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नोटबंदी: ‘लगा के आग शहर को बादशाह ने कहा, उठा है दिल में तमाशे का शौक़ बहुत’

नोटबंदी के नतीजों पर विपक्ष ने मोदी को घेरा, चिदंबरम ने पूछा- क्या नोटबंदी कालेधन को सफेद करने के लिए थी?

Demonetisation Notebandi Reuters

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: नोटबंदी पर रिजर्व बैंक की तरफ से आंकड़े जारी होते ही केंद्र सरकार की आलोचना शुरू हो गई है. विपक्ष ने नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है. पूर्व वित्त मंंत्री पी चिदंबरम ने सवाल उठाया है कि क्या नोटबंदी का फैसला काले धन को सफेद करने के लिए तैयार किया गया था.

उधर, माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा है कि देश इस राष्ट्रविरोधी कृत्य के लिए मोदी सरकार को कभी माफ नहीं करेगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘एक बड़ी असफलता जिसने निर्दोष लोगों की जान ली और अर्थव्यवस्था को तबाह किया. क्या प्रधानमंत्री जिम्मेदारी लेंगे?’

कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीटर पर लिखा, ‘इतिहास में मोदीजी का नाम मुहम्मद बिन तुग़लक़ के साथ लिखा जाएगा. अगर नैतिकता का मूल्य है तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए और देश से माफ़ी मांगनी चाहिए.’

नोटबंदी के बारे में एक और ट्वीट में सुरजेवाला ने लिखा, ‘लगा के आग शहर को बादशाह ने कहा, उठा है दिल में तमाशे का शौक़ बहुत, झुका के सर शाह-परस्त बोले, हुज़ूर शौक़ सलामत रहे, शहर और बहुत.’

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने रिजर्व बैंक की तरफ से जारी आंकड़ों का इस्तेमाल उस पर निशाना साधने के लिए किया और कहा कि बंद किए गए एक फीसदी नोट केंद्रीय बैंक के पास वापस नहीं आए, इस पर आरबीआई को शर्म करनी चाहिए.

कांग्रेस ने कहा कि सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई और इस कवायद की वजह से 104 निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. पार्टी ने प्रधानमंत्री से माफी की मांग की.

चिदंबरम ने ट्विटर पर कहा, 99 फीसदी नोट कानूनी रूप से बदले गए. क्या नोटबंदी कालेधन को सफेद करने के लिए तैयार की गई योजना थी?

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नोटबंदी के कदम के पीछे जो अर्थशास्त्री था वह नोबल पुरस्कार का हकदार है क्योंकि आरबीआई को 16,000 करोड़ का फायदा हुआ लेकिन नये नोटों की छपाई में 21,000 करोड़ रुपये खर्च हो गए.

उर्जित पटेल के विशेषाधिकार प्रस्ताव लाएगी सपा

समाजवादी पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर संसदीय समिति को गुमराह करने के आरोप में रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएगी.

केंद्रीय बैंक ने अपनी वार्षिक रपट में कहा है कि 1,000 रुपये के बंद हो चुके नोटों में से केवल 8.9 करोड़ नोट प्रणाली में वापस नहीं आए. यह चलन में रहे 1,000 रुपये के कुल नोटों का मात्र 1.3 प्रतिशत है.

इस प्रकार 1,000 रुपये के कुल 8,900 करोड़ रुपये मूल्य के नोट उसके पास वापस नहीं पहुंचे. हालांकि रिजर्व बैंक ने बंद हो चुके वापस नहीं लौटे 500 रुपये के नोटों की कोई विशेष संख्या नहीं बताई है.

केंद्रीय बैंक ने कहा कि 30 जून, 2017 तक बंद हो चुके पुराने नोटों में से प्राप्त नोटों का अनुमानित मूल्य 15.28 लाख करोड़ रुपये है. भविष्य में जब सत्यापन जांच पूरी होने पर इसमें बदलाव हो सकता है.

नये नोटों की प्रिटिंग और अन्य लागत में बढ़ोत्तरी से सरकार को रिजर्व बैंक से मिलने वाले लाभांश की हानि होगी. रिजर्व बैंक ने कहा कि 2016-17 में उसकी आय 23.56 प्रतिशत घट गई जबकि उसके व्यय में 107.84 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

रिजर्व बैंक की बचत में 53.46 प्रतिशत गिरावट

रिजर्व बैंक ने कहा, जून में समाप्त उसके लेखा-वर्ष में उसका कुल बचत लाभ 306.59 अरब रुपये रहा. इससे पिछले वर्ष बचत 658.76 अरब रुपये थी. इस तरह केंद्रीय बैंक की बचत में 53.46 प्रतिशत गिरावट दिखी.

सरकार ने 500 रुपये के पुराने नोटों के स्थान पर इस मूल्य के नए नोट शुरू किए हैं पर 1,000 रुपये का कोई नया नोट जारी नहीं किया गया है. सरकार ने इस क्रम में 2,000 रुपये का एक नया नोट शुरू किया है.

रपट में केंद्रीय बैंक ने बताया कि 31 मार्च 2017 तक 500 रुपये के पुराने और नए नोट मिलाकर कुल 588.2 करोड़ नोट बाहर थे. 31 मार्च 2016 के अंत में चलन में 500 रुपये के नोटों की संख्या 1,570.7 करोड़ थी.

मार्च 2017 के अंत तक 2,000 रुपये मूल्य के 328.5 करोड़ नोट चलन में आ चुके हैं. केंद्रीय बैंक ने 500 और 2,000 रुपये के नए नोटों के अलावा पिछले हफ्ते 200 रुपये का नया नोट भी शुरू किया है. रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर आर. गांधी ने कहा कि नोटबंदी का दीर्घकालिक प्रभाव होगा.

राष्ट्र-विरोधी कृत्य, देश कभी माफ नहीं करेगा

माकपा ने नोटबंदी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि भारत इस राष्ट्र विरोधी कृत्य के लिए मोदी सरकार को कभी माफ नहीं करेगा जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है.

माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने 2016-17 के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट आने के बाद कहा कि रद्द किए गए 1000 रुपये के संचालित नोटों में से महज 1.4 फीसदी नोट ही जमा नहीं हुए हैं. बाकी मुद्रा बैंकिंग सिस्टम में लौट आई है.

ट्विटर पर येचुरी ने इस कदम के औचित्य पर सवाल उठाए जिसके चलते कथित रूप से 100 से ज्यादा जानें गईं और गरीब सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए.

उन्होंने जोर देकर कहा कि नोटबंदी के लिए गिनाए गए उद्देश्य, भ्रष्टाचार से जंग, कालाधन, जाली मुद्रा और आतंकवाद पर लगाम, सब धड़ाम हो गए.

कोई नहीं कह रहा कि कालाधन समाप्त हो गया

विपक्षी आलोचना से अलग वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि नोटबंदी का असर अनुमान के अनुरूप ही रहा है और इससे मध्यम और दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचेगा.

रिजर्व बैंक के यह कहने के एक दिन बाद कि बंद किए गए 500, 1000 रुपये के करीब करीब सभी नोट बैंकिंग तंत्र में लौट आये हैं, जेटली ने कहा कि पैसा बैंकों में जमा हो गया है इसका मतलब यह नहीं है कि यह पूरा धन वैध है.

उन्होंने कहा, यह कोई नहीं कह रहा है कि नोटबंदी के बाद कालाधन पूरी तरह से समाप्त हो गया है. वित्त मंत्री ने कहा कि नोटबंदी के बाद जीएसटी लागू होने से प्रत्यक्ष कर राजस्व को अच्छा बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि इसके बाद कई नये लोग कर के दायरे में आए हैं.

उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद काफी नकदी बैंकों में जमा की गई. यह सरकार के लिए चिंता की बात नहीं है क्योंकि यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है कि अधिक से अधिक धन औपचारिक तंत्र में आया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

  • DR B PARSANA

    well said. thanks the wire team for you nice efforts.
    on a lighter note:
    विमुद्रिकरण को वैश्विक उष्मन को कम करने के लिए किया गया है. १००० की करेंसी को २००० में परिवर्तित हो गयी, जिसे वैश्विक उष्मन के आंकड़े में हमारी सकल घरेलु उत्पाद दर के समतुल्य गिरावट आई है!
    (ऐसा कहेना सफ़ेद झूठ है, लेकिन कर्तव्यनिष्ठ अधिवक्ता कोई भी तर्क-कुतर्क दे सकते है, इसी में एक अधिवक्ता की कार्यकुशलता सिध्ध होती है.)