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जब श्मशान में बड़े पैमाने पर चिताएं जल रही थीं, प्रधानमंत्री भाषण देने में व्यस्त थे: ममता बनर्जी

विधानसभा चुनाव राउंड-अप: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आखिरी चरण के मतदान से केंद्रीय बलों को हटाने की मांग की है. असम में विपक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और स्वास्थ्य मंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा कोविड-19 प्रबंधन के नाम पर आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं. पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने महामारी में मद्देनज़र उपचुनाव व स्थानीय चुनाव को छह महीने के लिए स्थगित करने का आह्वान किया है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी. (फोटो: @AITCofficial)

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी. (फोटो: @AITCofficial)

कोलकाता/नई दिल्ली/गुवाहाटी/बेंगलुरु:  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को राज्य में कोविड-19 संक्रमण के प्रसार पर काबू पाने के प्रयास के तहत राज्य में अगले चरण के मतदान से केंद्रीय बलों को हटाने की मांग की.

इसके साथ ही उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय की उस टिप्पणी का स्वागत किया गया जिसमें कहा गया था कि संक्रमण के प्रसार के आरोप से निर्वाचन आयोग बच नहीं सकता.

बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर असंवेदनशीलता होने का आरोप भी लगाया. बनर्जी ने आरोप लगाया कि जब ‘श्मशान में बड़े पैमाने पर चिताएं जल रही थीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाषण देने में व्यस्त थे.’

उत्तर कोलकाता में पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रत्याशियों की बैठक में बनर्जी ने कहा, ‘मैं मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करती हूं जिसमें साफ तौर पर कहा गया कि निर्वाचन आयोग अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और निर्वाचन आयोग दोनों ही इस स्थिति (राज्य में संक्रमण के प्रसार) के लिए जिम्मेदार हैं.’

मुख्यमंत्री ने दावा किया, ‘जब श्मशान घाटों पर सामूहिक चिताएं जल रही थीं, मोदी ‘मन की बात’ के भाषण देने में व्यस्त थे.’

इससे पहले सोमवार को मद्रास उच्च न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के बीच विधानसभा चुनाव कराने पर निर्वाचन आयोग को फटकार लगाई थी.

मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और जस्टिस एस. राममूर्ति की पीठ ने जनहित रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्वाचन आयोग को सबसे अधिक गैर जिम्मेदार करार दिया.

पीठ ने कहा, ‘कोविड-19 की दूसरी लहर के लिए केवल आपका संस्थान जिम्मेदार है.’ मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक रूप से यहां तक कहा कि ‘आपके अफसरों पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए.’

इस याचिका में याचिकाकर्ता ने कोविड-19 नियमों का अनुपालन करते हुए दो मई को करूर में निष्पक्ष मतगणना सुनिश्चित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है.

बनर्जी ने कहा, ‘मैं अनुरोध करती हूं कि कृपया करके कोविड-19 प्रभावित राज्यों से लाए गए करीब दो लाख केंद्रीय बलों के जवानों को वापस ले लिया जाए, जो स्कूलों, कॉलेजों और सुरक्षित आश्रयों में रह रहे हैं और कोविड-19 प्रबंधन को बाधित कर रहे हैं, उनमें से 75 प्रतिशत वायरस से संक्रमित हो सकते हैं. कृपया करके उन्हें अंतिम चरण के चुनाव से हटाया जाए.’

बनर्जी ने कहा कि निर्वाचन आयोग जिस तरह से पश्चिम बंगाल में चुनाव करा रहा है तृणमूल कांग्रेस चुनाव के बाद उसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी. उन्होंने कहा, ‘हम उच्चतम न्यायालय को बताएंगे. चुनाव आयोग ने कोविड-19 मामलों में बढ़ोतरी के बावजूद मतदान के चरणों को एकसाथ नहीं जोड़ा.’

पश्चिम बंगाल में कोविड-19 के पुष्ट मामलों की संख्या 1 अप्रैल को 81,466 से बढ़कर 25 अप्रैल को 3.52 लाख हो गई है.

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा ने निर्वाचन आयोग द्वारा तैयार आठ-चरण के मतदान कार्यक्रम को प्रभावित किया है और यह कि कार्यक्रम ‘मंडल’ (भाजपा पार्टी द्वारा निर्धारित संगठनात्मक ढांचा) पर आधारित है, न कि किसी तर्क पर. उन्होंने कहा, ‘(अकेले) कोलकाता में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तारीखों पर चुनाव हुए.’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘मुझे नौ बार उत्तर बंगाल का दौरा करना पड़ा था क्योंकि आस-पास के क्षेत्रों में अलग-अलग दिनों में मतदान हुए. (ऐसा इसलिए किया गया ताकि) भाजपा नेताओं को अधिकतम कवरेज मिले और मुझे प्रचार करने से रोका जा सके. कोलकाता को तीन चरणों में चुनाव कराने के लिए तीन हिस्सों में बांटा गया था.’

उन्होंने कहा, ‘हालांकि, मैंने भी अपने चोटिल पैर के साथ 50 दिनों तक प्रचार किया.’

चुनाव आयोग के विशेष पर्यवेक्षकों और जिला मजिस्ट्रेटों और पुलिस अधीक्षकों के बीच एक कथित वॉट्सऐप चैट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘वे टीएमसी को मुश्किल उत्पन्न करने वाला और हमारे लोगों को टीएमसी गुंडे के रूप में वर्णित कर रहे हैं. वे बातचीत में भाजपा के बारे में इस तरह के शब्दों का उपयोग नहीं करते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘भाजपा के नजदीकी कुछ पुलिस अधीक्षकों को नियुक्त करके करके, चुनाव आयोग छह-सात और अधिक सीटें जीतने में भाजपा की मदद कर सकता है, लेकिन तृणमूल का 200 सीटों का आंकड़ा पार करना तय है.’

बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने भाजपा के इशारे पर एक सूची तैयार की जिसने उत्तर कोलकाता निर्वाचन क्षेत्रों में 29 अप्रैल को होने वाले चुनावों से पहले पुलिस को एंटली और बेलगछिया क्षेत्रों से पार्टी के प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया गया है.

उन्होंने दावा किया, ‘रानीनगर (मुर्शिदाबाद जिले में) (केंद्रीय) बल हमारे (स्थानीय) नेता के आवास पर उग्र व्यवहार किया. हम प्राथमिकी दर्ज करा रहे हैं.’

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने कोविड-19 की स्थिति का सही तरीके से प्रबंधन नहीं किया. उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री और गृह मंत्री एक तरह से तीन महीने तक बंगाल में डेरा डाले रखा और कोविड -19 संकट को नजरंदाज किया.’

बनर्जी ने कहा, ‘उन्होंने उन महीनों में ऑक्सीजन की आपूर्ति को मजबूत करने की योजना नहीं बनाई, लेकिन लोगों को रिश्वत देने के लिए पीएम केयर्स फंड से पैसा खर्च किया. मुझे बताया गया था कि कुछ लोगों को भाजपा के वास्ते प्रचार करने के लिए 25 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी.’

उन्होंने कहा, ‘मैं सोच रही हूं कि क्या संस्था (ईसी) ऐसे में लोकतंत्र की रक्षा करने में सक्षम है जब सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी गवर्नर के रूप में नियुक्ति की चाहत रखे हुए हैं.’

ममता बनर्जी ने भवानीपुर में मतदान किया

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य विधानसभा के लिए हो रहे सातवें चरण के चुनाव के दौरान सोमवार को कोलकाता के भवानीपुर में मतदान किया.

बनर्जी का निवास स्थान हरीश चटर्जी मार्ग पर है और उन्होंने अपने मताधिकार का इस्तेमाल अपराह्न करीब तीन बजकर 50 मिनट पर मित्रा इंस्टीट्यूशन स्कूल में बने मतदान केंद्र में किया.

बनर्जी दो बार भवानीपुर विधानसभा सीट से विधायक रहीं है लेकिन इस चुनाव में वह पूर्वी मिदिनापुर जिले के नंदीग्राम सीट से भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ लड़ रही हैं.

इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भी इसी मतदान केंद्र पर अपने मताधिकार का प्रयोग किया.

तृणमूल कांग्रेस ने भवानीपुर सीट से अपने वयोवृद्ध नेता सोभनदेब चटोपाध्याय को उतारा है जबकि उनके खिलाफ भाजपा की सेलिब्रिटी प्रत्याशी रुद्रनील घोष मैदान में हैं. वाम नीत मोर्चे ने यहां से कांग्रेस के शादाब खान को प्रत्याशी बनाया है.

कोलकाता में महिलाओं से छेड़खानी के आरोप में भाजपा उम्मीदवार का एजेंट गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल में रासबिहारी विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साहा के एजेंट को शहर के न्यू अलीपुर इलाके में एक मतदान केंद्र पर कुछ महिलाओं से छेड़खानी के आरोप में सोमवार को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने इस बारे में बताया.

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि अंदर कई महिलाओं ने मोहन राव पर विद्या भारती स्कूल मतदान केंद्र के उनका हाथ पकड़ कर उन्हें घसीटने का आरोप लगाया था. उन्होंने बताया, ‘इस संबंध में हमें शिकायत मिली और मामले में जांच जारी है.’

राव ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

इस बीच साहा ने आरोप लगाया, ‘तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता इलाके में व्यवधान पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. यह शांतिपूर्ण मतदान प्रक्रिया में जान बूझ कर बाधा उत्पन्न करने का प्रयास है.’

राज्य में सोमवार को सातवें चरण में 34 सीटों पर मतदान हुआ है.

निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में और पुलिस अधिकारियों का तबादला किया

निर्वाचन आयोग (ईसी) ने पश्चिम बंगाल में कुछ और पुलिस अधिकारियों का तबादला किया है. ये तबादले सोमवार को विधानसभा चुनाव के सातवें चरण के मतदान से ठीक पहले किए गए.

अधिकारियों ने बताया कि आर्थिक अपराध निदेशालय के निरीक्षक शांतनु सिन्हा बिस्वास का तबादला जलपाईगुड़ी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक के कार्यालय में बतौर अपराध निरीक्षक किया गया है.

भाजपा ने सिन्हा पर डाक मतपत्रों में छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था. रविवार रात को जारी स्थानांतरण आदेश के मुताबिक आसनसोल-दुर्गापुर के सहायक आयुक्त रहे श्रीमंत कुमार बंदोपाध्याय का तबादला कर उन्हें बोलपुर का सब डिविजनल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) बनाया गया है.

बोलपुर के मौजूदा एसडीपीओ शुभेंद्र कुमार हाल में कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं.

आदेश के मुताबिक कृष्णानगर पुलिस जिले के कृष्णागंज के सर्किल इंस्पेक्टर निहार रंजन रॉय को मुर्शिदाबाद पुलिस थाने का नया प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है, अब तक इस पद पर आतिश दास थे. दास को पुलिस निदेशालय भेजा गया है.

उल्लेखनीय है कि निर्वाचन आयोग ने चुनाव के दौरान कई अधिकारियों के तबादले किए हैं.

पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीटों के लिए आठ चरणों में मतदान कराया जा रहा है और मतों की गिनती दो मई को होगी.

तृणमूल कार्यकर्ताओं के विरूद्ध कार्रवाई की योजना संबंधी आरोप झूठे हैं: निर्वाचन आयोग

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता द्वारा पश्चिम बंगाल में मतदान से पहले उनकी पार्टी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने की चुनाव पर्यवेक्षकों की शह पर योजना बनाये जाने संबंधी आरोप लगाए जाने के एक दिन बाद निर्वाचन आयोग ने इन्हें पूरी तरह निराधार और गलत बताया.

आयोग ने कहा कि उसने अपने किसी भी अधिकारी या पर्यवेक्षक को किसी भी राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश नहीं दिया है.

आयोग ने एक बयान जारी कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ‘आरोपों’ को लेकर खबर दी है जिसमें कहा गया है कि निवार्चन आयोग के अधिकारियों एवं पर्यवेक्षकों को ‘तृणमूल कांग्रेस के गुंडो’ को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया गया है.

बयान में कहा गया, ‘ आयोग के किसी अधिकारी या पर्यवेक्षक के नाम पर इस तरह का बयान दिया जाना निश्चित तौर पर पूरी तरह आधाहीन, झूठा और भ्रमित करे वाला है. किसी भी पार्टी के कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई का कोई निर्देश किसी भी पर्यवेक्षक, मुख्य निर्वाचन अधिकारी या आयोग के अधिकारी को नहीं दिया गया है.’

उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी ने शनिवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग के तीन विशेष पर्यवेक्षक मतदान से पहले ‘तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के आदेश पुलिस अधिकारियों को” दे रहे थे. उन्होंने कहा कि इस तरह के “षड्यंत्रों” के विरूद्ध चुनाव के बाद वह उच्चतम न्यायालय जाएंगी.

बनर्जी ने आयोग पर पक्षपात करने का कई बार आरोप लगाया था लेकिन आयोग ने इन आरोपों का खंडन किया है.

पश्चिम बंगाल में सातवें चरण का मतदान सोमवार को होगा और आठवें एवं अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा.

सोनोवाल-हिमंता कोविड से निपटने के नाम पर आचार संहिता का कर रहे उल्लंघन: विपक्ष

असम में कांग्रेस नीत महागठबंधन ने रविवार को आरोप लगाया कि असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और स्वास्थ्य मंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा कोविड-19 प्रबंधन के नाम पर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं.

गठबंधन ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि वह विभिन्न जिलो में जाकर बैठक करने से उन्हें रोके.

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल और स्वास्थ्य मंत्री हिमंता विश्वा शर्मा. (फोटो: पीटीआई)

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल और स्वास्थ्य मंत्री हिमंता विश्वा शर्मा. (फोटो: पीटीआई)

मुख्य निर्वाचन आयुक्त को की गई शिकायत में 10 पार्टियों के गठबंधन ने कहा कि असम में आदर्श आचार संहिता अब भी लागू है और यह दो मई को चुनाव नतीजे आने तक लागू रहेगी एवं भाजपा नीत सरकार की हैसियत महज कार्यवाहक सरकार की है.

पार्टियों ने कहा, ‘लेकिन मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य व वित्तमंत्री जानबूझकर निर्वाचन आयोग की आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं. 23 अप्रैल 2021 से ही सर्वानंद सोनोवाल नगांव, मोरीगांव, माजुली आदि जिलों का दौरा कर रहे हैं और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं.’

शिकायत में कहा गया कि इसी प्रकार शर्मा और स्वास्थ्य राज्यमंत्री पीयूष हजारिका भी अलग-अलग जिलों में जाकर सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं.

पार्टियों ने कहा, ‘इसके जरिये वे न केवल आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं बल्कि कोविड नियमों का भी उल्लंघन कर रहे हैं.’

स्ट्रांग रूम में ईवीएम में छेड़छाड़ एवं लूट की कथित खबरों का हवाला देते हुए पार्टियों ने दावा किया कि सोनोवाल और शर्मा की लगातार हो रही यात्रा से जनता में शंका पैदा हो रही है.

गठबंधन के सदस्यों ने कहा, ‘इसलिए हम मांग करते हैं कि असम के मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और अन्य मंत्रियों को कहीं की भी आधिकारिक यात्रा करने से रोका जाए.’

गौरतलब है कि इस गठबंधन में कांग्रेस के आलावा, एआईयूडीएफ, बीपीएफ, माकपा, भाकपा, भाकपा (माले), आंचलिक गण मोर्चा, राजद, आदिवासी नेशनल पार्टी और जिमोचयन (देओरी) पीपुल्स पार्टी शामिल हैं.

कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए चुनावी जीत के जश्न को सीमित किया जाए: एचडी देवेगौड़ा

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने कोविड-19 महामारी के प्रसार को नियंत्रित करने के उपाय के तहत चुनावी जीत के जश्न को सीमित करने और उप चुनाव व स्थानीय चुनाव को छह महीने के लिए स्थगित करने का आह्वान किया है.

जनता दल (सेक्युलर) के अध्यक्ष देवेगौड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में कहा कि जनसभाओं को अगले छह महीने के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए. उन्होंने प्रधानमंत्री को संक्रमण रोकने के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं.

एचडी देवेगौड़ा. (फोटो: पीटीआई)

एचडी देवेगौड़ा. (फोटो: पीटीआई)

राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘जिन राज्यों में इस महीने चुनाव हुए हैं वहां पर चुनावी जीत के जश्न में कटौती करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए. चूंकि, किसी भी राज्य विधानसभा का कार्यकाल मई के बाद समाप्त नहीं हो रहा है, इसलिए सभी उप चुनाव और स्थानीय निकाय चुनावों को छह महीने के लिए स्थगित किया जाना चाहिए.’

उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान निर्वाचन आयोग सुरक्षित चुनाव के लिए नए नियम बना सकता है और साथ-साथ टीकाकरण अभियान की गति भी बढ़ाई जा सकती है.

देवेगौड़ा ने प्रधानमंत्री को आश्वासन दिया कि महामारी को नियंत्रित करने और टीकाकरण विस्तार के लिए उनके नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा लिए जाने वाले सभी सकारात्मक फैसलों और पहलों की वह समर्थन करेंगे.

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि यह समय है जब काम किया जाए और तत्परता से किया जाए.

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य प्रशासन और कोविड-19 प्रबंधन का तुंरत विकेंद्रीकरण करना होगा.

उन्होंने कहा कि राज्यों की राजधानी में राज्य स्तरीय ‘वाररूम’ काफी नहीं है बल्कि यह सभी जिला मुख्यालयों में होना चाहिए.

देवेगौड़ा ने कहा कि मौजूदा ध्यान बड़े शहरों पर है लेकिन गैर शहरी जिलों और तालुका केंद्रों पर बड़ा खतरा है. गांवों पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)