कोविड-19

संसदीय समिति की चेतावनी के बावजूद अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या क्यों घटाई गई: प्रियंका

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि जिस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना महामारी से युद्ध जीत लेने की घोषणा कर रहे थे, उसी समय देश में ऑक्सीजन, आईसीयू एवं वेंटिलेटर बेडों की संख्या कम की जा रही थी, लेकिन झूठे प्रचार में लिप्त सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया.

प्रियंका गांधी. (फोटो: पीटीआई)

प्रियंका गांधी. (फोटो: पीटीआई)

नयी दिल्लीः कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों में ऑक्सीजन एवं आईसीयू बेड की संख्या में कमी का उल्लेख करते हुए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आखिर पहली लहर के बाद विशेषज्ञों और संसदीय समिति की चेतावनियों को अनसुना करते हुए अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या क्यों घटाई गई.

उन्होंने शनिवार को सरकार से सवाल पूछने की अपनी शृंखला ‘जिम्मेदार कौन’ के तहत किए गए फेसबुक पोस्ट में पूछा कि क्या देश के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने से ज्यादा महत्वपूर्ण प्रधानमंत्री निवास और नई संसद का निर्माण है?

प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि जिस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना महामारी से युद्ध जीत लेने की घोषणा कर रहे थे, उसी समय देश में ऑक्सीजन, आईसीयू एवं वेंटिलेटर बेडों की संख्या कम की जा रही थी, लेकिन झूठे प्रचार में लिप्त सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया.

उन्होंने कहा, ‘सितंबर 2020 में भारत में 247,972 ऑक्सीजन बेड थे, जो 28 जनवरी 2021 तक 36 फीसदी घटकर 157,344 रह गए. इसी दौरान आईसीयू बेड 66,638 से 46 फीसदी घटकर 36,008 और वेंटिलेटर बेड 33,024 से 28 फीसदी घटकर 23,618 रह गए.’

प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘पिछले साल स्वास्थ्य मामलों की संसद की स्थाई समिति ने कोरोना की भयावहता का जिक्र करते हुए अस्पताल के बिस्तरों, ऑक्सीजन आदि की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने की बात कही थी. मगर सरकार का ध्यान कहीं और था.’

प्रियंका गांधी ने कोरोना की दूसरी लहर की भयावहता और आम लोगों की परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा, ‘जिस समय देशभर में लाखों लोग अस्पतालों में बिस्तरों की गुहार लगा रहे थे, उस समय सरकार के आरोग्य सेतु जैसे ऐप और अन्य डाटाबेस किसी काम के नहीं निकले.’

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी का उदाहरण देते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि पिछले साल जुलाई में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 10,000 बिस्तरों वाला आईटीबीपी का अस्थायी मेडिकल सेंटर का उद्घाटन किया था, लेकिन इस साल फरवरी महीने में आईटीबीपी सेंटर बंद हो गया.

उन्होंने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मेडिकल सेंटर की सीमा घटाकर सिर्फ 2,000 बेड कर दी गई.

कांग्रेस महासचिव ने दावा किया, ‘2014 में सरकार में आते ही स्वास्थ्य बजट में 20 फीसदी की कटौती करने वाली मोदी सरकार ने 2014 में 15 एम्स बनाने की घोषणा की थी. इनमें से एक भी एम्स आज सक्रिय अस्पताल के रूप में काम नहीं कर रहा है. 2018 से ही संसद की स्थायी समिति ने एम्स अस्पतालों में शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों की कमी की बात सरकार के सामने रखी है, लेकिन सरकार ने उसे अनसुना कर दिया.’

उन्होंने सरकार से पूछा, ‘तैयारी के लिए एक साल होने के बावजूद आखिर क्यों केंद्र सरकार ने ये कहा कि हम कोरोना से युद्ध जीत गए हैं, जैसी झूठी बयानबाजी में गुजार दिया और अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने के बजाय कम क्यों होने दी?’

प्रियंका ने यह सवाल भी किया कि मोदी सरकार ने विशेषज्ञों और स्वास्थ्य मामलों की संसद की स्थायी समिति की चेतावनी को नकारते भारत के हर जिले में उन्नत स्वास्थ सुविधाओं को उपलब्ध करने का कार्य क्यों नहीं किया?

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)