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केरल: घरेलू हिंसा की पीड़ित पर विवादित टिप्पणी के बाद राज्य महिला आयोग अध्यक्ष का इस्तीफ़ा

केरल राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष और माकपा की केंद्रीय समिति की सदस्य एमसी जोसेफिन ने इस हफ्ते एक टीवी चैनल के लाइव कार्यक्रम में घरेलू हिंसा की शिकायत करने वाली एक महिला से कथित असंवेदनशील तरीके से बात की थी, जिस पर विवाद होने के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा से दिया.

एमसी जोसेफिन. (फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स)

एमसी जोसेफिन. (फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स)

तिरुवनंतपुरम: केरल राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष एमसी जोसेफिन ने अपने कथित असंवेदनशील बयान से विवाद उत्पन्न होने के एक दिन बाद, शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने शुक्रवार को उनके बयान के विरुद्ध प्रदर्शन किया.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की केंद्रीय समिति की सदस्य जोसेफिन ने बुधवार को एक मलयालम चैनल पर एक लाइव टेलीविजन कार्यक्रम (सीधा प्रसारण) के दौरान घरेलू हिंसा की एक शिकायतकर्ता के साथ रूखेपन के साथ बात की थी, जिसके बाद सत्तारूढ़ माकपा के लिए असहज स्थिति पैदा हो गयी थी.

इस विषय पर शुक्रवार को (पार्टी के) प्रदेश सचिवालय की एक बैठक में चर्चा हुई. बैठक में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन एवं माकपा के अन्य शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया.

माकपा के प्रदेश प्रभारी सचिव ए. विजयराघवन ने बाद में संवाददाताओं का बताया कि जोसेफिन ने प्रदेश माकपा सचिवालय के सामने अपनी टिप्पणियों के संबंध में अपना रुख स्पष्ट किया और पद से हटने की इच्छा प्रकट की जिसे पार्टी ने विधिवत स्वीकार कर लिया.

उन्होंने कहा, ‘उनकी टिप्पणियां उपुयक्त नहीं थीं. उन्होंने खेद प्रकट किया. प्रदेश सचिवालय ने इस मामले पर चर्चा की जहां जोसेफिन ने अपना रुख स्पष्ट किया और अपनी ओर से हुई चूक के लिए खेद प्रकट किया. उन्होंने आयोग के अध्यक्ष पद से हटने की इच्छा प्रकट की. पार्टी ने उसे स्वीकार कर लिया.’

इस बीच, विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने कहा कि अध्यक्ष का पद छोड़ने का फैसला उपयुक्त है और उन्हें तो पहले ही ऐसा कर लेना चाहिए था क्योंकि वह लगातार ‘अपने पद की गरिमा को प्रभावित करने वाली टिप्पणियां करती रही हैं.’

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने एक बयान में कहा कि उनके पास इस्तीफा देने के सिवा कोई विकल्प नहीं था, वह शिकायतकर्ता के बारे में अपने असंवेदनशील बयान को लेकर लोगों के आक्रोश से घिर गयी थीं.

उल्लेखनीय है कि टेलीविजन शो के दौरान शिकायतकर्ता ने जोसेफिन को बताया था कि 2014 में उनकी शादी हुई थी और उनके बच्चे नहीं है, ऐसे में उसके पति एवं सास अक्सर उसे प्रताड़ित करते हैं.

महिला ने कहा कि उनका पति और सास उसे प्रताड़ित करते हैं. तब जोसेफिन ने उनसे पूछा कि क्या उसने अपने पति एवं सास के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. महिला ने इसका उत्तर ‘न’ में दिया. इस पर जोसेफाइन ने कथित तौर पर कहा कि पुलिस में नहीं जाने का परिणाम भुगतिए.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इसके बाद जोसेफिन ने महिला को फैमिली कोर्ट जाने की सलाह दी. उन्होंने कहा, ‘तुम्हें समझ आया मैंने क्या कहा? अगर तुम अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती हो तो तुम्हें एक अच्छा वकील ढूंढना चाहिए और दहेज़ और मुआवजे के लिए फैमिली कोर्ट जाना चाहिए.’

टीवी चैनल पर महिला आयोग की अध्यक्ष का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोग उनके अंसवेदनशील रवैये को लेकर उनके इस्तीफे की मांग करने लगे. जोसेफिन ने एक बयान में अपने व्यवहार को लेकर खेद भी प्रकट किया.

इस बीच महिला कांग्रेस ने यहां एकेजी सेंटर के सामने विरोध मार्च निकाला जहां शुक्रवार सुबह प्रदेश सचिवालय की बैठक चल रही थी. भाजपा की भी महिला कार्यकर्ताओं ने आयोग के कार्यालय तक मार्च निकाला और जोसेफिन का पुतला फूंका.

द न्यूज़ मिनट के अनुसार, इस साल की शुरुआत में जोसेफिन के एक 87 वर्षीय महिला के रिश्तेदार से कही टिप्पणी पर भी विवाद हुआ था क्यों उसे ‘असंवेदनशील’ माना गया था. साल 2020 में माकपा सदस्यों पर महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों के आरोपों के बारे में पूछने पर उन्होंने कथित तौर पर एक रिपोर्टर को झिड़का था.

जोसेफिन किसी महिला आयोग से जुड़ी पहली महिला नहीं हैं, जिनकी किसी टिप्पणी को लेकर बवाल हुआ है.

इसी महीने की शुरुआत में उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य मीना कुमारी ने कहा था कि युवा लड़कियों के मोबाइल फोन पर  जानी चाहिए क्योंकि वे फोन पर पुरुषों से बात करती हैं और भाग जाती हैं.

इससे पहले जनवरी में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य चंद्रमुखी देवी ने बदायूं में 50 वर्षीय आंगनवाड़ी कर्मचारी के बलात्कार-हत्या मामले को लेकर कहा था कि अगर महिला शाम के समय बाहर नहीं गई होती, तो यह घटना नहीं होती.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)