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खेती के लिए सिंचाई में किसी भी तरह की बाधा पैदा करना मौलिक अधिकार का उल्लंघन: इलाहाबाद हाईकोर्ट

खेत में सिंचाई के लिए ट्यूबवेलों में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की पीठ ने यह टिप्पणी की. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़िला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि क्षेत्र के ट्यूबवेलों का रखरखाव के साथ-साथ लगातार बिजली मुहैया कराई जानी चाहिए.

(फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि बिजली की सप्लाई रोकना, जिसके परिणामस्वरूप खेतों तक पानी पहुंचने में बाधा उत्पन्न करना संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत व्यापार के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है.

लाइव लॉ के मुताबिक, सिंचाई के लिए ट्यूबवेलों में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और जस्टिस सौरभ श्याम ने ये टिप्पणी की.

याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि इस तरह मनमानी तरीके से बिजली काटने के चलते पानी की आपूर्ति और कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है.

पीठ ने कहा, ‘हमारी ये राय है कि खेतों तक पानी आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न करना संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन है, जो कि किसानों के व्यापार और कार्य को प्रभावित करता है.’

इसके साथ ही कोर्ट ने संबंधित सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे क्षेत्र में मौजूद सभी ट्यूबवेल तक बिजली और नियमित देख-रेख सुनिश्चित करें.

सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि बिजली आपूर्ति को बहाल कर दिया गया है, इसलिए ऐसी याचिका का कोई मतलब नहीं बनता है.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने ये स्वीकार किया कि फिलहाल के लिए तो बिजली दी जा रही है लेकिन ट्यूबवेल का सही से रखरखाव नहीं हो रहा है और यहां पर आए दिन बिजली कटती रहती है.

इस बात को संज्ञान में लेते हुए न्यायालय ने जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वे क्षेत्र में ट्यूबवेल के रखरखाव को सुनिश्चित करें और बिजली कटनी नहीं चाहिए.