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कोविड-19: पूरे पंजाब में रहेगा रात्रिकालीन कर्फ्यू, 30 अप्रैल तक राजनीतिक कार्यक्रमों पर रोक

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने राजनीतिक कार्यक्रमों पर पाबंदी लगाते हुए कहा है कि यदि वरिष्ठ नेता ऐसा व्यवहार करेंगे तो लोगों से बीमारी के बारे में गंभीर होने की कैसे उम्मीद कर सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इस रोक का उल्लंघन करने वाले नेता पर आपदा प्रबंधन अधिनियम और महामारी रोग अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा.

बीते हफ्ते अमृतसर में अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की एक सभा. (फोटो: पीटीआई)

बीते हफ्ते अमृतसर में अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की एक सभा. (फोटो: पीटीआई)

चंडीगढ़/नई दिल्ली: कोविड-19 संबंधी सुरक्षा नियमों का पालन किए बगैर ही रैलियों में भाग लेने के ‘गैर जिम्मेदाराना’ आचरण को लेकर दिल्ली के अपने समकक्ष अरविंद केजरीवाल और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता सुखबीर सिंह बादल की आलोचना करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बुधवार को रात के कर्फ्यू का पूरे राज्य में विस्तार करने की घोषणा की और राजनीतिक आयोजनों पर रोक लगाने का आदेश दिया.

सिंह ने स्पष्ट किया कहा कि राजनीतिक आयोजनों पर रोक का जो भी उल्लंघन करेगा, भले ही वह नेता ही क्यों न हो, उस पर आपदा प्रबंधन अधिनियम और महामारी रोग अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक आयोजनों पर रोक का आदेश जारी करने को बाध्य हो गए हैं क्योंकि राजनीतिक दलो से ऐसे आयोजन नहीं करने के उनके अनुरोधों की उपेक्षा की गई.

सिंह ने कहा कि वह ‘केजरीवाल और बादल समेत कुछ खास राजनीतिक नेता, जो सुरक्षा नियमों का पालन किए बगैर राजनीतिक रैलियों में भाग ले रहे थे, के आचरण से’ चकित हैं. उन्होंने कहा कि ‘ऐसे गैर जिम्मेदाराना व्यवहार उन्हें शोभा नहीं देता.’

उन्होंने कहा, ‘यदि वरिष्ठ नेता इस तरह का व्यवहार करेंगे तो आप लोगों से बीमारी के प्रसार के बारे में गंभीर होने की कैसे उम्मीद कर सकते हैं?’

मुख्यमंत्री ने कहा कि रात नौ बजे से सुबह पांच बजे तक का रात्रिकालीन कर्फ्यू अब सभी 22 जिलों में लागू रहेगा. इसे अभी तक 12 जिलों में ही लगाया लगाया था. उन्होंने पुलिस महानिदेशक दिनकर गुप्ता को रात्रिकर्फ्यू का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.

नई पाबंदियों के तहत बंद जगह में अंतिम संस्कार या शादियों में बस 50 तथा खुली जगह में ऐसे अवसरों में बस 100 अतिथियों की अनुमति होगी.

एक सरकारी बयान के अनुसार कार्यालयों में सभी कर्मियों के लिए मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया गया है. इस बयान में नई पाबंदियों का ब्योरा है जिन्हें राज्य में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के मद्देनजर लगाया गया है.

नई पाबंदियों और पुरानी पाबंदियां 30 अप्रैल तक प्रभाव में रहेंगी. पुरानी पाबंदियों के तहत विद्यालय एवं शिक्षण संस्थान बंद किए गए थे.

नई पाबंदियों के तहत मॉलों मे दुकानदारों को कुछ राहत दी गई है, क्योंकि मुख्यमंत्री ने एक समय पर एक दुकान में अधिकतम 10 व्यक्तियों के प्रवेश की अनुमति दी है , पहले एक समय पर पूरे मॉल में 100 से अधिक व्यक्तियों के जाने की मनाही थी.

बयान के अनुसार नये निर्देश के अनुसार अब एक समय पर एक मॉल , जहां 20 दुकानें हैं, में 200 लोगों को जाने दिया जाएगा.

राज्य में मंगलवार को 62 लोगों की कोरोना वायरस से मौत हो गई जबकि 2924 नये मामले सामने आए. राज्य में इस महामारी के मामले 2,57,057 हो गए.

मुख्यमंत्री ने कोविड-19 स्थिति पर समीक्षा बैठक में उच्च संक्रमण दर एवं मृत्यु दर पर चिंता प्रकट की. उन्होंने कहा कि कोविड-19 के बढ़ते मामलों पर नियंत्रण के लिए के इन कड़े उपायों के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं था.

उन्होंने पुलिस एवं जिला प्रशासन को राजनीतिक आयोजनों को लेकर नेताओं, आयोजकों एवं भागीदारों के अलावा ऐसे कार्यक्रमों के वास्ते बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने वाले टेंट मालिकों, आयोजन स्थल के मालिकों पर भी मामला दर्ज करने का आदेश दिया.

उन्होंने कहा कि 30 अप्रैल तक किसी भी सामाजिक, सांस्कृतिक एवं खेलकूद आयोजन एवं अन्य संबंधी आयोजन पर रोक रहेगी.

दूसरी लहर को क़ाबू करने के लिए जनभागीदारी की ज़रूरत: केंद्र

केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि महामारी की तीव्रता बढ़ने के कारण पिछले वर्ष के मुकाबले कोविड-19 बहुत तेज गति से फैल रहा है तथा इसे देखते हुए अगले चार सप्ताह बेहद अहम रहने वाले हैं. सरकार ने संक्रमण की दूसरी लहर को काबू में करने के लिए जनभागीदारी पर जोर दिया.

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मामले तेजी से बढ़ने से देश में महामारी के हालत और खराब हुए हैं.

उन्होंने कहा कि महामारी से लड़ने के हथियार वहीं हैं. कोविड-19 से बचाव के नियमों का पालन करना, निरुद्ध क्षेत्रों की पहचान, जांच आदि को और प्रभावी तरीके से लागू किया जाना चाहिए, चिकित्सा ढांचे में सुधार और टीकाकरण अभियान तेजी से चलाए जाने की जरूरत है.

पॉल ने कहा,‘महामारी की तीव्रता बढ़ गई है और यह पिछली बार के मुकाबले ज्यादा तेजी से फैल रही है. कुछ राज्यों में यह (हालात) अन्य के मुकाबले ज्यादा खराब है लेकिन बढ़ोतरी (मामलों में) देश भर में देखी जा सकती है.’

उन्होंने कहा, ‘दूसरी लहर को काबू में करने के लिए जनभागीदारी अहम है. अगले चार सप्ताह बेहद अहम रहने वाले हैं. पूरे देश को एकजुट हो कर महामारी से लड़ने के प्रयास करने होंगे.’

पॉल ने कहा कि कोरोना वायरस के मामलों के साथ ही मौत के मामले भी बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘इसके बावजूद जनसंख्या और प्रति दस लाख होने वाली मौतों को देखते हुए हम महामारी को नियंत्रण में करने के लिए अच्छा कार्य कर रहे हैं.’

सरकार लगातार यह कह रही है कि जांच, संपर्क का पता लगाने में कमी तथा संक्रमण से बचाव के नियमों का पालन नहीं करना और भीड़-भाड़ होने जैसे कारणों से संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं.

देश में महामारी के हालत पर विस्तार से चर्चा करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला उपचाराधीन मामलों में शीर्ष दस जिलों में शामिल है, वहीं सात जिले महाराष्ट्र में और एक कर्नाटक में है.

उन्होंने कहा कि दिल्ली को एक जिला माना गया है और वह भी इस सूची में शामिल है.

उन्होंने कहा कि जिन दस जिलों में सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं वे हैं पुणे, मुंबई, ठाणे, नागपुर, नासिक, बेंगलुरु शहर, औरंगाबाद, अहमदनगर, दिल्ली और दुर्ग.

सचिव के अनुसार महाराष्ट्र, पंजाब और छत्तीसगढ़ अभी भी चिंता वाले राज्य बने हुए हैं.

महाराष्ट्र के मामले में यह संक्रमण के कुल मामलों और संक्रमण से हुई मौतों के कुल मामलों की संख्या को देखते हुए है, वहीं देश भर में संक्रमण से हुई कुल मौत में पंजाब और छत्तीसगढ़ के मरीजों की संख्या को देखते हुए यह चिंताजनक है.

भूषण ने बताया कि केंद्र ने 50 उच्चस्तरीय जन स्वास्थ्य टीमें गठित की हैं और उन्हें महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और पंजाब में ज्यादा मामले सामने आने वाले और संक्रमण से ज्यादा मौतों वाले जिलों में तैनात किया गया है.

इन टीमों को महाराष्ट्र के 30 जिलों, छत्तीसगढ़ के 11 जिलों और पंजाब के नौ जिलों में तैनात किया जा रहा है.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि पांच अप्रैल को संक्रमण रोधी टीके की 43 लाख से ज्यादा खुराकें दी गईं, जो एक दिन में अब तक की सबसे बढ़ी संख्या है. इन्हें मिला कर देश में अब तक 8,31,10,926 खुराकें दी जा चुकी हैं.

उन्होंने कहा कि भारत में प्रति दस लाख लोगों में संक्रमण के मामले अब भी सबसे कम हैं. भारत में प्रति दस लाख लोगों में संक्रमण के मामले 9,192 हैं, वहीं अमेरिका में यह 91,757, फ्रांस में 71,718 और ब्रिटेन में 64,216 है.

वैश्विक आधार पर प्रति 10 लाख जनसंख्या पर संक्रमण के 16,783 मामले हैं.

कोविड-19 पुन:संक्रमण के मामलों के बारे में आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा, ‘हमने भारत में फिर से संक्रमण के मामलों के आंकड़ों का अध्ययन किया है. विश्व स्तर पर, फिर से संक्रमण के मामले लगभग 1 प्रतिशत हैं.’

बाद में रात में, स्वास्थ्य मंत्रालय ने उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि केंद्र ने कहा है कि कुंभ मेला एक संक्रमण फैलाने वाला एक बड़ा आयोजन बन गया है.

मंत्रालय ने इसे गलत और फर्जी करार दिया. केंद्र ने कहा कि उसने पहले से ही एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है जिसका पालन कुंभ मेले में किया जाना है.

मालूम हो कि बुधवार को देश में 24 घंटे में कोविड-19 के 1,15,736 मामले सामने आए तथा 630 और मरीजों की मौत हो गई. इसके साथ ही संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 1,28,01,785 हो गई और मृतकों की संख्या बढ़कर 1,66,177 हो गई.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)