कोविड-19

कोरोना संक्रमण से उबरने के बाद कांग्रेस सांसद राजीव सातव का निधन

महाराष्ट्र से आने वाले 46 वर्षीय राजीव सातव को पूर्व कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी का क़रीबी माना जाता था. वह गुजरात में पार्टी के मामलों के प्रभारी थे, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अच्छा मुक़ाबला किया था. वह 22 अप्रैल को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे.

राजीव सातव. (फोटो साभार: ट्विटर/@priyankagandhi)

राजीव सातव. (फोटो साभार: ट्विटर/@priyankagandhi)

पुणे/नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद राजीव सातव का रविवार को पुणे के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. कुछ दिनों पहले ही वह कोविड-19 से उबरे थे. वह 46 वर्ष के थे.

कोविड-19 से उबरने के बाद वह साइटोमेगालो वायरस से संक्रमित पाए गए थे और उनकी हालत गंभीर हो गई थी.

महाराष्ट्र से आने वाले सातव को पूर्व कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी का करीबी माना जाता था. वह गुजरात में पार्टी के मामलों के प्रभारी थे, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अच्छा मुकाबला किया था. इससे पहले वह भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष थे. उन्होंने पुणे से उच्च शिक्षा प्राप्त की हुई थी.

सातव की तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था. वह 22 अप्रैल को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे.

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा, ‘वह कोविड-19 से उबर गए थे. वह कुछ इम्युनोसप्रेसैंट (शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को रोकने वाली) दवाएं ले रहे थे, क्योंकि वह स्पॉन्डेलाइटिस से पीड़ित थे और चूंकि उनकी रोग प्रतिरोधक शक्ति कमजोर थी तो वह कोविड-19 की चपेट में आ गए. बाद में उन्हें एक बैक्टीरियल संक्रमण हो गया, जिसके कारण उनके फेफड़ों में फाइब्रोसिस हो गया. डॉक्टरों की जी-जान से की कोशिशों के बावजूद उनकी इस संक्रमण से मौत हो गई.’

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस प्रवक्ता रमेश अय्यर ने बताया कि कोविड संक्रमण के बाद वह पुणे के जहांगीर अस्पताल में 23 दिनों तक भर्ती रहे थे.

साल 2014 में वह महाराष्ट्र के हिंगोली से लोकसभा के लिए चुके गए थे, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में वह शामिल नहीं हुए थे. हालांकि कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया था. वह पूर्व राज्य मंत्री रजनी सातव के बेटे थे.

मायो क्लिनिक की वेबसाइट के अनुसार, साइटोमेगालो वायरस एक आम वायरस है जो रक्त, मूत्र, लार, स्तन के दूध, आंसुओं, वीर्य और योनि के तरल पदार्थ समेत शरीर के तरल पदार्थों के जरिये फैलता है।

जिन लोगों का प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है या जो एचआईवी से संक्रमित होते हैं उन्हें यह बीमारी होने की आशंका अधिक होती है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनके निधन पर दुख जताया और कहा कि यह उनके लिए बहुत बड़ी क्षति है.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘मैं अपने मित्र राजीव सातव के निधन से बहुत दुखी हूं. उनमें एक नेता के तौर पर असीम संभावनाएं थीं और उन्होंने कांग्रेस के आदर्शों को आत्मसात कर लिया था. यह हम सभी के लिए बहुत बड़ी क्षति है. उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं.’

कांग्रेस ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट किया, ‘हम राज्यसभा सदस्य और हमवतन राजीव सातव के निधन से बहुत दुखी हैं. राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण और सादगी से पार्टी का कामकाज चलाने को काफी याद किया जाएगा. उनके परिवार, मित्रों तथा समर्थकों के प्रति हमारी संवेदनाएं हैं. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें.’

अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस ने अग्रिम मोर्चे के अपने योद्धा, कांग्रेस कार्यकारी समिति के सदस्य, सांसद और होनहार युवा नेता को खो दिया है.

उन्होंने कहा, ‘मैं इस अपूरणीय क्षति से बहुत आहत हूं. पार्टी उनके अटूट समर्पण, जुड़ाव और अपार लोकप्रियता को हमेशा याद रखेगी.’

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, ‘राजीव सातव के रूप में हमने अपना सबसे होनहार सहयोगी खो दिया. उनका दिल बेहद साफ था, वह ईमानदार, कांग्रेस के आदर्शों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध और भारत के लोगों के प्रति समर्पित थे. मेरे पास शब्द नहीं हैं, उनकी युवा पत्नी और बच्चों के लिए प्रार्थना करती हूं. ईश्वर उन्हें उनके बिना जीने की ताकत दें.’

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि इस नुकसान से वह निशब्द हो गए हैं.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘आज एक ऐसा साथी खो दिया जिसने सार्वजनिक जीवन का पहला कदम युवा कांग्रेस में मेरे साथ रखा और आज तक मेरे साथ चले पर आज. राजीव सातव की सादगी, बेबाक मुस्कुराहट, जमीनी जुड़ाव, नेतृत्व और पार्टी से निष्ठा तथा दोस्ती सदा याद आएगी. अलविदा मेरे दोस्त. जहां रहो, चमकते रहो.’

पार्टी नेता जयराम रमेश ने कहा, ‘मेरे युवा सहयोगी राजीव सातव का कोविड-19 संबंधी दिक्कतों के कारण निधन हो गया. वह युवा कांग्रेस के अध्यक्ष और साथ ही दोनों सदनों में सांसद रहे. वह एक ओजस्वी वक्ता थे और हमेशा अच्छी तैयारी करके आते थे. वह कांग्रेस के पुनरुद्धार के अभिन्न अंग थे. दुखद.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)