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उत्तर प्रदेश: यूएपीए के तहत जेल में बंद पत्रकार सिद्दीक कप्पन की मां का निधन

यूपी पुलिस ने पिछले अक्टूबर में हाथरस जाने के रास्ते में केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन समेत चार युवकों को गिरफ़्तार किया था, जिसके बाद उन पर शांतिभंग और यूएपीए के तहत मामले दर्ज किए गए थे. इसी हफ्ते मथुरा की स्थानीय अदालत ने इन सभी को शांतिभंग के आरोपों से मुक्त किया है.

अपनी मां के साथ कप्पन. (फोटो साभार: ट्विटर/@vssanakan)

अपनी मां के साथ कप्पन. (फोटो साभार: ट्विटर/@vssanakan)

मलप्पुरमः जेल में बंद केरल के मलप्पुरम के पत्रकार सिद्दीक कप्पन की मां ख़दीजा कुट्टी का शुक्रवार को निधन हो गया. कप्पन की 90 वर्षीय मां लंबे समय से बीमार थीं.

कप्पन को पिछले साल पांच अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के हाथरस जाते समय गिरफ्तार किया गया था. वह हाथरस में कथित तौर पर दलित युवती की सामूहिक बलात्कार के बाद मौत के बाद हाथरस जा रहे थे.

कप्पन और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के तीन अन्य पर गिरफ्तारी के बाद शांतिभंग करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था.

गिरफ्तारी के दो दिन बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने राजद्रोह और गैरकानूनी गतिविधियां निवारक अधिनियम (यूएपीए) सहित विभिन्न मामलों में उन पर एक और मामला दर्ज किया था.

पुलिस ने इस मामले में बाद में चार और लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था.

इस साल अप्रैल में पुलिस ने मथुरा की स्थानीय अदालत में कप्पन सहित सभी आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी और उन पर राजद्रोह और जातिगत हिंसा भड़काने की साजिश रचने की धाराएं लगाई थीं.

फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने कप्पन को अपनी बीमार मां से मिलने के लिए पांच दिन की जमानत दी थी.

मालूम हो कि सिद्दीक कप्पन और तीन अन्य की गिरफ्तारी के दो दिन बाद यूपी पुलिस ने उनके खिलाफ राजद्रोह और यूएपीए के तहत विभिन्न आरोपों में अन्य मामला दर्ज किया था.

यूएपीए के तहत दर्ज मामले में आरोप लगाया गया था कि कप्पन और उनके सह-यात्री हाथरस सामूहिक बलात्कार-हत्या मामले के मद्देनजर सांप्रदायिक दंगे भड़काने और सामाजिक सद्भाव को बाधित करने की कोशिश कर रहे थे. कप्पन न्यायिक हिरासत में है.

पुलिस ने बाद में इस मामले में चार और लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया. इस साल अप्रैल में पुलिस ने मथुरा की स्थानीय अदालत में कप्पन सहित सभी आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी.

मथुरा की स्थानीय अदालत ने केरल के कप्पन और तीन अन्य लोगों को शांति भंग करने के आरोप से पंद्रह जून को मुक्त कर दिया था, क्योंकि पुलिस इस मामले की जांच तय छह महीने में पूरा नहीं कर पाई.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)