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क्यों उठ रही है लक्षद्वीप के प्रशासक को हटाने की मांग

लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल खोडा पटेल द्वारा शराब से रोक हटाने, बीफ उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने, कम अपराधों के बावजूद गुंडा एक्ट लाने के निर्णयों के मसौदे को जनविरोधी बताते हुए विभिन्न विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि पटेल को वापस बुला लिया जाए.

लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल. (फोटो: ट्विटर/@prafulkpatel)

लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल. (फोटो: ट्विटर/@prafulkpatel)

कोच्चि: लक्षद्वीप के प्रशासक द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों को ‘जनविरोधी’ करार देते हुए केंद्रशासित प्रदेश और केरल की विपक्षी पार्टियों ने उन्हें वापस बुलाए जाने की मांग की है.

लक्षद्वीप के एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) के सांसद मोहम्मद फैजल और पड़ोसी राज्य केरल के उनके सहकर्मी टीएन प्रतापन (कांग्रेस), एलामारन करीम (माकपा) और ईटी मोहम्मद बशीर (मुस्लिम लीग) ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह भारत के सबसे छोटे केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासक प्रफुल्ल खोडा पटेल को वापस बुलाएं.

उन्होंने पटेल पर मुस्लिम बहुल द्वीपों से शराब के सेवन से रोक हटाने, पशु संरक्षण का हवाला देते हुए बीफ (गोवंश) उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने और तट रक्षक अधिनियम के उल्लंघन के आधार पर तटीय इलाकों में मछुआरों के झोपड़ों को तोड़ने का आरोप लगाया है.

लक्षद्वीप के सांसद फैजल ने आरोप लगाया कि प्रशासक ‘जनविरोधी’ मसौदा अधिसूचना को ऐसे समय पर लेकर आ रहे हैं जब लोग कोविड-19 महामारी की मौजूदा स्थिति की वजह से इस पर प्रतिक्रिया देने की स्थिति में भी नहीं हैं.

उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह से यहां स्थायी प्रशासक नियुक्त करने की अपील की.

दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव के प्रशासक पटेल को पिछले साल दिसंबर में दिनेश्वर शर्मा के निधन के बाद यह पदभार सौंपा गया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, लक्षद्वीप का प्रभार मिलने के बाद वह लक्षद्वीप पशु संरक्षण विनियमन, लक्षद्वीप असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम विनियमन, लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन और लक्षद्वीप पंचायत कर्मचारी नियमों में संशोधन के मसौदे ले आए हैं.

सांसद फैजल के अनुसार, प्रशासक ने प्रस्तावित विनियमों के उपायों और मसौदे लेकर आने से पहले जनप्रतिनिधियों से परामर्श नहीं किया था.

उन्होंने कहा कि मौजूदा अशांति के लिए लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण का मसौदा है. उन्होंने कहा, ‘इसका मकसद लोगों की जमीन हड़पना है. प्राधिकरण को भूस्वामियों के हितों की रक्षा किए बिना भूमि अधिग्रहण करने की भारी शक्ति प्राप्त होगी. राष्ट्रीय राजमार्ग मानकों के अनुसार सड़कों को विकसित करने के लिए एक कदम उठाया गया है. लक्षद्वीप को विशाल राजमार्गों की आवश्यकता क्यों है? प्रशासक मुख्य भूमि में लोगों के व्यावसायिक हितों को आगे बढ़ा रहा है.’

विरोध की आवाजें उठने पर पटेल ने कहा कि लक्षद्वीप द्वीपों ने आजादी के बाद से 70 वर्षों में विकास नहीं देखा है और उनका प्रशासन केवल इसे विकसित करने की कोशिश कर रहा है.

पटेल कहते हैं, ‘लक्षद्वीप के लोग नहीं, बल्कि कुछ जिनके हित खतरे में पड़ रहे हैं, वे इसका विरोध कर रहे हैं. अन्यथा, मुझे इसमें कुछ भी असामान्य नहीं दिखता जिसका विरोध किया जाना चाहिए. लक्षद्वीप द्वीप मालदीव से बहुत दूर नहीं हैं. लेकिन मालदीव एक वैश्विक पर्यटन स्थल है और इन सभी वर्षों में लक्षद्वीप में कोई विकास नहीं हुआ है. हम इसे पर्यटन, नारियल, मछली और समुद्री शैवाल का वैश्विक केंद्र बनाने की कोशिश कर रहे हैं.’

उन्होंने कहा, ‘यदि हमारे पास लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण है, तो इसे भविष्य में एक स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जा सकता है. इसी तरह असामाजिक गतिविधियों से संबंधित कानून बनाने में क्या गलत है?

दरअसल, इन कानूनों में बेहद कम अपराध क्षेत्र वाले इस केंद्र शासित प्रदेश में एंटी-गुंडा एक्ट और दो से अधिक बच्चों वालों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने का भी प्रावधान भी शामिल है.

सांसद फैजल के मुताबिक पंचायत विनियम (संशोधन) का मसौदा तैयार करने से पहले प्रशासक ने पंचायत अधिकारियों से सलाह नहीं ली.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘जिन लोगों के दो से अधिक बच्चे हैं, उन्हें पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने का प्रस्ताव है. उन्होंने एक गुप्त एजेंडा के तहत मौजूदा नियमों को संशोधित किया है.’

लक्षद्वीप पशु संरक्षण नियमन के मसौदे के तहत प्रस्तावित गोमांस पर प्रतिबंध ने केंद्र शासित प्रदेश में अशांति में योगदान दिया है जहां मुसलमानों की आबादी 90 प्रतिशत से अधिक है.

मसौदे के अनुसार, कोई भी व्यक्ति प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लक्षद्वीप में कहीं भी किसी भी रूप में बीफ या बीफ उत्पादों की बिक्री, रख-रखाव, परिवहन, पेशकश या प्रदर्शन नहीं करेगा.

मसौदा प्रशासक या सक्षम प्राधिकारी को बीफ या बीफ उत्पादों को जब्त करने का अधिकार देता है. दोषी को जेल की सजा हो सकती है जो 10 साल तक हो सकती है लेकिन सात साल से कम नहीं होगी और जुर्माना 5 लाख रुपये तक हो सकता है लेकिन 1 लाख रुपये से कम नहीं होगा.

सांसद फैजल ने कहा कि रिसॉर्ट में शराब परोसने के मानदंडों को ढीला करने पर भी लोग आंदोलन कर रहे थे. पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रिसॉर्ट्स को शराब की आपूर्ति करने की अनुमति होगी. इससे पहले केवल रिसॉर्ट्स में शराब की अनुमति थी.

दूसरी लहर के दौरान कोविड-19 मामलों में बढ़ोतरी के लिए प्रशासक को भी दोषी ठहराया जा रहा है क्योंकि पहली लहर में वहां एक भी मामले सामने नहीं आए थे. वहां अब अनिवार्य क्वारंटीन को खत्म कर दिया गया है और अब प्रवेश के लिए केवल आरटी-पीसीआर निगेटिव रिपोर्ट की आवश्यकता होगी.

पटेल ने कहा कि तथ्य यह है कि ये मसौदा नियम थे जिसका मतलब था कि लोग सुझाव दे सकते थे. उन्होंने कहा कि स्थानीय सांसद ने मसौदा नियमों के विरोध के बारे में उनसे बात नहीं की थी.

बीफ या बीफ उत्पादों की बिक्री या परिवहन पर प्रतिबंध लगाने वाले प्रस्तावित कानून पर पटेल ने कहा, ‘जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं उन्हें हमें बताना चाहिए कि वे इसका विरोध क्यों कर रहे हैं.’

नए कोविड -19 प्रवेश नियमों पर उन्होंने कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार काम किया है.

पटेल का बचाव करते हुए भाजपा ने दावा किया कि यह विरोध ‘भ्रष्ट चलन’ को खत्म करने के प्रशासक के प्रयासों का परिणाम है.

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एपी अब्दुल्लाकुट्टी ने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसद पटेल के खिलाफ इसलिए प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने द्वीपसमूह में नेताओं के ‘भ्रष्ट चलन’ को ख़त्म करने के लिए कुछ खास कदम उठाए हैं. अब्दुल्लाकुट्टी लक्षद्वीप में पार्टी के प्रभारी हैं.

वहीं, केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन ने ट्वीट कर लिखा, ‘लक्षद्वीप से आ रही खबरें काफी गंभीर हैं. उनके जीवन, आजीविका और संस्कृति पर थोपी गई चुनौतियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. लक्षद्वीप के साथ केरल का एक मजबूत संबंध और सहयोग का एक लंबा इतिहास है. इसे विफल करने के कुटिल प्रयासों की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं. अपराधियों को बाज आना चाहिए.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)