के बीच ‘गुपचुप सहमति’ है.

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री चांडी ने कोयंबटूर में एक संक्षिप्त संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस नीत यूडीएफ छह अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को सत्ता से हटाने के लिये पुरजोर तरीके प्रचार में जुटा है और उनकी पार्टी के गठबंधन को जीत हासिल होगी.

तमिलनाडु के दक्षिण कोयंबटूर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार मयूर जयकुमार के लिए चुनाव प्रचार करने आए चांडी ने आरोप लगाया कि केरल में कई सीटों को लेकर माकपा और भाजपा के बीच गुपचुप सहमति है.

इसके बाद चांडी ने जयकुमार के पक्ष में कई स्थानों पर प्रचार किया. जयकुमार का मुकाबला अभिनेता तथा मक्कल नीति मय्यम के प्रमुख कमल हासन और भाजपा उम्मीदवार वी श्रीनिवास से है.

तमिलनाडु में नड्डा बोले, द्रमुक-कांग्रेस के ‘भ्रष्टाचार और वंशवाद की राजनीति’ को खारिज करें

टीटाकुडी: तमिलनाडु में एक चुनावी रैली के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शुक्रवार को द्रमुक और उसकी मुख्य सहयोगी कांग्रेस पार्टी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए ‘वंशवाद की राजनीति’ करने के लिए दोनों पार्टियों की निंदा की.

New Delhi: Union Minister for Health & Family Welfare J P Nadda addresses a press conference on the achievements of his ministry in the last 4 years, in New Delhi on Monday, June 11, 2018. (PTI Photo/Kamal Singh) (PTI6_11_2018_000107B)(PTI6_11_2018_000128B)

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (फोटो: पीटीआई)

टीटाकुडी एक रैली में उन्होंने लोगों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए विकास कार्य को आगे ले जाने के लिए अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन का समर्थन करने की अपील की.

उन्होंने कहा कि मोदी की विकास की पहल को आगे बढ़ाना चाहिए और द्रमुक तथा कांग्रेस की ‘वंशवाद’ की राजनीति को खारिज करना चाहिए.

उन्होंने आरोप लगाया कि कश्मीर से केरल और गुजरात से पूर्वोत्तर राज्यों तक सिर्फ भाजपा ही ‘विकास’ को बढ़ावा देने वाली पार्टी है, जबकि बाकी अन्य पार्टियां पारिवारिक पार्टियां बन चुकी है.

उन्होंने कहा कि द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन ‘2जी, 3जी और 4जी’ है. उन्होंने कहा, ‘हमें वंशवाद की राजनीति को खारिज करके तमिलनाडु में वास्तविक लोकतंत्र को फलता-फूलता देखना है.’

उन्होंने आरोप लगाया कि 2जी मारन परिवार (द्रमुक) की दो पीढ़ियों के भ्रष्टाचार को दर्शाता है, 3जी द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन के परिवार की तीन पीढ़ियां तथा 4जी कांग्रेस-गांधी परिवार की चार पीढ़ियों के भ्रष्टाचार का द्योतक है. ऊपर से नीचे तक सभी भ्रष्टाचार और घोटाले में शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि केंद्र में कांग्रेस के शासनकाल के दौरान तत्कालीन मंत्री जयराम रमेश ‘जलीकट्टू’ के खिलाफ अधिसूचना लेकर आए और द्रमुक मूकदर्शक बनी रही. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका स्पष्ट तौर पर समर्थन किया और उनके दखल की वजह से ही जलीकट्टू को अनुमति मिल पाई.

तमिलनाडु: तिरुचिरापल्ली के डीएम और पुलिस अधीक्षक को चुनाव ड्यूटी से हटाया गया

चेन्नई: निर्वाचन आयोग ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले तिरुचिरापल्ली जिले से एक करोड़ रुपये जब्त किए जाने के बाद जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और उप जिलाधिकारी का तबादला कर उन्हें गैर-चुनावी ड्यूटी पर तैनात कर दिया है.

आयोग ने कहा कि विशेष पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया गया है.

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को लिखे पत्र में आयोग ने कहा कि यह मामला तिरुचिरापल्ली में एक करोड़ रुपये जब्त होने होने से संबंधित है.

आयोग ने कहा कि सीईओ से हुए संवाद के आधार पर उसने जिले के एसपी पी. राजन का तबादला कर उन्हें गैर चुनावी ड्यूटी पर तैनात करने को मंजूरी दे दी है.

इसी प्रकार जिलाधिकारी एस. शिवरासू और श्रीरंगम के उप जिलाधिकारी निशांत कृष्ण का भी तबादला कर दिया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)