भारत

सांप्रदायिक नफ़रत फैलाने के आरोप में ट्विटर इंडिया और उसके एमडी के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज

शिकायतकर्ता वकील आदित्य सिंह देशवाल ने ‘एथिस्ट रिपब्लिक’ नाम के ट्विटर हैंडल द्वारा साझा की गई देवी काली की एक तस्वीर पर सवाल उठाया है और ट्विटर द्वारा इसे नहीं हटाने का आरोप लगाया है. बीते कुछ दिनों में ट्विटर के ख़िलाफ़ दर्ज यह पांचवीं एफ़आईआर है.

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: पहले से ही कई मुद्दों को लेकर मुकदमों का सामना कर रहे ट्विटर के सामने अब एक नई परेशानी खड़ी हो गई है. कथित तौर पर सांप्रदायिक नफरत फैलाने के आरोप में ट्विटर इंडिया के प्रबंध निदेशक (एमडी) मनीष माहेश्वरी के खिलाफ दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में शिकायत दर्ज की गई है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत में एक गैर-लाभकारी संगठन (एनजीओ) का भी नाम लिया गया है. यह याचिका अधिवक्ता आदित्य सिंह देशवाल ने दायर की है.

शिकायतकर्ता ने ‘एथिस्ट रिपब्लिक’ के हैंडल द्वारा साझा की गई देवी काली की एक तस्वीर पर सवाल उठाया है और कहा है कि ट्विटर उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री न केवल अपमानजनक थी, बल्कि समाज में झुंझलाहट, असुविधा, खतरा, बाधा, अपमान, चोट, आपराधिक धमकी, दुश्मनी, घृणा और दुर्भावना पैदा करने के उद्देश्य से पोस्ट किया गया है.

वकील ने कहा, ‘यहां यह उल्लेख करना भी अनुचित नहीं होगा कि ये पोस्ट उक्त उपयोगकर्ता द्वारा जान-बूझकर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए हमारी धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने के लिए लगाई गई हैं.’

उन्होंने ट्विटर कम्युनिकेशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, उसके एमडी मनीष माहेश्वरी, ट्विटर इंडिया के सार्वजनिक नीति प्रबंधक शगुफ्ता कामरान के साथ-साथ ‘एथिस्ट रिपब्लिक’ के संस्थापक और सीईओ, आर्मिन नवाबी और सुज़ाना मैकिन्ट्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है.

देशवाल ने ट्विटर पर जुलाई 2011 से आर्मिन नवाब और ‘एथिस्ट रिपब्लिक’ की मिलीभगत से ईशनिंदा वाली सामग्री दिखाने का आरोप लगाया है. उन्होंने आगे कहा कि ‘एथिस्ट रिपब्लिक’ की प्रोफाइल हिंदू धर्म और अन्य धर्मों के बारे में इस तरह की ईशनिंदा सामग्री से भरी है.

वकील ने अपनी शिकायत में कहा, ‘दूसरी ओर, ट्विटर ने एक महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यवर्ती (एसएसएमएन) के रूप में ऐसी सामग्री को हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है, लेकिन भारतीय कानूनों का घोर उल्लंघन करते हुए अपराध के एक सहयोगी के रूप में काम कर रहा है और इस तरह की ईशनिंदा और अपमानजनक सामग्री दिखा रहा है.’

उन्होंने ट्विटर पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के संदर्भ में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 के प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.

देशवाल ने कहा कि माहेश्वरी और कामरान ने जान-बूझकर ऐसी आपत्तिजनक सामग्री को वेबसाइट से हटाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की.

उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया नियमों को लेकर ट्विटर और केंद्र सरकार के बीच काफी समय से टकराव चला आ रहा है. सरकार ने ट्विटर पर जान-बूझकर इन नए नियमों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है.

बता दें कि नए आईटी नियमों के तहत भारतीय यूजर्स की शिकायतों पर कार्रवाई के लिए सोशल मीडिया कंपनियों में मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति जरूरी है.

यही कारण है कि वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने ऐलान किया है कि ट्विटर इंडिया मध्यस्थ नहीं है और आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत कानूनी सुरक्षा के लिए उत्तरदायी नहीं है.

वहीं, ट्विटर के भारत में नियुक्त अंतरिम मुख्य अनुपालन अधिकारी ने नियुक्ति से चार हफ्ते से कम समय में ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

वहीं, पिछले एक महीने में ट्विटर और उसके अधिकारियों के खिलाफ पहले ही अलग-अलग मामलों में चार एफआईआर दर्ज हो चुकी है.