भारत

मध्य प्रदेश सरकार बनवा रही गाय और भैंसों का आधार

केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना की पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरुआत, दुधारू पशुओं पर लग रही यूनीक पहचान संख्या वाली चिप.

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भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 90 लाख से अधिक दुधारू पशुओं गाय एवं भैंस पर आधार कार्ड जैसे यूनिक पहचान संख्या (यूआईडी) नंबर की चिप लगाना शुरू कर दिया है, ताकि उनकी आसानी से पहचान होने के साथ-साथ तस्करी पर रोक लगाई जा सके.

यह योजना केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित है और संभवत: मध्य प्रदेश देश में पहला राज्य है, जो पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे शुरू कर रहा है.

मध्य प्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के प्रबंध संचालक एचबीएस भदौरिया ने बताया, हमने हाल ही में प्रदेश के कुल 51 जिलों में से चार जिलों शाजापुर, आगरमालवा, धार एवं खरगोन में दुधारू पशुओं गाय एवं भैंस पर आधार कार्ड जैसे यूआईडी नंबर की चिप लगाना शुरू कर दिया है. अब तक हमने 1,085 गाय-भैंसों पर यह यूआईडी नंबर लगा दिया है.

उन्होंने कहा कि यह पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया जा रहा है. भदौरिया ने कहा, वर्तमान में मध्य प्रदेश में 90 लाख से अधिक गाय एवं भैंसें हैं, जिनमें से करीब 54 लाख गायें हैं. इन सभी पर यह यूआईडी नंबर लगाए जाएंगे. यह काम तेजी से चल रहा है. इसे पूरा होने में लगभग दो साल लगेंगे.

उन्होंने दावा किया कि दुधारू पशुओं के कान पर लगने वाले इन 12 अंकों के यूआईडी नंबर पर कोई व्यक्ति छेड़छाड़ नहीं कर सकता है.

भदौरिया ने बताया कि जिस तरह से साफ्टवेयर में मनुष्यों के आधार नंबर डालने से उसके बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाती है, उसी तरह से गाय एवं भैंस पर लगने वाले इस यूआईडी नंबर को साफ्टवेयर में डालने से उस दुधारू पशु के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी.

उन्होंने कहा कि हमने राज्य में प्रति माह साढ़े सात लाख दुधारू पशुओं पर यह यूआईडी नंबर लगाने को लक्ष्य रखा है.

भदौरिया ने बताया, यूआईडी नंबर में गाय की आयु, नस्ल, लिंग, स्तनपान, ऊंचाई, शरीर, रंग, सींग प्रकार, पूंछ और पशु के विशेष अंकों का विवरण होगा तथा इस दुधारू पशु की यूआईडी नंबर कंप्यूटर में डालने पर माउस से एक क्लिक करने पर ही उस पशु के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी.

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग के करीब 3,600 कर्मचारी इन दुधारू पशुओं का पता लगाने के लिए राज्य के हर गांव, ब्लॉक, तहसील एवं जिले का दौरा करेंगे और उनके कानों में यूआईडी नंबर की एक चिप लगाएंगे.

भदौरिया ने बताया कि हमारे कर्मचारी इन दुधारू पशुओं की जानकारी एक फॉर्म में भर कर लाएंगे और उसके बाद इसे सॉफ्टवेयर में डाल देंगे और जरूरत पड़ने पर इनको अपडेट भी करते रहेंगे.

उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था के जरिए गायों एवं भैंसों का पता लगाने के अलावा इनकी तस्करी पर भी रोक लगाई जा सकेगी.