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राम रहीम मामले की पीड़िता बोली, मेरा परिवार 15 साल तक मानसिक तनाव में रहा और धमकियां मिलती रहीं’

पीड़िता ने ही तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को पत्र लिखकर डेरा में हो रहे साध्वियों के यौन शोषण की शिकायत की थी.

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कुरुक्षेत्र: डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने अपनी अनेक शिष्याओं का यौन उत्पीड़न किया, लेकिन यातना की शिकार पीड़िताएं सामाजिक शर्मिंदगी के चलते चुप रहीं. यह कहना है उस महिला का जिसने स्वयंभू बाबा को चुनौती देने की हिम्मत जुटाई.

पीड़िता ने कहा कि लेकिन उन्हें और उनके परिवार को 15 साल तक अनगिनत धमकियों तथा मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा. उनके भाई की हत्या भी कर दी गई.

लेकिन अब इस पीड़िता तथा एक अन्य महिला के यौन उत्पीड़न मामले में राम रहीम के 20 साल के लिए सलाखों के पीछे जाने के साथ ही यहां से 10 किलोमीटर दूर जीटी रोड पर स्थित एक गांव के लोगों में खुशी का माहौल है. पीड़िता का परिवार इसी गांव में रहता है.

उन्होंने कहा कि उनका परिवार डेरा से 40 साल से जुड़ा था जब बाबा सतनाम सिंह इसके प्रमुख थे. वह डेरा द्वारा संचालित एक स्कूल में पढ़ाती थीं और राम रहीम का असली चेहरा उनके सामने 1999 में तब आया जब उन्हें पता चला कि मासूम लड़कियों का शोषण किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि जिस गुफा में राम रहीम रहा करता था, उसके प्रवेश द्वार पर लड़कियों को सुरक्षाकर्मी के रूप में तैनात किया जाता था. उन्हें भी वहां तैनात किया गया था. उन्होंने कहा कि वह देखती थीं कि कुछ लड़कियां गुफा से रोती हुई बाहर निकलती थीं. बाद में राम रहीम की नज़र उन पर भी पड़ गई और उनका भी यौन शोषण किया गया.

पीड़िता ने कहा कि उनके माता-पिता डेरा की ताकत से वाकिफ़ थे. इसलिए उन्होंने उन्हें गांव वापस भेज दिया. इसके बाद 2001 में पूरे परिवार ने डेरा छोड़ दिया.

उन्होंने कहा कि उसका परिवार 15 साल तक मानसिक तनाव में रहा और उन्हें अनेक बार धमकियां मिलीं. उन्होंने कहा, डेरा प्रमुख ने बड़ी संख्या में लड़कियों का यौन शोषण किया, लेकिन वे सामाजिक शर्मिंदगी की वजह से चुप रहीं.

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उन्होंने दावा किया कि जब सीबीआई ने अज्ञात पत्र के आधार पर मामले की जांच शुरू की तो उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया जिससे कि डेरा प्रमुख को उसकी करतूतों की सज़ा मिल सके.

हालांकि उनका शोषण ही ऐसा मामला नहीं था जिससे परिवार को मुसीबतें झेलनी पड़ीं. डेरा प्रमुख के कथित लोगों ने 2002 में इस संदेह में पीड़िता के भाई की हत्या कर दी कि प्रधानमंत्री और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय को भेजे गए अज्ञात पत्र के पीछे उसका हाथ है.

इस पत्र में आरोप लगाया गया था कि गुरमीत राम रहीम अपनी शिष्याओं का यौन शोषण करता है. इसी पत्र की वजह से मामले में सीबीआई जांच हुई और स्वयंभू बाबा को आरोपी बनाया गया.

परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों ने अदालत के फैसले पर राहत व्यक्त की जिसने डेरा प्रमुख को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.

पीड़िता के पति ने कहा कि उन लोगों को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था. उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि राम रहीम को हत्या मामले और सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के कत्ल के मामले में भी कठोर सज़ा मिलेगी.

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि फैसले के बाद और भी पीड़ित लोग डेरा प्रमुख के जुल्मों का खुलासा करने के लिए सामने आएंगे. गांव में पीड़िता के परिवार और कुरुक्षेत्र में पीड़ित साध्वी को भी पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई गई है.