कोविड-19

कोविड-19: डॉ. रेड्डीज ने स्पुतनिक वी टीका भारत में पेश किया, दाम 995 रुपये प्रति खुराक

कोविशील्ड और कोवैक्सीन के बाद देश में शुक्रवार को एक तीसरे टीके को भारतीय बाज़ारों के लिए जारी कर दिया गया और पिछले दो टीकों की केंद्र, राज्यों और बाज़ार के लिए अलग-अलग कीमत के बजाय इसकी एक ही कीमत 995.40 रुपये प्रति खुराक रखी गई है.

स्पुतनिक वी टीका. (फोटो: रॉयटर्स)

स्पुतनिक वी टीका. (फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: कोविशील्ड और कोवैक्सीन के बाद देश में शुक्रवार को एक तीसरे टीके को भारतीय बाजारों के लिए जारी कर दिया और पिछले दो टीकों की केंद्र, राज्यों और बाजार के लिए अलग-अलग कीमत के बजाय इसकी एक ही कीमत रखी गई है.

भारतीय दवा कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज ने शुक्रवार को कहा की उसने कोविड-19 का टीका स्पुतनिक वी भारतीय बाजार में जारी कर दिया है. इसकी सीमित शुरुआत के तौर पर स्पुतनिक-वी का पहला टीका हैदराबाद में लगाया गया.

कंपनी ने कहा कि इस आयातित दवा की एक खुराक का खुदरा मूल्य 948 रुपये है. इस पर पांच प्रतिशत की दर से जीएसटी के साथ टीके का मूल्य 995.40 रुपये प्रति खुराक बैठता है.

डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज ने एक वक्तव्य में कहा, ‘आयातित टीके की वर्तमान में कीमत 948 रुपये और इसके ऊपर पांच प्रतिशत की दर से जीएसटी देय होगा. स्थानीय स्तर पर इसका उत्पादन शुरू होने के बाद दाम में कुछ कमी आ सकती है.’

कंपनी ने कहा कि रूस से आयातित टीके स्पुतनिक वी की पहली खेप एक मई को भारत पहुंची. इस टीके को केंद्रीय दवा प्रयोगशाला, कसौली से 13 मई 2021 को मंजूरी मिली.

इस दवा की और खेप आने वाले महीनों में भारत पहुंचने वाली है. उसके बाद भारतीय विनिर्माता भागीदारों से भी इसकी आपूर्ति शुरू हो जाएगी.

डॉ. रेड्डीज ने कहा कि टीके की समय पर और निर्बाध आपूर्ति के लिए वह भारत में अपने छह विनिर्माण भागीदारों के साथ संपर्क में है. हैदराबाद स्थित कंपनी ने कहा कि वह राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में सहयोग के लिए सरकार और निजी क्षेत्र के सभी पक्षों के साथ मिलकर काम करेगी, ताकि स्पुतनिक वी टीके को व्यापक स्तर पर पहुंचाया जा सके.

डॉ. रेड्डीज के सह-अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक जीवी प्रसाद ने कहा, ‘भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच कोविड-19 से लड़ने में टीकाकरण सबसे प्रभावी हथियार है. भारत में टीकाकरण अभियान में भागीदारी निभाने के जरिये भारतीयों को स्वस्थ और सुरक्षित रखने में मदद करना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है.’

देश में अब तक केवल दो टीकों को इस्तेमाल में लाया जा रहा है. भारत बायोटेक की कोवक्सीन और सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा बनाई जा रही कोविशील्ड ही मुख्यतौर पर इस्तेमाल में लाई जा रही है.

मालूम हो कि भारतीय दवा महानियंत्रक डीसीजीआई ने जनवरी में दुनिया की सबसे बड़ी टीका निर्माता कंपनी पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन कोविशील्ड तथा भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी थी.

भारत बायोटेक ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के साथ मिलकर कोवैक्सीन का विकास किया है. वहीं, सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने ‘कोविशील्ड’ के उत्पादन के लिए ब्रिटिश-स्वीडिश कंपनी एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी की है.

इसी माह रूस में निर्मित कोविड-19 की वैक्सीन ‘स्पुतनिक वी’ के सीमित आपातकालीन उपयोग के लिए भारत में मंजूरी मिल गई थी. ‘स्पुतनिक वी’ भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली तीसरी वैक्सीन है. भारत में इसका निर्माण डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज की ओर से होगा.

बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने 16 जनवरी को भारत में देशव्यापी कोविड-19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत की थी. टीकाकरण के पहले चरण में फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाया गया था.

उसके बाद एक मार्च से कोविड-19 टीकाकरण का दूसरा चरण शुरू हो गया है. इस चरण में 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों और 45 साल से ऊपर के उन लोगों को जिन्हें स्वास्थ्य  संबंधी गंभीर समस्याएं हों, को टीका लगाया जा रहा है.

बीते एक मई से 18 से 44 साल आयुवर्ग का टीकाकरण भी शुरू हो गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)