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असम के सीएम ने कहा, मुस्लिम बुद्धिजीवी इस बात से सहमत कि जनसंख्या वृद्धि विकास के लिए ख़तरा है

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ीं 150 से अधिक मुस्लिम हस्तियों से मुलाकात के बाद कहा है कि वे सभी लोग इस बात पर सहमत थे कि राज्य के कुछ हिस्सों में जनसंख्या विस्फोट राज्य के विकास के लिए ख़तरा उत्पन्न कर रहा है. यदि असम भारत के पांच शीर्ष राज्यों में से एक बनना चाहता है तो अपने जनसंख्या विस्फोट को प्रबंधित करना होगा.

असम के मंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा. (फोटो साभार: फेसबुक/@himantabiswasarma)

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने रविवार को विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ीं 150 से अधिक मुस्लिम हस्तियों से मुलाकात की. उन्‍होंने कहा कि वे सभी इस बात पर सहमत थे कि राज्य के कुछ हिस्सों में जनसंख्या वृद्धि विकास के लिए खतरा है.

‘आलाप आलोचना – धार्मिक अल्पसंख्यकों को सशक्त बनाना’ नाम के इस कार्यक्रम में तय हुआ कि अल्पसंख्यकों के विकास से संबंधित उपाय सुझाने के लिए आठ उप-समूह बनाए जाएंगे, जिनमें सदस्य के रूप में राज्य के जातीय मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल होंगे.

शर्मा ने कहा, ‘मैंने 150 से अधिक बुद्धिजीवियों, लेखकों, डॉक्टरों, कलाकारों, इतिहासकारों और प्रोफेसरों तथा अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों से मुलाकात की. हमने असम के अल्पसंख्यक लोगों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की.’

मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में शामिल हुए सभी लोग इस बात पर सहमत थे कि असम के कुछ हिस्सों में जनसंख्या विस्फोट राज्य के विकास के लिए खतरा उत्पन्न कर रहा है.

शर्मा ने कहा, ‘यदि असम भारत के पांच शीर्ष राज्यों में से एक बनना चाहता है तो हमें अपने जनसंख्या विस्फोट को प्रबंधित करना होगा. इस बात पर सभी सहमत हुए.’

असम के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार राज्य के जातीय मुस्लिम समुदाय के लोगों की सदस्यता वाले आठ उप-समूह गठित करेगी, जो समुदाय के विकास पर अगले तीन महीने में रिपोर्ट पेश करेंगे.

शर्मा ने कहा, ‘रिपोर्ट के बाद अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के विकास के लिए एक मसौदा तैयार किया जाएगा. हम अगले पांच साल में मसौदे के अनुरूप काम करेंगे.’

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगले दौर की बैठकों में अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित राजनीतिक नेता और छात्र संगठन शामिल होंगे.

उन्होंने कहा, ‘अगले कुछ दिन में, मैं प्रवासी मुसलमानों या उन मुसलमानों के साथ बैठक करूंगा, जिनका मूल पूर्वी बंगाल से है. दोनों मुस्लिम समुदायों (राज्य के मूल निवासी और पूर्वी बंगाल से ताल्लुक रखने वालों) के बीच विशिष्ट सांस्कृतिक अंतर है और हम उसका सम्मान करते हैं.’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, 2011 की जनगणना के अनुसार, असम की 3.12 करोड़ आबादी में मुस्लिम 34.2 प्रतिशत हैं. पिछले दो दशकों में मुस्लिम आबादी की वार्षिक वृद्धि दर लगातार गिर रही है. 1990 और 2000 के दो दशकों में मुस्लिम आबादी की वार्षिक वृद्धि दर 1991-2001 के दौरान 1.77 प्रतिशत से गिरकर 2001-2011 के दौरान 1.57 प्रतिशत हो गया है.

गौरतलब है कि हाल ही में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने कहा था कि उनकी सरकार दो बच्चों के नियम के साथ एक जनसंख्या नीति लाने की योजना बना रही है और इसका पालन करने वाले परिवारों को खास योजनाओं के तहत लाभ मिलेगा. इस तरह का एक नियम पंचायत चुनाव लड़ने के लिए और राज्य सरकार की नौकरियों के लिए मौजूद है.

शर्मा ने कहा था कि असम सरकार राज्य द्वारा वित्तपोषित विशेष योजनाओं के तहत लाभ लेने के लिए चरणबद्ध तरीके से दो बच्चे की नीति को लागू करेगी.

मालूम हो कि मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही हिमंता बिस्वा शर्मा सरकारी योजनाओं के तहत लाभ लेने के लिए दो बच्चों के नियम की वकालत करते रहे हैं.

शर्मा ने 10 जून को तीन जिलों से हाल ही में बेदखली के बारे में बात की थी और अल्पसंख्यक समुदाय से गरीबी को कम करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण को लेकर शालीन परिवार नियोजन नीति अपनाने का आग्रह किया था.

शर्मा ने बड़े परिवारों के लिए प्रवासी मुस्लिम समुदाय को जिम्मेदार ठहराया था, उनके इस बयान की ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) सहित विभिन्न हलकों से तीखी प्रतिक्रिया आई थी.

असम में 2018 में असम पंचायत कानून, 1994 में किए गए संशोधन के अनुसार पंचायत चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता और चालू अवस्था में शौचालयों के साथ-साथ दो बच्चों का मानदंड है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)