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असम ने रोहिंग्या लड़की को प्रत्यर्पित करने की कोशिश की, म्यांमार ने इनकार कर दिया

साल 2019 में 14 वर्षीय लड़की कछार ज़िले के सिलचर के रंगपुर इलाके में संदिग्ध परिस्थितियों में एक घर के अंदर बेहोशी की हालत में मिली थी. बाद में पता चला था कि उसके माता-पिता बांग्लादेश में कॉक्स बाज़ार के शरणार्थी शिविर में हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

सिलचर: म्यांमार ने 14 वर्षीय एक रोहिंग्या लड़की को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जब प्रत्यर्पण के लिए असम पुलिस की एक टीम उसे लेकर मणिपुर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक पहुंची. यह जानकारी शुक्रवार को अधिकारियों ने दी.

उन्होंने बताया कि केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद लड़की को असम के सिलचर से मणिपुर में अंतरराष्ट्रीय जांच चौकी पर प्रत्यर्पण के लिए बृहस्पतिवार को ले जाया गया.

उन्होंने बताया कि बहरहाल म्यांमार के आव्रजन अधिकारियों ने उसे स्वीकार करने से मना कर दिया और कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण जांच चौकी पिछले एक वर्ष से बंद है.

पुलिस के मुताबिक, म्यांमार के अधिकारियों ने भारतीय अधिकारियों से कहा कि उनके देश की स्थिति किसी भी तरह के प्रत्यर्पण के लिए फिलहाल उपयुक्त नहीं है.

पुलिस टीम लड़की को लेकर सिलचर लौट गई और उसे आश्रय गृह को सौंप दिया, जहां वह रह रही है.

अधिकारियों ने बताया कि दो वर्ष पहले लड़की कछार जिले के सिलचर के रंगपुर इलाके में संदिग्ध परिस्थितियों में एक घर के अंदर अचेतावस्था में मिली थी.

उन्होंने बताया कि बाद में पता चला कि उसके माता-पिता बांग्लादेश में कॉक्स बाजार के शरणार्थी शिविर में हैं.

पुलिस ने बताया कि चूंकि वह नाबालिग है, इसलिए उसे हिरासत केंद्र में नहीं भेजा गया और उजाला आश्रय केंद्र में भेजा गया, जहां से उसे फिर निवेदिता नारी संगष्ठ में रखा गया.

भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने पर पिछले कुछ वर्षों में रोहिंग्या मूल के म्यांमार के कई नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के एक आव्रजन अधिकारी ने पुष्टि की, ‘लड़की म्यांमार नहीं जाना चाह रही है, क्योंकि उसके माता पिता वर्तमान में बांग्लादेश में रह रहे हैं.’

सिलचर के मानवाधिकार कार्यकर्ता कमल चक्रवर्ती ने लड़की को निर्वासित करने की कोशिश को अमानवीय बताया है.

उन्होंने कहा, ‘रिपोर्ट कहती है कि उसके माता-पिता बांग्लादेश के एक शरणार्थी शिविर में हैं और म्यांमार में स्थितियां बहुत ठीक नहीं है. ऐसे में भारत सरकार एक नाबालिग लड़की को उस देश में भेजने की सोच भी कैसे सकती है. यह मानवाधिकार उल्लंघन का स्पष्ट मामला है.’

कमल ने कहा, ‘हम इसके बारे में विदेश मंत्रालय को एक पत्र लिखेंगे. हम उसे उचित शरण देने जा रहे हैं, ताकि वह भविष्य में इस तरह की कोशिशों की पीड़ित न बने.’

नाबालिग लड़की म्यांमार के रोहिंग्या समुदाय से संबंध रखती है और ऐसा माना जा रहा है कि वह मानव तस्करी का शिकार है.

कछार पुलिस के अनुसार, नाबालिग लड़की साल 2019 में सिलचर के रंगपुर क्षेत्र में बेहोशी की हालत में मिली थी. उसे बचाने के बाद पुलिस ने उसे काउंसिलिंग के लिए महिलाओं और बच्चों के रहने के लिए बने उज्जला आश्रय गृह भेज दिया था. लड़की यहां तकरीबन एक साल तक रही और बाद में उसे निवेदिता नारी संस्था में भेज दिया गया था.

निवेदिता नारी संस्था की दिबा रॉय ने बताया, ‘पिछले साल उसे हमारे आश्रय गृह भेजा गया था. वह अपने देश वापस जाना चाहती थी, इसलिए उसने केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा था. (विदेश) मंत्रालय से इसका जवाब भी आया था और लड़की को अदालत ले जाया गया था. बाद में उसे वापस उसे देश भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)