नॉर्थ ईस्ट

असम में जेल से चुनाव जीतने वाले पहले व्यक्ति बने कार्यकर्ता अखिल गोगोई

नव गठित रायजोर दल के संस्थापक अखिल गोगोई दिसंबर 2019 से राजद्रोह के आरोप में जेल में बंद हैं. निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़े गोगोई को 57,219 वोट मिले, जो 46.06 प्रतिशत मत हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने राज्य में हिंसक सीएए विरोधी प्रदर्शनों में कथित संलिप्तता के मामले में 2019 में उन्हें गिरफ़्तार किया था.

किसान नेता अखिल गोगोई. (फोटो साभार: विकिपीडिया)

किसान नेता अखिल गोगोई. (फोटो साभार: विकिपीडिया)

सिबसागर/गुवाहाटी: नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी कार्यकर्ता और किसान नेता अखिल गोगोई असम में जेल से विधानसभा का चुनाव जीतने वाले पहले व्यक्ति बन गए हैं. उन्होंने सिबसागर सीट से भाजपा की अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी सुरभि राजकोनवारी को 11,875 मतों से शिकस्त दी है.

नव गठित रायजोर दल के संस्थापक दिसंबर 2019 से राजद्रोह के आरोप में जेल में बंद हैं. निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़े अखिल गोगोई को 57,219 वोट मिले, जो 46.06 प्रतिशत मत हैं.

कांग्रेस ने शुरू में तो रायजोर दल के प्रमुख का समर्थन किया, लेकिन बाद में सुभ्रमित्रा गोगोई को टिकट दे दिया, जो तीसरे स्थान पर रहीं.

आरटीआई कार्यकर्ता ने राज्य के लोगों तक पहुंचने की कोशिश में जेल से कई खुले पत्र लिखे हैं और उन समस्याओं को रेखांकित किया, जिनको दुरुस्त किया जाना जरूरी है.

उनकी 85 वर्षीय बुजुर्ग मां ने अपने जेल में बंद बेटे के लिए सिबसागर की संकरी गलियों में प्रचार किया, जिसका शायद मतदाताओं पर असर हुआ.

उनकी मां प्रियदा गोगोई की दृढ़ता से प्रभावित होकर जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और संदीप पांडे ऊपरी असम के इस शहर पहुंचे और अखिल गोगोई की मां के साथ प्रचार में शामिल हुए.

रायजोर दल के सैकड़ों युवा स्वयंसेवकों ने मतदाताओं को रिझाने के लिए घर-घर जाकर प्रचार किया.

भाजपा ने अपनी प्रत्याशी सुरभि राजकोनवारी के समर्थन में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी जैसे वरिष्ठ नेताओं को उतारा, जिन्होंने निर्वाचन क्षेत्र में लोगों को संबोधित किया, लेकिन अंत में अखिल गोगोई विजेता बने और उनके पास ज्यादा नकद भी नहीं था, सिर्फ 60,497 रुपये की जमापूंजी थी.

गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से स्नातक करने वाले 46 वर्षीय अखिल गोगोई के लिए चुनावी राजनीति नई नहीं है. वह 1995-96 में कॉटन कॉलेज छात्र संघ के महासचिव रह चुके हैं.

वर्षों से गोगोई भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता रहे हैं, उन्होंने किसान अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली असम की कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) जैसे संगठन का संचालन किया है और तमाम आंदोलनों में आगे रहे हैं.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने राज्य में हिंसक सीएए विरोधी प्रदर्शनों में कथित संलिप्तता के मामले में 2019 में उन्हें गिरफ्तार किया था.

प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के कार्यकर्ता होने के आरोप में गोगोई के खिलाफ एनआईए द्वारा राजद्रोह और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत केस दर्ज किया गया है. अखिल गोगोई और केएमएसएस ने पिछले साल दिसंबर में सीएए के खिलाफ असम में हुए प्रदर्शनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

आरोप है कि गोगोई ने 2009 से अब तक भाकपा (माओवादी) के कैडर और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच बैठकों की व्यवस्था की है और ‘इस संगठन की गतिविधियों के लिए’ देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया है.

हालांकि साल 2010 में इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिल गोगोई में कहा था, ‘मैं मार्क्सवादी हूं, माओवादी नहीं’.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, रायजोर दल ने असम जातीय परिषद के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. इस परिषद को ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन और असोम जातीयोताबादी छात्र परिषद ने शुरू किया है. इस गठबंधन ने 94 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सिर्फ अखिल गोगोई वाली सीट पर ही जीत दर्ज कर पाया.

राजनीतिक विश्लेषक अतीक-उर-रहमान बारभुइयां ने बताया कि अखिल गोगोई की जीत ऐतिहासिक है, क्योंकि वह पूर्व केंद्रीय मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस के बाद एक मात्र राजनीतिक कैदी हैं, जिन्होंने ऐसा कर के दिखाया है. फर्नांडिस ने 1977 का लोकसभा चुनाव बिहार की मुजफ्फरपुर सीट से लड़ा था और तीन लाख से अधिक वोटों से जीते थे.

उन्होंने कहा कि गोगोई इसलिए जीते, क्योंकि स्थानीय जन भावनाएं उनकी पहचान है. लोग उन्हें अपना प्रवक्ता मानते है.

रायजोर दल के प्रतिष्ठित सदस्य अदालत का रुख कर अनुरोध करेंगे कि अखिल गोगोई के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने की व्यवस्था की जाए.

विजय हासिल करने के बाद गोगोई ने जेल से एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा, ‘सरकार के खिलाफ जाकर मुझे समर्थन देने के लिए मैं असम के लोगों का गहरा आभार व्यक्त करता हूं. मैं उन सभी में से हर एक को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने मेरा समर्थन किया.’

उन्होंने कहा, ‘मैं नई सरकार को धन्यवाद देता हूं और उनसे यह सुनिश्चित करने का आग्रह करता हूं कि सभी को मुफ्त टीका मिले. सरकार को गांवों में और लोगों के लिए पंचायत स्तर पर टीका शिविरों का आयोजन करना चाहिए.’

गोगोई ने आगे कहा, ‘क्षेत्रवाद की जीत हुई है. जिनके पास मानवता है (उन्हें) क्षेत्रवाद का समर्थन करना चाहिए और असम में क्षेत्रीयता को मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू की गई है. क्षेत्रवाद एक नए विचार के साथ असम के लोगों के बीच आएगा.’

गुवाहाटी मालूम हो कि असम में एक बार फिर सत्तारूढ़ भाजपा की वापसी हुई है.

भाजपा नीत राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने 126 सदस्यीय असम विधानसभा के लिए हुए चुनाव में 74 सीटों पर जीत हासिल करके राज्य में अपनी पकड़ बनाए रखी, जबकि विपक्षी कांग्रेस नीत महागठबंधन 50 सीट ही हासिल कर पाई.

भाजपा ने अकेले 60 सीटों पर जीत हासिल की है. कांग्रेस ने 29 सीट जीतीं, जबकि पिछले चुनाव में उसने 26 सीट हासिल की थीं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)