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उत्तर प्रदेश: अगले छह महीनों तक सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल पर पाबंदी बरक़रार

उत्तर प्रदेश सरकार ने बीते साल मई में छह महीने की अवधि के लिए एस्मा लागू किया था. बाद में नवंबर 2020 में इसके प्रावधानों को और छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया था.

योगी आदित्यनाथ. (फोटो साभार: फेसबुक/@MYogiAdityanath)

योगी आदित्यनाथ. (फोटो साभार: फेसबुक/@MYogiAdityanath)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने शासकीय, अर्द्धशासकीय तथा किसी स्थानीय प्राधिकरण के अधीन कार्यरत कर्मचारियों के हड़ताल करने पर पाबंदी को छह माह के लिए और बढ़ा दिया है. पिछली बार यह पांबदी 25 नवंबर, 2020 को लगाई गई थी.

कार्मिक विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकुल सिंघल ने  गुरुवार को एक बयान में कहा कि सरकार ने उत्तर प्रदेश अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम, 1966 के अधीन अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए हड़ताल पर और छह महीने की अवधि के लिए प्रतिबंध लगा दिया है.

बयान के अनुसार, इस संबंध में आवश्यक आदेश 25 मई को जारी कर दिए गए हैं.

सिंघल ने बताया कि राज्य के कार्य-कलापों से संबंधित किसी लोक सेवा, राज्य सरकार के स्वामित्व तथा नियंत्रण के तहत किसी सेवा तथा किसी स्थानीय प्राधिकरण के अधीन किसी सेवा के कर्मचारियों के लिए हड़ताल निषिद्ध की गई है.

न्यूज 18 के मुताबिक, कोरोना महामारी की तीसरी संक्रमण को देखते हुए प्रदेश की योगी सरकार ने आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम 1966 एस्मा की अवधि को बढ़ा दिया है.

अपर मुख्य सचिव मुकुल सिंघल (कार्मिक) के मुताबिक, सरकार ने फिलहाल छह महीने के लिए एस्मा लगाया है. जरूरत पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है. वहीं हालात ठीक होते देख इसे छह महीने से पहले वापस भी लिया जा सकता है.

बताया जा रहा है कि कई विभाग अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे थे. ऐसे में कर्मचारियों को अब छह महीने तक हड़ताल की अनुमति नहीं होगी. जो कर्मचारी आदेशों का उल्लंघन करेंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.

यह अधिनियम पुलिस को इसके प्रावधानों का उल्लंघन करने पर किसी को भी बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार देता है.

आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) एक ऐसा अधिनियम है जिसे कोई भी सरकार अपने-अपने राज्यों में लागू कर सकती है ताकि हड़ताली कर्मचारियों को कुछ आवश्यक सेवाओं पर काम करने से मना कर दिया जा सके जो देश में सामान्य जीवन को बनाए रखने के लिए आवश्यक और महत्वपूर्ण हैं.

अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम, 1966 के तहत किसी भी व्यक्ति को एक अवधि के लिए कारावास की सजा हो सकती है, जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और 1,000 रुपये का जुर्माना या दोनों सकती हैं.

उत्तर प्रदेश सरकार ने शुरू में राज्य में पिछले साल मई में छह महीने की अवधि के लिए एस्मा लागू किया था. बाद में इसने 25 नवंबर, 2020 को प्रावधानों को और छह महीने के लिए बढ़ा दिया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)