राजनीति

लोगों की रुचि ‘कोविड की बात’ में है, न कि ‘मन की बात’ में: ममता बनर्जी

विधानसभा चुनाव राउंड-अप: पश्चिम बंगाल में सातवें चरण के चुनाव में 34 सीटों पर 284 उम्मीदवार मैदान में. कोविड-19 पर प्रधानमंत्री की बैठक में शामिल न होने के लिए भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने साधा ममता बनर्जी पर निशाना. माकपा नेता मालिनी भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के कारण आरएसएस बंगाल में मज़बूत हुआ. तृणमूल कांग्रेस नेता विवेक गुप्ता ने स्पष्ट किया कि ‘बाहरी’ टिप्पणी हिंदी भाषी लोगों पर लक्षित नहीं, वे बंगाल का अभिन्न हिस्सा हैं.

ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई/पीआईबी)

ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई/पीआईबी)

बहरमपुर: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को कहा कि लोगों की रुचि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में नहीं है, बल्कि इसकी जगह वे ‘कोविड की बात’ सुनना चाहते हैं, क्योंकि महामारी में ऑक्सीजन और टीके की कमी की वजह से जीवन मुश्किल हो गया है.

इससे पहले मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा कि कोविड-19 की लहर ने देश को हिला दिया है और लोगों को टीकाकरण कराना चाहिए.

मुर्शिदाबाद जिले के सभागार में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के दौरान बनर्जी ने कहा कि मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उस समय बंगाल पर कब्जा करने की योजना बनाने में व्यस्त थे, जब कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर को नियंत्रित करने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए थे.

बनर्जी ने कहा, ‘किसकी ‘मन की बात’ में रुचि है, अब लोग ‘कोविड की बात’ सुनना चाहते हैं. अगर एक हजार लोगों की भीड़ में एक संक्रमित है तो वह सभी को संक्रमित कर सकता है. केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के दो लाख जवान उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों से आए और वे अनजाने में वायरस के वाहक हो सकते हैं क्योंकि निर्वाचन आयोग द्वारा उनकी आरटी-पीसीआर जांच नहीं कराई गई.’

बंगाल: सातवें चरण में होगा 34 सीटों पर 284 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सोमवार को सातवें चरण के मतदान के दौरान कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच 86 लाख से अधिक मतदाता मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गृह निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर सहित 34 सीटों पर 284 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे.

निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि चुनाव के पूर्व के चरणों में हुई हिंसा के मद्देनजर सातवें चरण के मतदान के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.

उन्होंने कहा कि निर्वाचन इकाई ने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए इस चरण में केंद्रीय बलों की कम से कम 796 कंपनी तैनात करने का फैसला किया है.

अधिकारी ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कोविड-19 रोधी प्रोटोकॉल का कड़ा अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे.

उन्होंने कहा कि सातवें चरण में 12,068 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जाएंगे. सभी की नजरें भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र पर होंगी, जहां से तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी मौजूदा विधायक हैं और वह इसी क्षेत्र की निवासी हैं.

बनर्जी ने इस बार नंदीग्राम से तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए शुभेंदु सरकार के खिलाफ चुनाव लड़ा है और अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र से अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के विद्युत मंत्री सोभनदेब चट्टोपाध्याय को उम्मीदवार बनाया है.

भाजपा ने भवानीपुर से अभिनेता रुद्रनील घोष को अपना उम्मीदवार बनाया है, जो तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भगवा दल में शामिल हो गए थे.

कोविड-19 पर प्रधानमंत्री की बैठक में शामिल ना होने के लिए नड्डा ने साधा ममता पर निशाना

मानिकचक: भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पश्चिम बंगाल में कोविड-19 की मौजूदा स्थिति के लिए केंद्र सरकार पर लगातार निशाना साधने पर रविवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को आड़े हाथों लिया और पूछा कि इस महामारी के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुलाई गई पिछली बैठक में वह शामिल क्यों नहीं हुई.

जेपी नड्डा. (फोटो साभार: ट्विटर)

जेपी नड्डा. (फोटो साभार: ट्विटर)

मालदा जिले के मानिकचक से भाजपा के उम्मीदवार के पक्ष में दिल्ली से एक डिजीटल रैली को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा, ‘कोविड-19 पर प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई बैठक में आप (बनर्जी) क्यों शामिल नहीं हुई? ऐसा क्या आपने भारी घमंड की वजह से किया?’

मोदी भी ममता बनर्जी पर केंद्र द्वारा कोविड-19 प्रबंधन समेत विभिन्न मुद्दों पर बुलाई गई बैठकों में शामिल न होने का आरोप लगा चुके हैं. हालांकि बनर्जी ने दावा किया है कि महामारी से निपटने के तौर तरीकों पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बुलाई गई बैठक में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया था.

नड्डा ने कहा कि ममता बनर्जी ने पिछले दिनों दावा किया था कि बंगाल में कोविड-19 रोधी टीके उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन उन्हें यह याद नहीं रहा कि पिछले 10 सालों से उन्होंने राज्य की जनता को कई अहम सुविधाओं से वंचित रखा है.

उन्होंने कहा, ‘यदि टीके उपलब्ध नहीं हैं तो आप (बनर्जी) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को रोजाना लगने वाले टीकों के बारे में आंकड़े कैसे भेज रही हैं.’

नड्डा ने कहा कि पिछले साल राज्य में कोरोना संक्रमण की स्थिति की समीक्षा के लिए जब केंद्र सरकार ने एक केंद्रीय दल भेजा था, तब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले राज्य प्रशासन ने उन्हें अपना काम नहीं करने दिया.

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं को हार का डर सता रहा है और इसलिए उन्होंने ‘गुंडों को मतदाताओं को डराने -धमकाने की छूट दे दी है.’

उन्होंने कहा, ‘ममता जी दावा करती हैं कि वह राज्य की बेटी हैं, लेकिन उन्हीं के शासन में शोभा मजूमदार (एक भाजपा कार्यकर्ता की मां) को गुंडों से अपने बेटे को बचाने के लिए अपनी जान गंवानी पड़ी.’

उन्होंने दावा किया कि बलात्कार सहित महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में बंगाल शीर्ष पर है.

मिथुन, दिलीप घोष ने कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया, शिकायत दर्ज कराई गई: तृणमूल

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं- दिलीप घोष और मिथुन चक्रवर्ती ने 500 से अधिक लोगों की जनसभाएं आयोजित कर कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है.

इसने कहा कि इस मामले में निर्वाचन आयोग के पास शिकायत दर्ज कराई गई है.

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने कोलकाता में संवाददाताओं से कहा कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष घोष और अभिनेता से नेता बने चक्रवर्ती ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच निर्वाचन आयोग के निर्देशों का कोई सम्मान न करते हुए क्रमश: दक्षिण दिनाजपुर और मालदा जिलों में जनसभाएं कीं.

उन्होंने कहा, ‘हमने दोनों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने की मांग की है. चुनाव के आखिरी चरण में उनके जनसभाएं करने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए.’

रॉय ने साथ ही कहा कि आयोग ने इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है.

लोकसभा सदस्य ने कहा, ‘निर्वाचन आयोग भाजपा के इशारों पर काम कर रहा है. तृणमूल ने शुक्रवार और शनिवार सुबह शिकायतें दर्ज कराईं. इसके बावजूद दोनों भाजपा नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है.’

माकपा नेता मालिनी भट्टाचार्य का आरोप, तृणमूल के कारण आरएसएस हुआ मजबूत

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 1989 लोकसभा चुनाव में जादवपुर सीट से हरा चुकीं माकपा की पूर्व सांसद प्रोफेसर मालिनी भट्टाचार्य के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस प्रमुख भाजपा का विरोध करने वाला प्रमुख चेहरा नहीं हैं. उनका मानना है कि ममता के शासन से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) को राज्य में बढ़ने का मौका मिला.

मालिनी भट्टाचार्य. (फोटो साभार: फेसबुक/@CPIM Odisha)

मालिनी भट्टाचार्य. (फोटो साभार: फेसबुक/@CPIM Odisha)

गौरतलब है कि ममता अपने राजनीतिक जीवन में महज एक बार चुनाव हारी हैं. वह 1989 में कांग्रेस के टिकट पर जादवपुर सीट से हारी थीं.

प्रमुख शिक्षाविद भट्टाचार्य मानती हैं कि बनर्जी का ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली भाजपा के साथ अपशब्द कहने की होड़ में शामिल होने के बावजूद आज भी आरएसएस से करीबी रिश्ता है.’

भट्टाचार्य पश्चिम बंगाल में भाजपा की लहर होने संबंधी दावे से भी सहमत नहीं है और उनका आरोप है कि भगवा पार्टी का राज्य में उदय तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ भावना की वजह से हुआ है.

भट्टाचार्य को माकपा ने 1989 में ममता बनर्जी के खिलाफ उतारा था, इससे पहले के चुनाव में ममता बनर्जी माकपा के वरिष्ठ नेता सोमनाथ चटर्जी को जादवपुर से हराकर चर्चा में आई थीं, जिसे वाम दलों का गढ़ माना जाता था.

भट्टाचार्य ने कहा, ‘ऐसे कुछ उग्र मित्र हैं, जो कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में ममता भाजपा विरोध का प्रमुख चेहरा हैं और हमें उनके साथ जाना चाहिए, लेकिन हमें नहीं भूलना चाहिए कि ‘चेहरा’ और वास्तविकता दो अलग चीजें हैं.’

उन्होंने रेखांकित किया, ‘अपनी पार्टी बनाने के बावजूद वह (ममता बनर्जी) आरएसएस एवं उसके संगठनों के बहुत करीब रही हैं. मैं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में मंत्री के रूप में उनकी भागीदारी के विषय में नहीं जाती, लेकिन यहां तक कि आज भी मोदी-शाह के साथ अपशब्द की होड़ में शामिल होने के बावजूद उनके आरएसएस के साथ करीबी रिश्ते हैं.’

भट्टाचार्य ने कहा कि बनर्जी द्वारा पश्चिम बंगाल में विपक्ष से वाम को खत्म किए जाने से आरएसएस को बहुत फायदा हुआ.

उन्होंने कहा, ‘किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनकी (बनर्जी) राज्य में वाम विपक्ष को राजनीतिक और भौतिक रूप से खत्म करने की प्रबल इच्छा और लोकतांत्रिक संस्थानों के ध्वंस करने से राज्य में उनके शासन के दौरान आरएसएस को कई गुना बढ़ने का मौका मिला.’

माकपा नेता का मानना है कि सांप्रादायिक संघर्ष ममता बनर्जी के शासन काल में दोबारा उभरा है, जिससे वाम मोर्चा ने कड़ाई से निपटा था.

पश्चिम बंगाल महिला आयोग की पूर्व अध्यक्षा भट्टाचार्य ने कहा, ‘रोजगार, कृषि, शिक्षा के मामले में बनर्जी मोदी के औद्योगिक घरानों के हित साधने के रास्ते का अनुसरण कर रही हैं. वह भाजपा की तरह ही विरोधियों को नियंत्रित करने के लिए व्यवहार कर रही हैं.’

भट्टाचार्य का मानना है कि इस चुनाव में तीन सकारात्मक पहलुओं की वजह से वाम मोर्चे को बढ़त मिलेगी.

उन्होंने कहा, ‘पहला, हमने पश्चिम बंगाल में भाजपा के खिलाफ राजनीतिक ताकतों को लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मोर्चे पर एकजुट किया है, दूसरा, युवा कार्यकर्ताओं ने फासीवादी ताकतों से लड़ने की चुनौती स्वीकार की है और तीसरा हमारे कार्यकर्ताओं ने वैकल्पिक नीति के लिए स्थान बनाया है, जिसकी हम बात कर रहे हैं.’

यादवपुर विश्वविद्यालय की पूर्व शिक्षाविद ने कहा, ‘अगर वह (ममता) इस बार भी सत्ता में आती हैं तो संभव है कि हमारे समर्थन से आएंगी, वह वहीं काम करेंगी. हम निश्चित नहीं है कि क्या वह भाजपा के साथ दोबारा जाएंगी.’

‘बाहरी’ टिप्पणी हिंदी भाषी लोगों पर लक्षित नहीं, वे बंगाल का अभिन्न हिस्सा: विवेक गुप्ता

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में जारी विधानसभा चुनाव के दौरान ‘घरेलू-बाहरी’ की बहस के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के हिंदी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष व वरिष्ठ नेता विवेक गुप्ता ने कहा कि ‘बाहरी’ कटाक्ष हिंदी भाषी निवासियों पर लक्षित नहीं हैं, क्योंकि वे राज्य का अभिन्न हिस्सा रहे हैं.

विवेक गुप्ता. (फोटो साभार: फेसबुक)

विवेक गुप्ता. (फोटो साभार: फेसबुक)

राज्यसभा के पूर्व सदस्य गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि टीएमसी ने ‘दूसरे राज्य से आने वाले गुंडों’ को बाहरी या ‘बोहिरागतो’ के तौर पर इंगित किया है और अपने प्रचार के दौरान उसने कभी राज्य की गैर बंगाली आबादी पर निशाना नहीं साधा.

जोड़ासांको (जोड़ासांको) सीट से सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवार गुप्ता ने कहा कि राज्य की समृद्ध संस्कृति और विरासत में बंगाल में रहने वाली हिंदी भाषी आबादी मिठास घोलती है.

उन्होंने कहा, ‘हमारी पार्टी बंगाल में रहने वाली हिंदी-भाषी आबादी के खिलाफ नहीं है. ‘बाहरी’ शब्द बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ने के लिए दूसरे राज्य से आ रहे गुंडों और आपराधिक इतिहास वाले लोगों को लेकर लक्षित है. राज्य की हिंदी भाषी आबादी और बंगाली एक दूसरे के पूरक हैं.’

प्रख्यात हिंदी दैनिक ‘सन्मार्ग’ के संपादक गुप्ता ने भाजपा की उसकी ‘विभाजक राजनीति’ के लिए आलोचना करते हुए धार्मिक आधार पर लोगों में ‘दूरी पैदा करने’ का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ‘बंगाल अपनी मिठाइयों के लिए जाना जाता है. हिंदी भाषी आबादी यहां दशकों और पीढ़ियों से रहती है तथा इस बंगाली मिठाई में और मिठास घोलते हैं. वे राज्य का हिस्सा हैं और भाजपा ने कभी इस पर सवाल नहीं उठाए.’

उन्होंने कहा, ‘भाजपा धर्म और भाषा के आधार पर लोगों में दूरी पैदा करने की कोशिश कर रही है. वे हर जगह यही करते हैं. बंगाल में बांटो और राज करो की नीति से कोई फल नहीं मिलेगा.’

गुप्ता ने कहा, ‘ममता बनर्जी अनुभवी राजनेता हैं, हमने कभी दूसरे राज्यों से बंगाल आ रहे लोगों के बारे में कुछ नहीं कहा. हमारे लिए चुनाव के दौरान बंगाल आने वाले राजनीतिक पर्यटक हैं. चुनाव के समय को छोड़कर प्रधानमंत्री कितनी बार राज्य के लोगों की कुशलता जानने के लिए राज्य के दौरे पर आए? हमारे लिए बोहिरागतो वो लोग हैं, जो राज्य में गड़बड़ी पैदा करने के लिए आते हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)