राजनीति

चुनावी बांड के ज़रिये चंदा देने वालों का नाम घोषित करने वाली पहली पार्टी बनी झामुमो

झारखंड में सत्तारूढ़ पार्टी झामुमो ने बताया है कि उसे एल्युमिनियम एवं तांबा विनिर्माता कंपनी हिंडाल्को से एक करोड़ रुपये का चंदा चुनावी बांड के ज़रिये मिला है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने कहा है कि इससे यह सवाल उठता है कि क्या राजनीतिक दलों को दान देने वालों की पहचान की जानकारी है, जिन्होंने उसे चुनावी बॉन्ड के ज़रिये योगदान दिया है.

Ranchi: Jharkhand Mukti Morcha (JMM) executive president Hemant Soren addresses a press conference ahead of Jharkhand Assembly Elections, in Ranchi, Sunday, Sept. 15, 2019. (PTI Photo) (PTI9_15_2019_000038B)

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (फोटोः पीटीआई)

नई दिल्ली: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ऐसी पहली पार्टी बन गई है, जिसने चुनावी बॉन्ड (इलेक्टोरल बॉन्ड) के माध्यम से चंदा देने वालों के नामों की घोषणा की है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.

इसमें कहा गया है कि वर्ष 2019-20 में पार्टी को योगदान संबंधी रिपोर्ट में एक करोड़ रुपये के चंदे की घोषणा की गई है.

झारखंड में सत्तारूढ़ पार्टी को मिले योगदान संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, उसे एल्युमिनियम एवं तांबा विनिर्माता कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिडेट ने यह चंदा दिया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, हिंडाल्को आदित्य बिड़ला ग्रुप की सहायक कंपनी है. देश के अन्य हिस्सों के साथ झारखंड के मुरी में इसकी एल्युमिना रिफाइनरी है.

रिपोर्ट में बताया गया कि झामुमो का यह चंदा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के कोर्ट कंपाउंड ब्रांच से जारी बॉन्ड नंबर ‘AAACH1201R’ से मिला.

रिपोर्ट में एडीआर ने कहा कि वर्ष 2019-20 में राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को आय का सामान्य एवं लोकप्रिय स्रोत चुनावी बॉन्ड के जरिये चंदा रहा. पिछले दो वर्षों में यह दलों को चंदे के लोकप्रिय माध्यम के रूप में उभरा है.

एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘यह ध्यान देने की बात है कि झामुमो पार्टी ने वर्ष 2019-20 में पार्टी को योगदान संबंधी रिपोर्ट में चंदा देने वाले के नामों की घोषणा की, जिन्होंने उसे चुनावी बॉन्ड के जरिये एक करोड़ रुपये दिया. हालांकि पार्टी ने वित्त वर्ष 2019-20 की ऑडिट रिपोर्ट में चुनावी बॉन्ड के जरिये इस आय की घोषणा नहीं की थी.’

एडीआर ने कहा है कि इससे यह सवाल उठता है कि क्या राजनीतिक दलों को दान देने वालों की पहचान की जानकारी है, जिन्होंने उसे चुनावी बॉन्ड के जरिये योगदान दिया है, जैसा कि इस मामले में देखा जा सकता है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जेएमएम महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी को इसके बारे में तब पता चला जब हिंडाल्को ने चंदे की रसीद मांगने के लिए हमसे संपर्क किया.

भट्टाचार्य ने कहा, ‘चूंकि हमने उन्हें एक रसीद दी है, इसलिए हमने अपनी रिपोर्ट में चुनाव आयोग को नाम का भी खुलासा किया है. भाजपा जैसी पार्टियां भले ही चंदा देने वालों का ब्योरा नहीं दे रही हों, लेकिन हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है.’

यह पूछे जाने पर कि बॉन्ड खरीदने के दौरान एसबीआई द्वारा जारी किए जाने के बाद से हिंडाल्को ने रसीद क्यों मांगी, उन्होंने कहा, ‘हम इससे चिंतित नहीं हैं.’

वहीं, आदित्य बिड़ला ग्रुप ने इंडियन एक्सप्रेस के सवालों का जवाब नहीं दिया.

गौरतलब है कि चुनाव बॉन्ड को राजनीतिक दलों को नकद में चंदा देने के विकल्प के तौर पर पेश किया जा रहा है और इसे राजनीतिक वित्त पोषण में पारदर्शिता लाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2019-20 में 19 राजनीतिक दलों को कुल आय 312.37 करोड़ रुपये का 50 प्रतिशत से अधिक चंदा चुनावी बॉन्ड के जरिये प्राप्त हुआ और इसके दानदाताओं की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई.

इसमें कहा गया है कि वर्ष 2109-20 में 3,429.56 करोड़ रुपये का चुनावी बॉन्ड दलों द्वारा भुनाए गए. इससे स्पष्ट होता है कि दलों द्वारा चुनावी बॉन्ड से भुनाए गए शेष 3,117.19 करोड़ रुपये या 91 प्रतिशत राशि का ऑडिट रिपोर्ट अभी निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध होनी बाकी है.

दो राष्ट्रीय दलों और 17 क्षेत्रीय दलों द्वारा 2019-20 में घोषित आय 619.28 करोड़ रुपये थी.

एडीआर ने कहा है कि तृणमूल कांग्रेस ने सबसे अधिक 143.676 करोड़ रुपये की आय की जानकारी दी, जो सभी दलों की विश्लेषित कुल आय का 23.20 प्रतिशत है. तेलुगू देशम पार्टी की आय 91.53 करोड़ रुपये या 14.78 प्रतिशत और बीजद की आय 90.35 करोड़ रुपये या 14.59 प्रतिशत रही.

रिपोर्ट में कहा गया है कि 19 राजनीतिक दलों की विश्लेषण किया गया, जिसमें से वर्ष 2018-19 से 2019-20 तक नौ दलों की आय में वृद्धि और 10 दलों की आय में गिरावट देखी गई.

बीते 25 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एडीआर की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में विधानसभा चुनावों से पहले चुनावी बॉन्ड को बेचने पर रोक लगाने की मांग की गई थी.

हालांकि, इस मामले पर इससे पहले की सुनवाइयों में सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों द्वारा आतंकी फंडिंग या हिंसक विरोध के लिए चुनावी बॉन्ड के माध्यम से प्राप्त पैसे के दुरुपयोग की संभावना पर चिंता जताई थी.

वहीं, एक आरटीआई के हवाले से पता चला था कि सरकार ने राजनीतिक दलों के दानदाताओं को 13 चरणों में चुनावी बॉन्ड की बिक्री के लिए एसबीआई को 4.10 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में दिए. यह राशि इन बॉन्डों की छपाई में लगे 1.86 करोड़ रुपये के अतिरिक्त थी.

इसका अर्थ ये हुआ कि अरबपति करोड़ों रुपये का चुनावी बॉन्ड खरीदते हैं, राजनीतिक दल इसके जरिये करोड़ों रुपये का ‘गोपनीय चंदा’ प्राप्त करते हैं, लेकिन इसकी छपाई और कमीशन का भुगतान करदाताओं के पैसे से किया जा रहा है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)