कोविड-19

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ऑक्सीजन आपूर्ति को लेकर राज्य सरकार को लगाई फटकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अख़बारों में प्रकाशित ख़बरों के अनुसार पिछले दो हफ़्तों में ऐसी तमाम घटनाएं हुई हैं, जिसमें ऑक्सीजन आपूर्ति में बाधा और ऑक्सीजन की कमी की वजह से लोगों ने जान गंवा दी. इस बीच राज्य के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दावा किया कि अब प्रदेश में चिकित्सकीय ऑक्सीजन संबंधी कोई दिक्कत नहीं है.

शिवराज सिंह चौहान. (फोटो: पीटीआई)

शिवराज सिंह चौहान. (फोटो: पीटीआई)

जबलपुर/भोपाल: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कोविड-19 मरीजों की संख्या में तेजी से आई बढ़ोतरी के बीच प्रदेश सरकार के चिकित्सीय ऑक्सीजन की उपलब्धता करवाने के प्रयासों की दलील पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार को फटकार लगाई और केंद्र सरकार से कहा कि राज्य के लिए 100 मीट्रिक टन तक ऑक्सीजन आपूर्ति बढ़ाए.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रफीक एवं जस्टिस अतुल श्रीधरन की युगलपीठ द्वारा शुक्रवार को दिए गए इस निर्णय का हाईकोर्ट की वेबवाइट पर शनिवार को विस्तृत आदेश जारी किया गया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार हाईकोर्ट ने कहा, ‘अखबार में प्रकाशित खबरों के अनुसार पिछले दो हफ्तों में ऐसी तमाम घटनाएं हुई हैं, जिसमें ऑक्सीजन आपूर्ति में बाधा और ऑक्सीजन की कमी की वजह से लोगों ने जान गंवा दी.’

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार के लिए ऑक्सीजन और रेमडिसविर इंजेक्शन दो बड़ी समस्याएं बन गई हैं.

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट द्वारा 19 अप्रैल को जारी विभिन्न निर्देशों के संबंध में एक कार्रवाई रिपोर्ट दायर की थी.

हाईकोर्ट ने कहा, ‘हम यह रिकॉर्ड करने के लिए विवश हैं कि 19 अप्रैल के अपने आदेश में इस अदालत द्वारा जारी किए गए अधिकांश महत्वपूर्ण निर्देश, मुख्य रूप से ऑक्सीजन और रेमडेसिविर की सरकारी और निजी अस्पतालों तथा नर्सिंग होम के लिए निरंतर और नियमित आपूर्ति, का अनुपालन पूरी तरह से नहीं किया गया है.’

हाईकोर्ट ने आगे कहा, ‘हमारे सामने जो बात कही गई है, वह यह है कि अधिकांश निजी अस्पताल ऑक्सीजन की अनुपलब्धता के कारण कोरोना रोगियों को भर्ती करने से मना कर रहे हैं और अब हर गुजरते दिन के साथ कोरोना वायरस के रोगियों के लिए सरकार या फिर निजी अस्पताल में भर्ती हो पाना मुश्किल होता जा रहा है.’

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह रेमडेसिविर की अपनी वितरण नीति पर फिर से विचार करे ताकि यह इंजेक्शन आम आदमी को उचित मूल्य पर उपलब्ध हो सके.

मध्य प्रदेश के लिए 100 मीट्रिक टन और ऑक्सीजन के संबंध में पूछे गए अदालत के एक सवाल के जवाब में सहायक सॉलिसिटर जनरल जेके जैन ने इस संबंध में राज्य सरकार से निर्देश लेने के लिए समय मांगा है.

अदालत कोविड-19 रोगियों के इलाज के संबंध में कई याचिकाओं समेत एक स्वत: संज्ञान ली गई याचिका पर भी सुनवाई कर रही है.

एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन की निरंतर और नियमित आपूर्ति का प्रबंधन करने में विफल रही है. उन्होंने यह भी कहा कि ऑक्सीजन की उपलब्धता पर सरकार द्वारा प्रस्तुत कार्य योजना वास्तविकता से बहुत दूर है.

अब मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन संबंधी कोई दिक्कत नहीं: मिश्रा

इस बीच मध्य प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने शनिवार को कहा कि अब प्रदेश में चिकित्सकीय ऑक्सीजन संबंधी कोई दिक्कत नहीं है.

मिश्रा ने ट्वीट किया, ‘मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा युद्धस्तर पर किए गए प्रयासों का नतीजा है कि अब हमारे पास जरूरत से अधिक ऑक्सीजन उपलब्ध है. आपूर्ति की व्यवस्था इस तरह की गई है कि अब ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘रविवार, 2 मई को प्रदेश में 503 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति होगी.’

वहीं, मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने बताया, ‘गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं जनता द्वारा लगाए गए ‘जनता कर्फ्यू’ और शहरी क्षेत्रों में ‘कोरोना कर्फ्यू’ के कारण विगत आठ दिनों से कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामलों में निरंतर कमी दर्ज की जा रही है.’

उन्होंने कहा, ‘जनता के सहयोग से विगत दिनों आईआईटी कानपुर द्वारा दिया गया पूर्वानुमान कि एक मई को कोरोना पीक पर रहेगा, इसे जनता एवं सरकार के द्वारा किए जा रहे प्रयासों ने झुठला दिया है.’

मिश्रा ने कहा कि जल्द ही हम देश के लिए ‘मॉडल स्टेट’ बनकर दिखाएंगे.

उन्होंने कहा कि कोरोना के संबंध में शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुनः समीक्षा की है. नए संक्रमित मामले 12,389 दर्ज किए गए हैं, जबकि 14,562 मरीज स्वस्थ होकर अपने घर लौट गए है. प्रदेश के उपचाराधीन मामलों में 2285 मामलों की कमी आई है.

मिश्रा ने कहा कि कोविड-19 के मामलों में मध्य प्रदेश देश में 14वें स्थान पर आ चुका है. प्रदेश में शनिवार को करीब 88,000 उपचाराधीन मामले हैं.

मंत्री ने कहा कि प्रदेश में उपचाराधीन मामलों में विगत आठ दिन में लगभग 10,000 की कमी आई है. यह कमी सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के साथ ही जनता की जागरूकता के कारण संभव हो पाई है, क्योंकि लोगों ने खुद जनता कर्फ्यू लगाया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)