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लक्षद्वीपः प्रशासन के फ़ैसले के विरोध में स्थानीय लोगों का नारियल के पत्तों के साथ प्रदर्शन

लक्षद्वीप प्रशासन के हालिया आदेश में कहा गया कि सार्वजनिक स्थानों, घरों के आसपास नारियल के छिलके, पेड़ की पत्तियां, नारियल के खोल, टहनियां आदि मिलने पर जुर्माना लगाया जाएगा. स्थानीयों का कहना है कि प्रशासन को जुर्माने की बजाय उचित अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को लागू करना चाहिए.

लक्षद्वीप में प्रदर्शन करते स्थानीय (फोटो साभार: ट्विटर/@@Anandans76)

लक्षद्वीप में प्रदर्शन करते स्थानीय (फोटो साभार: ट्विटर/@Anandans76)

नई दिल्लीः लक्षद्वीप के स्थानीय निवासियों ने घरों के आसपास नारियल पेड़ के पत्तों, तनों या नारियल के खोल पाए जाने पर जुर्माना लगाने के स्थानीय प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार को नारियल के पत्तों के साथ विरोध प्रदर्शन किया.

सेव लक्षद्वीप फोरम (एसएलएफ) के बैनर के तहत स्थानीय निवासियों ने नारियल के पत्तों के ढेर के सामने खड़े होकर प्रशासन के जनविरोधी आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया. इस दौरान लोगों ने हाथों में प्लेकार्ड पकड़े हुए थे, जिन पर लिखा था, मल्चिंग शुरू करें और जुर्माना लगाना बंद करें.

दरअसल मल्चिंग या पलवार मिट्टी के कटाव को रोकने, नमी के वाष्पीकरण को रोकने और खरपतवार की वृद्धि को रोकने के लिए मिट्टी की सतह को ढकने की प्रक्रिया है.

इस एक घंटे के प्रदर्शन में स्थानीय लोगों ने प्रशासन से उन पर जुर्माना लगाने के आदेश को वापस लेने और नारियल से ऑर्गेनिक पदार्थों को खाद के रूप में तबदील करने की तकनीक लाने की अपील की ताकि मिट्टी की उर्वरक शक्ति एवं गुणवत्ता को सुधारा जा सके.

लक्षद्वीप सांसद मोहम्मद फैजल पीपी ने कहा, ‘हमारी मांग यह है कि लोगों पर लगाए गए जुर्माने को वापस लिया जाना चाहिए और एक उचित कचरा प्रबंधन प्रणाली को लागू किया जाना चाहिए. जब तक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को लागू नहीं किया जाता तब तक प्रशासन की ओर से लोगों से उनके घरों या प्रॉपर्टी में गिरने वाले नारियल और ताड़ के पत्ते, तने या फल पर लगने वाले जुर्माने को इकट्ठा करने का कोई अधिकार नहीं है.’

उन्होंने कहा, ‘स्थानीय लोगों से पत्तियों और पेड़ों के अन्य हिस्सों का वैज्ञानिक प्रसंस्करण कहां किए जाने की उम्मीद की जाती है.’

लोकसभा सांसद ने कहा कि द्वीप के लोग अपनी खुद की प्रसंस्करण इकाई या कूड़ा जलाने का संयत्र नहीं रख सकते. यह प्रशासन का प्रमुख कर्त्तव्य है कि वह इस तरह के केंद्र उपलब्ध कराएं.

उन्होंने कहा, ‘अगर इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं और लोग इसका पालन नहीं कर रहे हैं तो आप जुर्माना लगा सकते हैं. प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारी द्वीप में कूड़ा जलाने जैसी वैज्ञानिक प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना सुनिश्चित करना है.

कोरोना महामारी के मद्देनजर द्वीप पर स्वच्छता के मद्देनजर चार जून को जारी आदेश में कहा गया कि किसी भी परिसर में रह रहे प्रत्येक परिवार को कुछ मानकों के साथ अपने-अपने घर के आसपास हर समय स्वच्छता बनाए रखनी है.

आदेश में कहा गया कि सार्वजनिक स्थानों, घरों के आसपास नारियल के छिलके, पेड़ की पत्तियां, नारियल के खोल, टहनियों आदि को भूस्वामियों द्वारा पर्यावरण की स्वच्छता को प्रभावित किए बिना वैज्ञानिक रूप से निपटान किया जाना चाहिए.

आदेश में कहा गया था कि किसी भी शख्स को नारियल तोड़ने या फेंकने, बची हुई सब्जियों और फलों को सड़कों, फुटपाथ, सार्वजनिक स्थानों, लैगून, समुद्रतटों पर फेंकने की अनुमति नहीं है. इसके साथ ही सड़क किनारे, खुले में या फिर समुद्र किनारे किसी भी तरह का ठोस कचरा जलाने पर भी प्रतिबंध है.

आदेश में कहा गया कि जो भी इन नियमों का उल्लंघन करेगा, उन पर लक्षद्वीप ठोस अपशिष्ट प्रबंधन उपकानून 2018 की अनुसूची एक के तहत दंडित किया जाएगा और साथ में उस पर आईपीसी की धारा 188 के तहत भी आपराधिक कार्यवाही की जाएगी.

बता दें कि मुस्लिम बहुल आबादी वाला लक्षद्वीप हाल ही में लाए गए कुछ प्रस्तावों को लेकर विवादों में घिरा हुआ है. वहां के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल को हटाने की मांग की जा रही है.

लक्षद्वीप के निवासियों ने जनविरोधी कदम उठाने के मुद्दे पर प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल को वापस बुलाने और मसौदा कानून को रद्द करने की मांग को लेकर पानी के भीतर विरोध प्रदर्शन करने के साथ अपने घरों के बाहर 12 घंटे का अनशन किया था.

पिछले साल दिसंबर में लक्षद्वीप का प्रभार मिलने के बाद प्रफुल्ल खोड़ा पटेल लक्षद्वीप पशु संरक्षण विनियमन, लक्षद्वीप असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम विनियमन, लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन और लक्षद्वीप पंचायत कर्मचारी नियमों में संशोधन के मसौदे ले आए हैं, जिसका तमाम विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं.

उन्होंने पटेल पर मुस्लिम बहुल द्वीप से शराब के सेवन से रोक हटाने, पशु संरक्षण का हवाला देते हुए बीफ (गोवंश) उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने और तट रक्षक अधिनियम के उल्लंघन के आधार पर तटीय इलाकों में मछुआरों के झोपड़ों को तोड़ने का आरोप लगाया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)