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अधिकारियों का सेवानिवृत्ति के तत्काल बाद निजी क्षेत्र में नौकरी करना गंभीर कदाचारः सीवीसी

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की ओर से केंद्र सरकार के सभी विभागों के सचिवों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रमुखों और सार्वजनिक उपक्रमों को जारी आदेश में कहा है कि यदि किसी सेवानिवृत्त अधिकारी ने एक से अधिक संगठनों में काम किया है, तो उन सभी संगठनों से सतर्कता संबंधी मंज़ूरी प्राप्त की जानी चाहिए, जहां अधिकारी ने पिछले 10 वर्षों में सेवा दी थी.

(फोटो साभार: फेसबुक)

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नयी दिल्लीः केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सरकारी अधिकारियों के सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद निजी क्षेत्र में नौकरी करने पर चिंता जताई है.

सीवीसी ने गुरुवार को कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारियों का अनिवार्य ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ पूरा किए बिना निजी क्षेत्र में नौकरी स्वीकार करना गंभीर कदाचार का मामला है.

सीवीसी ने आदेश जारी कर कहा कि केंद्र सरकार के सभी संगठनों को सेवानिवृत्ति के बाद रोजगार देने से पहले सतर्कता विभाग से अनिवार्य रूप से मंजूरी लेनी चाहिए.

सीवीसी ने कहा कि यदि किसी सेवानिवृत्त अधिकारी ने एक से अधिक संगठनों में काम किया है, तो उन सभी संगठनों से सतर्कता संबंधी मंजूरी प्राप्त की जानी चाहिए, जहां अधिकारी ने पिछले 10 वर्षों में सेवा दी थी.

आदेश में कहा गया कि बाबुओं को सेवानिवृत्ति के बाद नौकरी देने से पहले सभी सरकारी संगठनों को अनिवार्य रूप से सतर्कता मंजूरी लेनी चाहिए.

सीवीसी ने केंद्र सरकार के सभी विभागों के सचिवों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रमुखों और सार्वजनिक उपक्रमों को जारी आदेश में कहा, ‘यह देखा गया है कि कुछ मामलों में सरकारी संगठनों से सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद सेवानिवृत्त अधिकारी निजी क्षेत्र के संगठनों में पूर्णकालिक या फिर कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं.’

आदेश में कहा गया, ‘अक्सर इस तरह की पेशकश को स्वीकर करने से पहले संबंधित संगठनों के नियमों के तहत सेवानिवृत्ति के बाद कुछ अवधि के लिए कोई पद नहीं लेने की व्यवस्था का पालन नहीं किया जाता है, जो गंभीर कदाचार का मामला है.’

आदेश में कहा गया कि सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों को नियुक्त करने से पहले उन संगठनों से सतर्कता संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए कोई परिभाषित प्रक्रिया नहीं है, जहां ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारियों ने सेवानिवृत्ति से पहले पूर्णकालिक आधार पर सेवाएं दी थीं.

आयोग के अनुसार, ‘ऐसा देखा गया है कि सरकारी संगठनों द्वारा सेवानिवृत्त अधिकारियों को नियुक्त करने से पहले सतर्कता मंजूरी प्राप्त करने के लिए एक समान परिभाषित प्रक्रिया के अभाव में कभी-कभी ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है जहां अपने कार्यकाल के दौरान गड़बड़ी में लिप्त रहे अथवा जिनके खिलाफ मामले लंबित हैं, ऐसे अधिकारियों को सरकारी संगठनों में नियुक्त कर दिया जाता है.’

सीवीसी ने कहा, ‘ऐसी स्थिति से न केवल अनावश्यक शिकायतों या पक्षपात के आरोप लगते हैं, बल्कि ये निष्पक्षता और ईमानदारी के सिद्धांतों के खिलाफ भी है.’

आयोग ने कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं से संबंधित सेवानिवृत्त अधिकारियों के संबंध में केंद्र सरकार के समूह ए के अधिकारी या केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले या अन्य संगठनों में उनके समकक्ष अधिकारियों को अनुबंध आधारित रोजगार देने से पहले उस नियोक्ता संगठन से सतर्कता मंजूरी अनिवार्य रूप से प्राप्त की जानी चाहिए, जहां से सरकारी अधिकारी सेवानिवृत्त हुए हैं.

सीवीसी का कहना है कि नियोक्ता से पंद्रह दिन के भीतर जवाब नहीं मिलने पर सतर्कता मंजूरी में तेजी लाने के लिए उन्हें एक रिमाइंडर भेजा जा सकता है.

हालांकि, इसके बाद भी पहले कम्युनिकेशन के 21 दिनों के भीतर नियोक्ता से किसी तरह का जवाब नहीं मिलने पर इसे संबंधित व्यक्ति के लिए डीम्ड विजिलेंस क्लीयरेंस माना जा सकता है.

सीवीसी ने कहा, ‘बाद में यह पता चलने पर कि पूर्व कर्मचारी सतर्कता संबंधी किसी मामले में शामिल था नियोक्ता संगठन सभी तरह की गतिविधियों के लिए जिम्मेदार होगा.’

सीवीसी ने यह भी कहा है कि सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों को फिर से नौकरी की पेशकश पारदर्शी होनी चाहिए. इसके तहत उन लोगों को समान अवसर मिलना चाहिए, जो उस पद के लिए अपनी सेवा देने को तैयार हैं.

आयोग के आदेश में कहा गया है कि अनुबंध या परामर्श के आधार पर भरे जाने वाले पद को संबंधित संगठन की वेबसाइट पर विज्ञापन के रूप में उचित स्थान पर डाला जाना चाहिए और सार्वजनिक मंच पर उपलब्ध होना चाहिए.

आदेश यह भी कहता है कि सभी सरकारी संगठनों को अपने कर्मचारियों के लिए उचित नियम और दिशानिर्देश तैयार करने चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कर्मचारियों द्वारा सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद निजी क्षेत्र की संस्थाओं के किसी भी प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार न किया जाए.

बता दें कि आयोग का यह आदेश केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, सार्वजनिक उपक्रमों, बैंकों और बीमा क्षेत्र के लिए अनिवार्य है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)