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वाराणसी: पंडित छन्नूलाल मिश्र की बड़ी बेटी का निधन, परिवार ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भारतीय शास्त्रीय गायक पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र की बड़ी बेटी संगीता मिश्र को कोरोना वायरस संक्रमण के बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पंडित छन्नूलाल 2014 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी से नामांकन दाख़िल करने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चार प्रस्तावकों में से एक रहे हैं. मामले में जांच के लिए ज़िला प्रशासन ने एक टीम का गठन कर दिया है.

पंडित छन्नूलाल मिश्र. (फोटो: फेसबुक)

पंडित छन्नूलाल मिश्र. (फोटो: फेसबुक)

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भारतीय शास्त्रीय संगीत गायक पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र की बड़ी बेटी संगीता मिश्र की एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. कोरोना संक्रमण के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

वाराणसी के प्रख्यात शास्तीय संगीत गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र 2014 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी से नामांकन दाखिल करने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चार प्रस्तावकों में से एक रहे हैं.

पंडित छन्नूलाल मिश्र के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से संगीता की मौत हो गई. इस मामले में जांच के लिए जिला प्रशासन ने एक टीम का गठन किया है. कहा गया है कि जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने बताया कि पंडित छन्नूलाल मिश्र की संगीता की मौत मेडविन हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में बीते 29 अप्रैल को हो गया था, जबकि उनकी पत्नी मनोरमा देवी का उस हफ्ते की शुरुआत में सांस संबंधी समस्या के कारण निधन हो गया.

पंडित छन्नूलाल मिश्र की छोटी बेटी नम्रता मिश्र ने बताया कि उनकी बड़ी बहन को उल्टी और खांसी की शिकायत पर वाराणसी के मलदहिया स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. शुरू में डॉक्टरों ने बताया कि उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है. अचानक 29 अप्रैल की रात को डॉक्टरों ने बताया कि उनकी मौत हो गई.

उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन मौत के बाद भी लगातार पैसों की मांग कर रहा था. बिना पैसा दिए वे शव भी नहीं देते.

नम्रता ने कहा कि यहां तक की बड़ी बहन की बेटी ने जब अपनी मां को देखना चाहा, तब अस्पताल प्रशासन ने 1700 रुपये में पीपीई किट देकर दूर से ही दिखा दिया. उन्हें कौन सी दवाएं दी जा रही थीं, क्या इलाज दिया जा रहा था इस संबंध में परिजनों को कोई जानकारी नहीं दी.

अपने दावे को साबित करने के लिए नम्रता ने प्रशासन से अस्पताल का सीसीटीवी फुटेज, उनकी बहन को दी जा रहीं दवाएं और इलाज में लगे खर्च के बिल की जांच करने का अनुरोध किया है. बताया जा रहा है कि जिला मजिस्ट्रेट द्वारा गठित जांच समिति में तीन चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हैं.

नम्रता ने आरोप लगाया कि इलाज में लापरवाही के चलते ही उनकी बहन की मौत हो गई.

नम्रता ने कहा, ‘मेरे पिता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक रहे हैं और अब वह ही हमें इंसाफ दिलाएं.’ उन्होंने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कोतवाली थाने में तहरीर दी है.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में वाराणसी के जिलाधिकारी (डीएम) कौशल राज शर्मा ने कहा कि आरोप में बहुत दम नहीं है, क्योंकि उन्होंने खुद सुनिश्चित किया है कि संगीता को इलाज के लिए उचित ऑक्सीजन-वेंटिलेटर बेड मिले और मेडविन अस्पताल में उनकी मेडिकल स्थिति के बारे में लगातार जांच की जा रही थी और यहां तक कि मामला प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंचने के चार दिन बाद उन्हें बड़े स्वास्थ्य केंद्र में रिफर करने की पेशकश भी की गई थी.

काशी जोन के डीएसपी अमित कुमार ने कहा, ‘उनकी बेटी नम्रता ने आरोप लगाया कि अस्पताल द्वारा चिकित्सकीय लापरवाही की गई. संबंधित एसीपी द्वारा एक रिपोर्ट डीएम को भेजी गई है. बाद में इस मामले की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन कर दिया गया है. अगले तीन दिनों के भीतर बोर्ड उन्हें दिए गए इलाज पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा. उसके आधार पर हम संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘मिली जानकारी के अनुसार, कोरोना पॉजिटिव होने के बाद छन्नूलाल मिश्र की बेटी संगीता को बीते 24 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उनकी मौत 29 अप्रैल को हो गई. अप्रैल महीने की शुरुआत में उनकी पत्नी का निधन हो गया था. हमें बताया गया कि नम्रता ने अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और मरीज को दिए गए इलाज की जांच करने की मांग की है. अस्पताल के भुगतान को लेकर भी मसला था. डीएम के द्वारा जांच समिति गठित कर दी गई है, जो अब मामले की गहराई से जांच करेगी.’

डीएम ने कहा कि मरीज के भर्ती होने के बाद 10 दिन से वह परिवार के संपर्क में थे और इस दौरान उन्होंने चार बार छन्नूलाल मिश्र से बात भी की थी.

डीएम ने कहा, ‘छन्नूलाल मिश्र से प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत के बाद मैंने उन्हें मरीज को मेडविन से शुभम अस्पताल में रिफर करने की बात भी कही थी, जो बड़ी सुविधा वाला अस्पताल है, लेकिन नम्रता ने यह कहते हुए इससे इनकार कर दिया कि वे मेडविन में दिए जा रहे इलाज से संतुष्ट हैं.’

उन्होंने कहा, ‘अस्पताल के स्टाफ ने चार-पांच दिन पहले परिवार के साथ वीडियो कॉल से बात भी कराई थी. हालांकि मरीज की हालत बिगड़ती जा रही थी और उन्हें आईसीयू बेड में शिफ्ट करना पड़ा था. यहां तक कि जिस दिन उनका निधन हुआ, डॉक्टरों ने मुझे उनके इलाज से जुड़ी सारी जानकारी दी थी.’

उन्होंने कहा कि मेडिविन एक कोविड अस्पताल है. यहां फिलहाल 50 मरीज भर्ती है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)