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चुनावी ट्रस्टों से मिला 95 प्रतिशत चंदा बीजेपी को: एडीआर

रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान सत्या चुनावी ट्रस्ट की ओर से 47 करोड़ रुपये तो समाज चुनाव ट्रस्ट को 2.52 करोड़ रुपये राजनीतिक दलों को मिले.

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(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: एक अध्ययन में पाया गया कि वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान सिर्फ तीन राजनीतिक दलों- भाजपा, कांग्रेस और जदयू – को चुनावी ट्रस्टों के ज़रिये कॉरपोरेट चंदा प्राप्त हुआ.

चुनावी सुधारों पर काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक कुल 49.5 करोड़ रुपये के ये चंदे कर विभाग के पास पंजीकृत 18 चुनावी ट्रस्टों में से सिर्फ दो द्वारा दिए गए.

टाइम्स आॅफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इन चुनावी ट्रस्टों को हर वित्त वर्ष में मिले चंदे का 95 प्रतिशत पंजीकृत राजनीतिक दलों को देना होता है. रिपोर्ट के अनुसार, इन ट्रस्टों की ओर से दिया गया कुल 49.50 करोड़ के चंदे में से बड़ा हिस्सा भाजपा को मिला है, बची रकम कांग्रेस और जदयू के खाते में गई है.

इन ट्रस्टों द्वारा चुनाव आयोग को दी गई सालाना रिपोर्ट के आधार पर एडीआर ने यह अध्ययन किया है.

एडीआर की रिपोर्ट कहती है कि इन ट्रस्टों को कॉरपोरेट्स से कुल 49.52 करोड़ रुपये की रकम प्राप्त हुई और उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों को इनमें से 99.96 फीसदी रकम वितरित कर दी.

राजनीतिक दलों को इस तरह से मिलने वाले चंदे में 2015-16 में भारी गिरावट हुई. पिछले वित्त वर्ष के दौरान यह रकम 177.4 करोड़ रुपये थी.

विभिन्न चुनावी ट्रस्टों द्वारा मिले चंदे का विवरण देते हुए एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया कि सत्या चुनावी ट्रस्ट को 47.0015 करोड़ रुपये तो समाज चुनाव ट्रस्ट को 2.52 करोड़ रुपये वर्ष 2015-16 के दौरान मिले.

टाइम्स आॅफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सत्या चुनावी ट्रस्ट की ओर से दिए गए चंदे में से 95.74 प्रतिशत यानी 45 करोड़ रुपये भाजपा को मिले हैं. बाकी बची हुई रकम में से दो करोड़ कांग्रेस को दिया गया.

समाज इलेक्टोरल ट्रस्ट की ओर से दिए गए चंदे में से 39.68 प्रतिशत यानी एक करोड़ रुपये भाजपा को मिले और बची तकरीबन 1.5 करोड़ रुपये की रकम जदयू को मिली है.
इस वर्ष के दौरान 12 ट्रस्टों को जहां कोई दान प्राप्त नहीं हुआ वहीं दो अन्य ने उनको मिले योगदान का खुलासा नहीं किया. दो अन्य ट्रस्टों का पंजीकरण 31 मार्च 2016 के बाद हुआ था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)