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आंबेडकर यूनिवर्सिटीः एससी/एसटी छात्रों से भेदभाव पर आवाज़ उठाने वाली छात्रा पर जुर्माना

दिल्ली के आंबेडकर यूनिवर्सिटी की एक छात्रा पर दिसंबर 2020 में विश्वविद्यालय के ऑनलाइन दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की कई नीतियों के ख़िलाफ़ हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए जुर्माना लगाया है. छात्रा का कहना है कि उन्हें निशाना बनाया गया है.

आंबेडकर यूनिवर्सिटी (फोटो साभारः वेबसाइट)

नई दिल्लीः दिल्ली के आंबेडकर यूनिवर्सिटी (एयूडी) की छात्रा पर दिसंबर 2020 में विश्वविद्यालय के ऑनलाइन दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की कई नीतियों के विरोध में छात्रों के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रा पर आपत्तिजनक और अनुचित टिप्पणी करने और समारोह में शामिल मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया है.

यूनिवर्सिटी के 30 जून के आदेश में कहा गया कि एमए की परफॉर्मेंस स्टडीज की अंतिम सेमेस्टर की छात्रा पर जुर्माना लगाने को कहा है. अगर वह अंतिम परीक्षा में शामिल होना चाहती हैं तो उन्हें जुर्माने की राशि अदा करनी होगी.

छात्रा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) की राज्य इकाई की उपाध्यक्ष भी हैं. छात्रा ने यह कहते हुए इन आरोपों से इनकार किया है कि उन्हें निशाना बनाया गया है और उनके द्वारा की गई टिप्पणी यूट्यूब के लाइव स्ट्रीमिग लिंक पर पोस्टेड है.

यूनिवर्सिटी का आरोप है कि ऑनलाइन सत्र के दौरान छात्रा ने आरक्षण नीति में संवैधानिक बदलाव और अत्यधिक फीस के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन का उल्लेख कर मुख्यमंत्री केजरीवाल पर छात्रों की परवाह नहीं करने का आरोप लगाया.

छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रों के खिलाफ कथित भेदभाव का भी आरोप लगाया.

यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर की ओर से जारी आदेश में कहा गया, ’23 दिसंबर 2020 को यूनिवर्सिटी के नौंवे वार्षिक दीक्षांत समारोह के दौरान छात्रा द्वारा यूट्यूब थ्रेड में आपत्तिजनक एवं अपमानजनक टिप्पणी करने की घटना सामने आई. प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने मामले के सामने आने के बाद एक उपसमिति गठित की थी, जिसने जांच रिपोर्ट सौंप दी है.’

आदेश में कहा गया कि उपसमिति और छात्रा के बीच छह अप्रैल को हुई निजी बातचीत के दौरान छात्रा ने स्वीकार किया कि उसने टिप्पणी की थी और वह इसे लेकर शर्मिंदा भी नहीं है.

आदेश में कहा गया कि यूनिवर्सिटी, मुख्य अतिथि और गेस्ट ऑफ ऑनर के बारे में सार्वजनिक मंच पर टिप्पणी आधारहीन और अपमानजनक है और यह स्पष्ट रूप से यूनिवर्सिटी को बदनाम करने के लिए जानबूझकर किया गया प्रयास है.

आदेश में कहा गया कि छात्रा का आचरण विश्वविद्यालय के अनुशासन संहिता का उल्लंघन है और इसलिए उस पर जुर्माना लगाया गया है.

छात्रा ने खुद पर लगे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसे निशाना बनाया गया है क्योंकि दर्जनभर से अधिक छात्रों ने ऑनलाइन विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था.

छात्रा ने कहा, ‘किसी को भी कारण बताओ नोटिस नहीं मिला है. कई बार पूछने के बावजूद मुझे नहीं बताया गया कि किसने शिकायत की और मुझ पर किन क्लॉज में जुर्माना लगाया गया है.’

इस बीच यूनिवर्सिटी की एआईएसए इकाई ने तुरंत इस सजा को रद्द करने की मांग करते हुए दिल्ली सरकार से आंबेडकर यूनिवर्सिटी में हाशिये के छात्रों के साथ संस्थागत भेदभाव को रोकने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने के लिए छात्रों को प्रताड़ित और दंडित करने के लिए यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया है.

यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर ने प्रशासन द्वारा छात्रा पर की गई कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा, ‘दीक्षांत समारोह किसी भी छात्र के लिए उसके शैक्षणिक सत्र का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम होता है. कार्यक्रम के दौरान छात्रा का आचरण एक छात्र के तौर पर अशोभनीय था और बीआर आंबेडकर के मूल्यों के खिलाफ था.’