नॉर्थ ईस्ट

मणिपुर: भाजपा नेता की मौत पर पोस्ट लिखने वाले पत्रकार-कार्यकर्ता रासुका के तहत फ़िर गिरफ़्तार

मणिपुर राज्य के भाजपा प्रमुख एस. टिकेंद्र सिंह का बीते 12 मई को कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से निधन हो गया था. पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम और कार्यकर्ता एरेन्द्रो लीचोम्बाम ने अपने फेसबुक एकाउंट के ज़रिये अलग-अलग पोस्ट में श्रद्धांजलि देते हुए लिखा था कि गाय का गोबर या गोमूत्र कोविड-19 से बचाव नहीं करते हैं. उन्होंने कहा था कि इसका इलाज विज्ञान और कॉमन सेंस है.

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पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम और कार्यकर्ता एरेन्द्रो लीचोम्बाम.

नई दिल्ली: मणिपुर पुलिस ने राज्य के भाजपा प्रमुख एस. टिकेंद्र सिंह के पिछले हफ्ते निधन के बाद कथित तौर पर उनसे जुड़ी कुछ व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया पोस्ट करने के मामले में पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम और कार्यकर्ता एरेन्द्रो लीचोम्बाम को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत फिर से गिरफ्तार कर लिया है.

इससे पहले भी दोनों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उन्हें जमानत मिल गई थी.

उल्लेखनीय है कि सिंह का कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पिछले हफ्ते 12 मई को निधन हो गया था. दोनों आरोपियों ने फेसबुक पर श्रद्धांजलि देते हुए अलग-अलग पोस्ट में लिखा था कि गाय का गोबर या गोमूत्र कोविड-19 से बचाव नहीं करते हैं.

कई भाजपा नेता पहले दावे कर चुके हैं कि गोमूत्र कोविड-19 समेत विभिन्न बीमारियों से बचाव करता है.

भाजपा की राज्य इकाई के उपाध्यक्ष ऊषम देबन सिंह और महासचिव पी. प्रेमानंद मीतेई ने वांगखेम और लीचोम्बाम के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसके बाद पुलिस ने उन दोनों को उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया.

दोनों आरोपियों को बीते 17 मई को जमानत मिल गई थी, लेकिन इसके बाद सरकार ने उन्हें फिर से गिरफ्तार करने के लिए उन पर रासुका लगा दिया.

इम्फाल वेस्ट के जिला मजिस्ट्रेट किरन कुमार ने अपने आदेश में कहा कि जमानत पर रिहा करने पर वे दोनों राज्य की सुरक्षा और लोक व्यवस्था के लिहाज से नुकसानदायक गतिविधियों को फिर से शुरू कर सकते हैं.

भाजपा अध्यक्ष की मौत के बाद वांगखेम ने अपने फेसबुक पेज पर एक व्यंग्यात्मक पोस्ट करते हुए लिखा था कि ‘गोमूत्र और गाय का गोबर कोई काम नहीं आया.’

वहीं जाने-माने कार्यकर्ता लीचोम्बाम ने भाजपा नेता के निधन पर शोक व्यक्त किया, लेकिन साथ ही उन्होंने कोरोना के इलाज के लिए ‘गोमूत्र और गोबर’ जैसी चीजों को बढ़ावा देने के लिए पार्टी पर हमला भी बोला था.

उन्होंने लिखा था, ‘कोरोना का इलाज गोमूत्र और गाय के गोबर से नहीं होगा. इसका इलाज विज्ञान और कॉमन सेंस है.’

इम्फाल के शिजा अस्पताल में कोरोना संबंधी समस्याओं के चलते भाजपा नेता टिकेंद्र की मौत हुई थी.

समाचार पोर्टल ‘फ्रंटलाइन मणिपुर’ से जुड़े पत्रकार वांगखेम को भाजपा की आलोचना करने पर पहले भी दो बार गिरफ्तार किया जा चुका है. उन पर राजद्रोह कानून के तहत भी धाराएं लगाई गई हैं.

इससे पहले भी वांगखेम के ऊपर एनएसए या रासुका के तहत मामला दर्ज किया गया था, लेकिन इसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया गया. वांगखेम ऐसे पहले व्यक्ति हैं जिनके खिलाफ केंद्र के विवादित आईटी नियमों के तहत नोटिस जारी किया गया था, हालांकि बाद में इसे वापस ले लिया गया.

वहीं लीचोम्बाम, मणिपुर स्थित राजनीतिक पार्टी पीपुल्स रिसर्जेंस एंड जस्टिस अलायंस (पीआरजेए) के संयोजक हैं. इससे पहले पिछले साल महज एक फेसबुक पोस्ट के चलते उन पर राजद्रोह की धाराएं लगाकर मणिपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था.

राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ आलोचनात्मक टिप्पणी और वीडियो पोस्ट करने के चलते 2018 में भी उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)