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राजस्थान: कुलपतियों को राज्यपाल की जीवनी के साथ बिल भी दिए जाने पर विवाद, राजभवन ने दी सफाई

जयपुर​ स्थित राजस्थान राजभवन में एक जुलाई को आयोजित राज्यपाल कलराज मिश्र की जीवनी के विमोचन कार्यक्रम में शामिल राज्य के सभी 27 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को इसकी 19 प्रतियों के साथ 68,383 रुपये का बिल दे दिया था. विवाद होने पर राजभवन ने कहा कि पुस्तक के विपणन और इससे संबंधित किसी व्यावसायिक गतिविधि में उसकी कोई भूमिका नहीं है.

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र की जीवनी का उद्घाटन करते लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता महेश जोशी. (फोटो: ट्विटर/@ombirlakota)

जयपुर: राजस्थान के राज्यपाल की जीवनी ‘कलराज मिश्र- निमित्त मात्र हूं मैं’ अपने विमोचन के साथ ही विवादों के घेरे में आ गई है. दरअसल बीते एक जुलाई राज्यपाल कलराज मिश्र के 80वें जन्मदिन पर जयपुर​ स्थित राजभवन में इस किताब के विमोचन कार्यक्रम के बाद राज्य के सभी 27 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की उनके साथ बैठक थी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के बाद अपने आधिकारिक वाहनों के लिए कुलपति रवाना हुए. इस दौरान उन्हें अपने वाहनों में किताबों के दो कार्टन मिले, जिसमें हार्डकवर कॉफी टेबल प्रारूप में राज्यपाल की जीवनी की 19 प्रतियों के साथ 68,383 रुपये का बिल था, जबकि जीवनी की एक अतिरिक्त प्रति मुफ्त में थी.

इनमें से एक कुलपति ने बताया कि बैठक के बाद जब वे अपने घरों और कार्यालयों में पहुंचे तो एक और आश्चर्य उनका इंतजार कर रहा था. उन्हें जो बिल दिए गए थे उनमें पांच किताबों के नाम थे, लेकिन उन्हें जो कार्टन दिए गए थे उनमें सिर्फ राज्यपाल की जीवनी की प्रतियां ही थीं.

इस घटना के सामने आने के बाद मचे विवाद पर बीते रविवार को राजभवन ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि पुस्तक के विपणन और इससे संबंधित किसी व्यावसायिक गतिविधि में उसकी कोई भूमिका नहीं है.

राज्यपाल की जीवनी का लोकार्पण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा किया गया था.

बताया जा रहा है कि पुस्तक के प्रकाशक ने पुस्तक की प्रतियां उनके वाहनों में रख दीं और उनका बिल लिफाफे में बंद कर कथित रूप से उनके वाहन चालकों को थमा दिया था.

जब कुलपति अपने-अपने घर और कार्यालय पहुंचे तब उन्हें पता चला कि पुस्तक की प्रतियों के बिल का भुगतान प्रकाशक इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड ऑन्त्रप्रेन्योरशिप (आईआईएमई) को किया जाना है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह बिल उनके ड्राइवरों ने उन्हें दिए थे. एक कुलपति ने अपना नाम गुप्त की शर्त पर कहा, ‘राज्यपाल के साथ बैठक में किसी ने हमारे ड्राइवरों के नाम और नंबर लिए. हमने सोचा शायद उन्हें खाना और पानी देना है.’

अखबार द्वारा हासिल किए गए बिल में कहा गया है कि 19 किताबों के लिए 3,999 रुपये प्रति किताब का मूल्य लिया गया था, जो कि 75,981 रुपये होता है. 10 फीसदी की छूट के बाद कुल 68,383 रुपये हो जाता है.

मिश्र के लंबे समय से ओएसडी गोविंद राम जायसवाल जीवनी के सह-लेखक हैं और इसमें कहा गया है कि बिक्री से प्राप्त आय राजस्थान और सामाजिक विज्ञान पर अनुसंधान परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी और किसी भी व्यक्ति द्वारा व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा.

डॉ. डीके टकनेत भी इस पुस्तक के सह-लेखक हैं.

एक कुलपति ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘सार्वजनिक खरीद में राजस्थान पारदर्शिता (आरटीपीपी) अधिनियम, 2012 में खरीद के नियम स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं. इन पुस्तकों को एकतरफा तरीके से विश्वविद्यालयों को कैसे दिया जा सकता है? राज्य के 27 विश्वविद्यालय तकनीकी, स्वास्थ्य, कृषि, पशु चिकित्सा, कानून आदि जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ हैं. प्रत्येक विश्वविद्यालय को इतनी सारी पुस्तकों का बिल क्यों देना पड़ता है और हम किस मद के तहत खर्च वहन करेंगे?’

इस घटनाक्रम से राजभवन को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा. राज्यपाल कलराज मिश्र ने ट्वीट के जरिये इस बारे में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि पुस्तक के विपणन और इससे संबंधित व्यावसायिक गतिविधि से राजभवन का कोई लेना-देना नहीं है.

रिपोर्ट के अनुसार, राजभवन के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से रविवार को पोस्ट किए गए एक बयान में कहा गया, ‘कलराज मिश्र – निमित मातृ हूं मैं’ पुस्तक के विपणन के संबंध में कुछ खबरें प्रसारित की गई हैं, जिसे 1 जुलाई को राजभवन में लॉन्च किया गया था.’

बयान में कहा गया, ‘यह प्रकाशक आईआईएमई, शोध संस्थान और खरीददार के बीच प्राथमिक रूप से व्यक्तिगत जानकारी है. प्रकाशक ने पुस्तक को प्रकाशित किया था और राजभवन में इसके विमोचन की अनुमति मांगी थी, जिसे प्रदान कर दिया गया. पुस्तक के विपणन की व्यावसायिक गतिविधियों में राजभवन की कोई भूमिका नहीं है, किसी भी प्रकार की कोई संबद्धता नहीं है.’

राजभवन के अधिकारियों ने कहा कि राजभवन केवल एक उद्घाटन स्थल था और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को निमंत्रण आईआईएमई द्वारा भेजा गया था.

इस पर एक कुलपति ने कहा, ‘फिर किताबें राजभवन में और बाद में हर कुलपति के वाहन में कैसे घुस गईं?’

कुलपति ने कहा कि अगर राजभवन की जानकारी के बिना एक किताब के कार्टन कुलपति के वाहनों में प्रवेश कर सकते हैं, तो राजभवन और कुलपति की सुरक्षा से बहुत समझौता किया गया था.’

वहीं, कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा, ‘राज्यपाल एक संवैधानिक पद है और बहुत सम्मान का अधिकारी है. मुझे नहीं पता कि यह विवाद क्यों आया, लेकिन अगर कोई विवाद है तो मुझे विश्वास है कि राज्यपाल सफाई देंगे.’

राजभवन के एक अधिकारी ने बताया कि प्रकाशक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और कुलपति पुस्तकें वापस कर सकते हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)