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त्रिपुरा: आदिवासी परिषद चुनाव में भाजपा को झटका देते हुए नई पार्टी ने दर्ज की भारी जीत

त्रिपुरा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रद्योत किशोर देबबर्मा की अगुवाई वाले ‘टीआईपीआरए मोठा’ ने त्रिपुरा आदिवासी क्षेत्र स्वायत्त ज़िला परिषद चुनाव में 28 में से 18 सीटों पर जीत हासिल की है. भाजपा को नौ सीटें मिली हैं, वहीं उसके सहयोगी दल आईपीएफटी के अलावा कांग्रेस और माकपा किसी भी सीट पर जीत दर्ज करने में नाकाम रहे.

टीआईपीआरए प्रमुख प्रद्योत किशोर देबबर्मन. (फोटो: फेसबुक/pradyot.debbarma)

टीआईपीआरए प्रमुख प्रद्योत किशोर देबबर्मा. (फोटो: फेसबुक/pradyot.debbarma)

अगरतला: त्रिपुरा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और शाही वंशज प्रद्योत किशोर देबबर्मा की अगुवाई वाले नवगठित टीआईपीआरए मोठा ने शनिवार को त्रिपुरा आदिवासी क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी या त्रिपुरा एडीसी) चुनाव में 28 में से 18 सीटों पर जीत हासिल की. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी है.

उन्होंने कहा कि ‘तिपराहा इंडिजीनस प्रोग्रेसिव रीजनल अलायंस (टीआईपीआरए) मोठा’ ने 18 और भाजपा ने नौ सीटों पर जीत दर्ज की है. एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली है.

त्रिपुरा आदिवासी क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद में कुल 30 सीटें हैं, जिनमें से 28 निर्वाचित हैं और दो राज्यपाल द्वारा नामित किए जाते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वहीं, 28  में से 16 सीटों पर चुनाव लड़ने वाले भाजपा के सहयोगी दल आईपीएफटी, कांग्रेस और आदिवासी परिषद पर तीन बार शासन करने वाले माकपा को एक भी सीटें नहीं मिल सकीं.

टीआईपीआरए मोठा टीआईपीआरए, तिप्रालैंड स्टेट पार्टी, आईपीएफटी तिपराहा और आईएनपीटी के साथ अन्य जनजातीय निकायों का एक बड़ा सामूहिक मंच है.

प्रद्योत किशोर ने खुद तकरजला-जम्पुईजाला एडीसी निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की थी. उनके समर्थन में चुनाव लड़ने वाले अन्य वरिष्ठ नेता- टीआईपीआरए नेता अनंत देबबर्मा, अनिमेश देबबर्मा और सहयोगी आईएनपीटी के महासचिव जगदीश देबबर्मा विजयी हुए.

प्रद्योत की पार्टी ने स्वायत्त जिला परिषद चुनाव त्रिपुरा, असम, मिजोरम और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में त्रिपुरी आदिवासियों को नियंत्रित करने वाले एक काल्पनिक प्रशासन ‘ग्रेटर तिप्रालैंड’ की मांग पर लड़ा था.

चुनाव में जहां भाजपा के सुशासन मुद्दा था तो माकपा लोकतंत्र बचाने के लिए लड़ रही थी.

30 सदस्यीय आदिवासी परिषद की 28 सीटों पर मंगलवार (छह अप्रैल) को मतदान हुआ था. शेष दो सीटों पर राज्यपाल राज्य सरकार की सलाह पर दो सदस्यों को मनोनीत करेंगे.

राज्य का दो तिहाई क्षेत्र त्रिपुरा आदिवासी क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद शासन के तहत आता है. इसका गठन 1982 में किया गया था. इसे आदिवासियों का क्षेत्र कहा जाता है. त्रिपुरा एडीसी राज्य के भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में फैला हुआ है और 19 जनजातीय समुदायों से राज्य की आबादी का एक तिहाई हिस्सा है.

देबबर्मा ने अपने समर्थकों से अपनी नव स्थापित पार्टी (टीआईपीआरए मोठा) को चुनाव में बहुमत मिलने का जश्न शांतिपूर्ण तरीके से मनाने का आग्रह किया है.

उन्होंने कहा, ‘हमें एकता बनाए रखनी है. मैं लोगों से आईपीएफटी, भाजपा, माकपा और कांग्रेस समर्थकों के घरों पर हमला करने से बचने की अपील करता हूं. वे भी हमारे ही लोग हैं. हमें उसने नहीं लड़ना चाहिए. अगर हम एकता चाहते हैं तो शांति बनाए रखनी चाहिए. वे भी चुनाव के बाद हमारी पार्टी में शामिल हो जाएंगे.’

देबबर्मा ने कहा कि सोमवार को अगरतला से लगभग 25 किलोमीटर दूर कुमुलवुंग में आदिवासी परिषद मुख्यालय में जीत के जश्न में रैली आयोजित की जाएगी.

देबबर्मा त्रिपुरा कांग्रेस के अध्यक्ष थे. आलाकमान से मतभेदों का हवाला देकर सितंबर 2019 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी. इसके एक महीने बाद उन्होंने टीआईपीआरए मोठा की स्थापना की घोषणा की थी, जो शुरू में एक सामाजिक संगठन था, लेकिन 2020 में यह राजनीतिक दल बन गया था.

एडीसी चुनाव पिछले साल 17 मई को होने वाले थे. हालांकि, कोविड-19 महामारी के कारण चुनाव को टाल दिया गया था और इस समय के लिए आदिवासी परिषद का प्रभार राज्यपाल आरके बैस को सौंप दिया गया था.

इसके बाद बीते 6 अप्रैल को चुनाव कराए गए और हिंसा की छिटपुट वारदातों के साथ 85.14 फीसदी मतदान हुआ था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)