कोविड-19

बहुचरणीय चुनाव पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है: पूर्व निर्वाचन आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति

कोरोना वायरस संकट के दौर में पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति ने कहा कि चुनाव के दौरान जनसभाओं और रोडशो पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती, लेकिन निर्वाचन आयोग इस प्रकार की सभाएं करने की अवधि और दिनों की संख्या में काफी हद तक कटौती करने पर गंभीरता से विचार कर सकता है, क्योंकि अब डिजिटल और सोशल मीडिया के ज़रिये प्रचार करने का विकल्प उपलब्ध हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

बेंगलुरु: पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति ने भविष्य में एक चरण में चुनाव कराने और प्रचार अभियान की अवधि को काफी कम करने की बात कही है.

उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान जनसभाओं और रोडशो पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती, लेकिन भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) इस प्रकार की सभाएं करने की अवधि और दिनों की संख्या में काफी हद तक कटौती करने पर गंभीरता से विचार कर सकता है, क्योंकि अब डिजिटल और सोशल मीडिया के जरिये प्रचार करने का विकल्प उपलब्ध हैं.

कृष्णमूर्ति के अनुसार बहुचरणीय चुनाव को यह कहकर सही ठहराया जाता है कि इससे हिंसा की संभावना कम हो जाती है और कानून-व्यवस्था को संभालना भी आसान होता है.

उन्होंने मंगलवार को से कहा, ‘(लेकिन) (पश्चिम) बंगाल (आठ चरण के तहत जारी विधानसभा चुनाव) के अनुभव ने हमें बताया कि बहुचरणीय चुनाव भी हिंसा, घृणा और निजी हमलों को नहीं रोक सकते.’

उन्होंने कहा, ‘हम (देशभर में) एक साथ चुनाव कराने पर (परिचर्चा) की बात कर रहे हैं. मैं तो प्रत्येक राज्य में एक दिन में चुनाव कराने को तरजीह दूंगा.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, हालांकि कृष्णमूर्ति ने यह भी कहा कि कुछ जगहों पर एक चरण में चुनाव करा पाना संभव नहीं है, लेकिन कम से कम उन्हें दो से तीन चरणों तक कम किया जा सकता है.

उन्होंने अपने कार्यकाल में हुए 2004 के आम चुनावों को याद करते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर को छोड़कर ये सिर्फ चार चरणों में संपन्न कराए गए थे. जम्मू कश्मीर में पांच चरणों में चुनाव हुए थे.

उन्होंने कहा कि हालांकि अब इस बात पर गंभीरता से विचार करने का समय आ गया है कि क्या बहुचरणीय चुनाव अपना उद्देश्य पा लेते हैं?

कृष्णमूर्ति के अनुसार, ‘एक देश जहां सामाजिक परिस्थितियों में बहुत सारी विविधताएं और संघर्ष हों, वहां ये (बहुचरणीय चुनाव) परिणाम नहीं देते.’

उन्होंने कहा, ‘हमें चुनाव के चरणों को कम करने, खासकर एक चरण के चुनाव के लिए किसी तरीके के बारे में सोचना चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन इसके लिए बड़ी संख्या में जवानों तैनात करने और अन्य चीजों की जरूरत होगी. अगर जरूरी हो तो हमें उन्हें भेजना चाहिए.’

कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा कोविड-19 प्रोटोकॉल को सुनिश्चित करने में विफल रहने वाले पर चुनाव आयोग की आलोचना के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आयोग की भूमिका चुनाव के संचालन तक सीमित रहती है.

कृष्णमूर्ति ने कहा कि अगर कोई कार्रवाई की जानी है, तो यह राज्य सरकार है, जिसे उन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए, जिन्होंने मास्क नहीं पहने थे और जो रैलियों के दौरान सामाजिक दूरी को पालन नहीं करते थे.

चुनाव के समय चुनाव आयोग राज्य के पूरे प्रशासन को अपने नियंत्रण में नहीं लेता है. उसकी जिम्मेदारी सिर्फ केवल चुनावों के संचालन तक सीमित होती है.

उन्होंने कहा, ‘अगर उल्लंघन हुआ है, तो यह पुलिस है, जिसे संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करनी होगी. चुनाव आयोग के पास किसी पर मुकदमा चलाने की शक्तियां नहीं हैं. इसके पास किसी को दंडित करने की शक्तियां भी नहीं हैं.’

मालूम हो कि पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में चुनाव कराने को लेकर निर्वाचन आयोग की काफी आलोचना हो रही है.

मद्रास उच्च न्यायालय ने बीते 26 अप्रैल को निर्वाचन आयोग की तीखी आलोचना करते हुए उसे देश में कोविड-19 की दूसरी लहर के लिए ‘अकेले’ जिम्मेदार करार दिया और कहा कि वह ‘सबसे गैर जिम्मेदार संस्था’ है.

स्पष्ट रूप से नाराज दिख रहे चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी ने चुनाव आयोग के वकील से कहा था, ‘कोविड-19 की दूसरी लहर के लिए केवल आपका संस्थान जिम्मेदार है.’

मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक रूप से यहां तक कह दिया था, ‘आपके अफसरों पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए.’

जब मुख्य न्यायाधीश ने अदालत के आदेश के बावजूद रैलियों में कोविड दिशानिर्देशों- जैसे मास्क, सैनेटाइजर का इस्तेमाल, सामाजिक दूरी का पालन न होने की बात कही, तब आयोग के वकील ने कहा इनका पालन हुआ था, इस पर जस्टिस बनर्जी ने कहा था, ‘जब चुनावी रैलियां हो रही थीं, तब आप क्या किसी और ग्रह पर थे?’

इस याचिका में अधिकारियों को यह निर्देश दिए जाने का आग्रह किया गया है कि दो मई को करूर (तमिलनाडु) में कोविड-19 रोधी नियमों का पालन करते हुए निष्पक्ष मतगणना सुनिश्चित की जाए.

अदालत ने यह चेतावनी भी दी कि अगर मतगणना के दिन के लिए चुनाव आयोग द्वारा कोविड के मद्देनजर की गई तैयारियों का ब्लूप्रिंट नहीं दिया गया, तो वे 2 मई को होने वाली वोटों की गिनती रोक देंगे.

मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा फटकार लगाए जाने के अगले दिन मंगलवार को निर्वाचन आयोग ने जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, वहां पर मतगणना के दौरान या उसके बाद में सभी विजयी जुलूसों पर प्रतिबंध लगा दिया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)