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टूलकिट मामला: ‘मैनिपुलेटेड’ टैग पर ट्विटर इंडिया के एमडी से दिल्ली पुलिस ने की थी पूछताछ

बीते महीने ट्विटर ने भाजपा नेता संबित पात्रा के एक ट्वीट पर ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ का टैग लगा दिया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने कोविड-19 महामारी से निपटने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि ख़राब करने के लिए एक ‘टूलकिट’ बनाया है. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने ट्विटर के दिल्ली और गुड़गांव स्थित दफ़्तरों पर छापा मारा था. उस वक़्त सरकार पर ट्विटर को डराने-धमकाने के आरोप भी लगे थे.

संबित पात्रा. (फोटो: पीटीआई/द वायर)

संबित पात्रा. (फोटो: पीटीआई/द वायर)

नई दिल्ली: ट्विटर इंडिया के प्रबंध निदेशक (एमडी) मनीष माहेश्वरी से दिल्ली पुलिस ने ‘कोविड टूलकिट’ मामले में अपनी जांच के सिलसिले में पिछले महीने पूछताछ की थी. अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी.

उन्होंने इस बारे में और अधिक जानकारी तो नहीं दी, लेकिन यह बताया कि माहेश्वरी से उपयोगकर्ताओं (यूजर) के ट्वीट को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ (छेड़छाड़ किया हुआ) करार देने संबंधी कंपनी की नीति के बारे में भी सवाल किए गए.

दरसअल ट्विटर ने भाजपा नेता संबित पात्रा के एक ट्वीट पर ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ का टैग लगा दिया था, जिसमें संबित ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने कोविड-19 महामारी से निपटने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि खराब करने के लिए एक ‘टूलकिट’ बनाया है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि मामले की जांच कर रहे दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ के दल को 31 मई को बेंगलुरु भेजा गया था जहां माहेश्वरी से पूछताछ हुई.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद पुलिस ने ट्विटर के अधिकारियों और कांग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया प्रमुख रोहन गुप्ता और शिकायत दर्ज कराने वाले प्रवक्ता एमवी राजीव गौड़ा को तलब किया है. हालांकि, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा को अभी पूछताछ के लिए बुलाया जाना बाकी है.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विशेष सेल की नई दिल्ली रेंज ने मामले में नोटिस देने के लिए ट्विटर इंडिया के दिल्ली और गुड़गांव कार्यालय का दौरा करने के कुछ दिनों बाद माहेश्वरी से संपर्क किया था. हालांकि, वे गुड़गांव कार्यालय का पता नहीं लगा सके और दिल्ली में एक कार्यालय पर ताला लगा हुआ था.

एक अधिकारी ने कहा, ‘जांच अधिकारी ने माहेश्वरी को जांच में शामिल होने के लिए एक और नोटिस भेजा था. जांच अधिकारी ने उनसे कहा था कि वे पूछताछ के लिए उनके घर आएंगे. बाद में माहेश्वरी ने उन्हें बेंगलुरु आने के लिए कहा और दो निरीक्षक एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ उनसे पूछताछ करने गए.’

करीब दो घंटे तक चली पूछताछ के दौरान जांच दल ने कंपनी के पदानुक्रम के बारे में पूछा. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘उन्होंने उनसे यह भी पूछा कि टूलकिट के बारे में ट्विटर के पास किस तरह की जानकारी है और उन्होंने कुछ नेताओं द्वारा पोस्ट को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ लेबल देने का विकल्प क्यों चुना.’

विशेष प्रकोष्ठ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उन्होंने इसके बारे में पहले भी ट्विटर को नोटिस भेजा था, लेकिन उन्हें ‘उचित प्रतिक्रिया’ नहीं मिली.

ट्विटर पर सत्ताधारी पार्टी के नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ के रूप में बदनाम करने की कांग्रेस की साजिश का आरोप लगाने के कुछ दिनों बाद उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर नोटिस देने का फैसला किया.

दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) चिन्मय बिस्वाल ने तब कहा था, ‘बाद में उन्होंने दिल्ली और गुड़गांव में उनके कार्यालयों का दौरा किया. यह आवश्यक था, क्योंकि हम यह पता लगाना चाहते थे कि नोटिस देने के लिए सही व्यक्ति कौन है, क्योंकि ट्विटर इंडिया के एमडी के जवाब बहुत अस्पष्ट हैं.’

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि वे फिलहाल प्राथमिकी दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच कर रहे हैं और मामले में कथित रूप से शामिल सभी संबंधित लोगों और संगठनों को तलब कर रहे हैं.

जबकि अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, अधिकारी ने कहा कि भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है, जिनके पोस्ट को टैग लगाया गया था.

गौड़ा ने कहा था कि उन्हें 21 मई को दिल्ली पुलिस से एक नोटिस मिला था और उन्होंने बताया था कि वे छत्तीसगढ़ में शिकायत का पालन करेंगे, जहां पुलिस ने पात्रा और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के ‘टूलकिट’ ट्वीट के लिए प्राथमिकी दर्ज की है.

गौड़ा ने कहा, ‘चूंकि छत्तीसगढ़ में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी और हमने इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से कोई संतोषजनक प्रगति नहीं देखी थी, इसलिए हमने खुद को सह-शिकायतकर्ता के रूप में पेश किया. हमने 22 मई को दिल्ली पुलिस को जवाब दिया कि हम रायपुर में अपनी शिकायत का पालन करेंगे.’

बता दें कि बीते मई महीने में ट्विटर ने कोविड-19 महामारी की रोकथाम के उपायों को लेकर सरकार को निशाना बनाने के लिए विपक्षी दल कांग्रेस के कथित रणनीतिक दस्तावेज (टूलकिट) पर सत्तारूढ़ भाजपा नेताओं के कई ट्वीट को ‘तोड़ मरोड़ कर पेश तथ्य’ (मैनिपुलेटेड मीडिया) बताया था.

उसके बाद दिल्ली पुलिस कंपनी के  दिल्ली और गुड़गांव स्थित दफ्तरों पर छापा मारा था. उस वक्त सरकार पर ट्विटर को डराने-धमकाने के आरोप भी लगे थे.

अपने कार्यालय में दिल्ली पुलिस के पहुंचने का विरोध करते हुए ट्विटर ने ‘पुलिस द्वारा डराने-धमकाने की रणनीति के इस्तेमाल’ पर चिंता जताते हुए कहा था कि वह भारत में अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए संभावित खतरे के बारे में चिंतित है.

इसके जवाब में दिल्ली पुलिस ने सख्त बयान देते हुए कहा था कि ‘टूलकिट’ मामले में चल रही जांच पर ट्विटर का बयान झूठा है और यह कानूनी जांच में बाधा डालने और सहानुभूति बटोरने का प्रयास है.

वहीं, सरकार ने पुलिस के जरिये डराने-धमकाने संबंधी ट्विटर के आरोप की कड़ी निंदा की और इसे पूरी तरह आधारहीन तथा गलत बताया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)