कोविड-19

पूरे विश्व में कोविड संक्रमण से हुई पत्रकारों की मौतों के मामले में भारत तीसरे स्थान पर: रिपोर्ट

जिनेवा के एक मीडिया अधिकार निकाय द प्रेस एंब्लेम कैंपेन की रिपोर्ट बताती है कि 26 अप्रैल तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, भारत में कोरोना संक्रमण से कम से कम 107 पत्रकारों की मौत हुई है और इस तरह से भारत केवल ब्राज़ील (181 मौतें) और पेरू (140 मौतें) से पीछे है. रिपोर्ट के मुताबिक़ बीते दो हफ़्तों में भारत के 45 पत्रकारों की मौत हुई है.

फेस मास्क लगाकर रिपोर्टिंग करते पत्रकार. (प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

महामारी के दौरान रिपोर्टिंग करते पत्रकार. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: कोविड-19 के कारण पत्रकारों की मौत के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है. जिनेवा स्थित एक मीडिया अधिकार निकाय ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है.

द प्रेस एंब्लेम कैंपेन ने बताया कि कोविड-19 संबंधी दिक्कतों के कारण भारत में रोजाना कम से कम तीन पत्रकारों की मौत हो रही है.

26 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कम से कम 107 पत्रकारों की मौत हो चुकी है और इस तरह से भारत केवल ब्राजील (181 मौतें) और पेरू (140 मौतें) से पीछे है.

रिपोर्ट में बताया गया कि केवल पिछले दो हफ्ते में भारत के 45 पत्रकारों की मौत हो चुकी है.

हालांकि, द प्रेस एंब्लेम कैंपेन के आंकड़ों के अनुसार रिपोर्ट जारी किए जाने के बाद से सात और पत्रकारों की मौत हो चुकी है जिससे यह आंकड़ा 114 तक पहुंच जाता है.

अन्य प्रभावित देशों की बात करें, तो मैक्सिको में 106, इटली में 52, बांग्लादेश में 51, कोलंबिया में 49, अमेरिका में 47, इक्वाडोर में 46, ब्रिटेन में 28, डोमिनिकन रिपब्लिक में 27, पाकिस्तान में 25, तुर्की में 24, ईरान और रूस में 21-21, अर्जेंटीना और वेनेजुएला में 17-17, पनामा में 16, स्पेन में 15 और यूक्रेन में 14 पत्रकारों की मौत हुई है.

Source: www. pressemblem.ch

Source: www. pressemblem.ch

द प्रेस एंब्लेम कैंपेन की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर की बात करें तो मार्च 2020 से अब तक 76 देशों में कोविड-19 पॉजिटिव होने के बाद 1184 पत्रकारों की मौत हुई है.

रिपोर्ट में ओडिशा के अमजद बादशाह, त्रिपुरा के तन्मय चक्रबर्ती, महाराष्ट्र के विवेक बेंद्रे, सचिन शिंदे, जयराम सावंत और सुखनंदन गवई, बिहार के रामप्रकाश गुप्ता, उत्तर प्रदेश के रोहिताश गुप्ता और आंध्र प्रदेश के रमजान अली की मौत का उल्लेख किया गया है.

द प्रेस एंब्लेम कैंपेन की लेखिका नवा ठाकुरिया ने कहा कि मीडिया के भीतर मृतकों की वास्तविक संख्या अधिक हो सकती है क्योंकि स्थापित मीडिया हाउसों ने प्रभावितों की वास्तविक संख्या की सूचना नहीं दी थी और अधिकारियों के हस्तक्षेप के डर से अपने स्वयं के कोविड-19 पॉजिटिव मामलों की रिपोर्ट करने में सख्त थे.

इस रिपोर्ट के साथ ही द प्रेस एंब्लेम कैंपेन ने दुनियाभर के उन पत्रकारों का भी डेटाबेस तैयार किया है जिनकी मृत्यु कोविड-19 पॉजिटिव होने के बाद हुई है. इस डेटाबेस में पत्रकारों का नाम, उम्र और अन्य जानकारियां हैं.

28 अप्रैल को ही छह पत्रकारों की मौत दर्ज की गई. ये पत्रकार जयपुर के अनिल बसनोई, हैदराबाद के श्रीधर धर्मसनम, गाजियाबाद के राजू मिश्रा, ग्वालियर के आकाश सक्सेना और मनचेरियल के कोंड्रा श्रीनिवास गौड़ और सम्मी रेड्डी थे.

वहीं, 27 अप्रैल को मुंबई के सदानंद शिंदे की मौत हो गई थी.

बता दें कि सामाजिक संपर्क और अत्यधिक जोखिम के दौरान यात्रा की आवश्यकता वाले ऐसे पेशे को बनाए रखने की चुनौतियों के अलावा भारतीय पत्रकारों को भी स्वास्थ्य संकट पर रिपोर्टिंग करते हुए सेंसरशिप और हमले का भी सामना करना पड़ा है, जिससे भी उन्हें खतरा होता है.

द वायर ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि जब अमर उजाला अखबार ने स्थानीय प्रशासन की कोविड-19 से हुई मौतों के आंकड़ों की तुलना उससे कहीं अधिक संख्या में शवों के अंतिम संस्कार किए जाने से की तो किस तरह से कानपुर के जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने अखबार को एक पत्र लिख दिया.

बता दें कि कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान भारत अभूतपूर्व तरीके से मेडिकल ऑक्सीजन आपूर्ति, अस्पतालों में बेड, इंजेक्शन, टेस्ट किट्स और अन्य आवश्यक सामानों की कमी से जूझ रहा है.

हाल ही में, साल 2021 का वैश्विक प्रेस स्वंत्रतता सूचकांक जारी करने वाले रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के अनुसार, भारत को ऐसे देशों की सूची में जगह मिली है जिसके पत्रकारिता के लिए खराब माना जाता है और इसके साथ ही भारत को दुनिया में पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक जगह माना गया है.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)