राजनीति

जिनमें रीढ़ नहीं है, वे तृणमूल कांग्रेस में लौटने की कोशिश करेंगे: भाजपा सांसद

पश्चिम बंगाल के बिष्णुपुर से भाजपा सांसद सौमित्र ख़ान ने कहा है कि जब 42 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई, तब चुप रहना सत्तारूढ़ दल के प्रति समर्थन का संकेत है. क्या आप अपनी पुरानी पार्टी में लौट जाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि आप मंत्री नहीं बन सके.

सौमित्र खान. (फोटो साभार: फेसबुक)

सौमित्र खान. (फोटो साभार: फेसबुक)

कोलकाता: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल इकाई में चल रही अंतर्कलह और कुछ दल-बदलुओं के तृणमूल में लौटने की इच्छा प्रकट करने के बीच भगवा पार्टी के एक सांसद ने कहा कि ‘जिनकी रीढ़ नहीं है’ वे ही सत्तारूढ़ दल में फिर शामिल होने का प्रयास करेंगे.

राज्य के बिष्णुपुर से भाजपा सांसद सौमित्र खान की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब पार्टी नेता राजीब बनर्जी ने बीते आठ जून को कहा था, ‘लोग भारी जनादेश से चुनी गई सरकार के खिलाफ राष्ट्रपति शासन की धमकी को पसंद नहीं करेंगे.’

खान ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘जब 42 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई, तब चुप रहना सत्तारूढ़ दल के प्रति समर्थन का संकेत है. क्या आप अपनी पुरानी पार्टी में लौट जाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि आप मंत्री नहीं बन सके.’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए पूर्व मंत्री राजीब बनर्जी हावड़ा में अपनी दोमजुर सीट बचा नहीं पाए. भाजपा ने इसी सीट से उन्हें प्रत्याशी बनाया था.

वैसे पूर्व विधायक ने यह कहते हुए बीते आठ जून के बयान को स्पष्ट करने से इनकार कर दिया कि वह जो कहना चाहते थे, उसे उन्होंने कह दिया है.

इस बीच हावड़ा के दोमजुर में बुधवार को जगह-जगह पोस्टर लगाए गए जिसमें कहा गया है, ‘जिन्होंने ममता बनर्जी को धोखा दिया, उनके लिए बंगाल में कोई स्थान नहीं है.’

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ कि ये पोस्टर किसने लगाए.

एक पोस्टर में लिखा गया है, ‘(गद्दार) मीर जाफर को दोमजुर में वापस नहीं आने दिया जाएगा.’ उसमें यह भी दावा किया है कि तृणमूल कार्यकर्ताओं की ओर यह पोस्टर लगाया गया है.

दल-बदलने वाले तृणमूल कांग्रेस के कई पूर्व नेताओं ने पिछले कुछ सप्ताह में ममता बनर्जी के खेमे में लौटने की इच्छा प्रकट की है, उनमें पूर्व विधायक सोनाली गुहा एवं दीपेंदु विश्वास आदि प्रमुख नेता हैं. कुछ अन्य भी कथित रूप से तृणमूल नेतृत्व को संकेत दे रहे हैं और उन्हें तृणमूल में वापसी की आस है.

तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा दो जून को भाजपा नेता मुकुल रॉय की बीमार पत्नी को देखने के लिए अस्पताल पहुंचने के बाद इस बात की अटकलें तेज हो गई हैं कि राजनीतिक समीकरण में बदलाव आ सकता है.

मुकुल राय भाजपा में आने से पहले तृणमूल कांग्रेस में महासचिव थे. हाल ही में अभिषक बनर्जी को महासचिव बनाया गया है. राय 2017 में भाजपा में शामिल हो गए थे. राय प्रदेश भाजपा नेतृत्व द्वारा बीते आठ जून को बुलाई गई बैठक में भी नहीं पहुंचे थे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, राज्य भाजपा प्रमुख दिलीप घोष को भी असंतुष्ट जमीनी कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए दल बदलू नेता जिम्मेदार थे.

पार्टी में शामिल होने के तुरंत बाद कुछ दलबदलू नेताओं को टिकट दिए जाने को लेकर चुनाव से पहले राज्य भाजपा कार्यालयों में भी विरोध प्रदर्शन भी हुए थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)