भारत

अगर हिंदू कहता है कि किसी मुस्लिम को यहां नहीं रहना चाहिए, वह हिंदू नहींः मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की अल्पसंख्यक इकाई मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के एक कार्यक्रम में कहा कि सभी भारतीयों का डीएनए एक जैसा है. जो लोग लिंचिंग में शामिल हैं, वे हिंदुत्व के ख़िलाफ़ हैं. कई विपक्षी नेताओं ने उनके बयान पर ‘कथनी-करनी का अंतर’ कहते हुए निशाना साधा है.

New Delhi: RSS chief Mohan Bhagwat speaks on the last day at the event titled 'Future of Bharat: An RSS perspective', in New Delhi, Wednesday, Sept 19, 2018. (PTI Photo) (PTI9_19_2018_000185B)

मोहन भागवत. (फाइल फोटो: पीटीआई)

गाजियाबादः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि सभी भारतीयों का डीएनए एक है और मुसलमानों को डर के इस चक्र में नहीं फंसना चाहिए कि भारत में इस्लाम खतरे में है.

उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग मुसलमानों से देश छोड़ने को कहते हैं, वे खुद को हिंदू नहीं कह सकते.

भागवत ने गाजियाबाद में आरएसएस की अल्पसंख्यक इकाई मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पूजा करने के तरीके के आधार पर लोगों में अंतर नहीं किया जा सकता.

आरएसएस प्रमुख ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर कहा, ‘सभी भारतीयों का डीएनए एक जैसा है और जो लोग लिंचिंग में शामिल हैं, वे हिंदुत्व के खिलाफ हैं. अगर कोई हिंदू कहता है कि किसी मुसलमान को यहां नहीं रहना चाहिए तो वह शख्स हिंदू नहीं है. गाय पवित्र जानवर है लेकिन जो लोग दूसरों की लिंचिंग कर रहे हैं वे हिंदुत्व के खिलाफ हैं. कानून को बिना निष्पक्षता के अपना काम करना चाहिए.’

उन्होंने कहा कि लोगों के खिलाफ लिंचिंग के कुछ झूठे मामले दर्ज किए गए हैं.

भागवत ने मुसलमानों से कहा, ‘वे भय के इस चक्र में नहीं फंसें कि भारत में इस्लाम खतरे में है. देश में एकता के बिना विकास संभव नहीं है.’

आरएसएस प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि एकता का आधार राष्ट्रवाद और पूर्वजों का गौरव होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम संघर्ष का एकमात्र समाधान संवाद है, न कि विसंवाद.

भागवत ने इस अवसर पर ख्वाजा इफ्तकार अहमद की किताब ‘द मीटिंग ऑफ माइंड्स’ का विमाचेन करते हुए कहा, ‘हिंदू-मुस्लिम एकता की बात भ्रामक है क्योंकि वे अलग नहीं, बल्कि एक हैं. सभी भारतीयों का डीएनए एक है, चाहे वे किसी भी धर्म के हों.’

आरएसएस प्रमुख ने कहा, यदि कोई कहता है कि मुसलमानों को भारत में नहीं रहना चाहिए तो वह हिंदू नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘हम लोकतंत्र में हैं. यहां हिंदुओं या मुसलमानों का प्रभुत्व नहीं हो सकता. यहां केवल भारतीयों का वर्चस्व हो सकता है.’

भागवत ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि वह न तो कोई छवि बनाने के लिए कार्यक्रम में शामिल हुए हैं और न ही वोट बैंक की राजनीति के लिए.

उन्होंने कहा कि संघ न तो राजनीति में है और न ही यह कोई छवि बनाए रखने की चिंता करता है.

भागवत मुसलमानों को प्रताड़ित करने वालों को पद से हटाने का निर्देश दें: दिग्विजय

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत की टिप्पणी को लेकर सोमवार को कहा कि अगर संघ प्रमुख अपने विचारों के प्रति ईमानदार हैं तो उन्हें पहले उन लोगों को पद से हटाने का निर्देश देना चाहिए जिन्होंने मुसलमानों को प्रताड़ित किया है.

सिंह ने यह दावा भी किया कि भागवत ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि उनकी कथनी-करनी में अंतर है.

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भागवत के बयान का हवाला देते हुए ट्वीट कर कहा, ‘यदि आप अपने व्यक्त किए गए विचारों के प्रति ईमानदार हैं तो भाजपा में उन सभी नेताओं को उनके पदों से तत्काल हटाने का आदेश दें जिन्होंने निर्दोष मुसलमानों को प्रताड़ित किया है. शुरुआत नरेंद्र मोदी व योगी आदित्यनाथ से करें.’

उन्होंने कहा, ‘संघ प्रमुख मोहन भागवत बोले कि हिंदू और मुस्लिम अलग नहीं है. सभी भारतीयों का डीएनए एक है. मोहन भागवत जी, यह विचार क्या आप अपने शिष्यों, प्रचारकों, विश्व हिंदू परिषद/बजरंग दल कार्यकर्ताओं को भी देंगे? क्या यह शिक्षा आप मोदी-शाह जी व भाजपा मुख्यमंत्री को भी देंगे?’

कांग्रेस नेता कटाक्ष करते हुए कहा, ‘आपने सही कहा है कि हम पहले भारतीय हैं लेकिन हुज़ूर अपने शिष्यों को तो पहले समझाएं।. वे मुझे कई बार पाकिस्तान जाने की सलाह दे चुके हैं, देखते हैं.’

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट कर कहा, ‘आरएसएस के भागवत ने कहा है कि लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व विरोधी हैं. इन अपराधियों को गाय और भैंस में फ़र्क़ नहीं पता होगा लेकिन क़त्ल करने के लिए जुनैद, अखलाक़, पहलू, रकबर, अलीमुद्दीन के नाम ही काफी थे. यह नफ़रत हिंदुत्व की देन है, इन मुजरिमों को हिंदुत्ववादी सरकार का संरक्षण हासिल है.’

उन्होंने भीड़ द्वारा पीट पीट कर कथित तौर पर जान लेने की कुछ घटनाओं का उल्लेख करते हुए सवाल किया, ‘केंद्रीय मंत्री के हाथों अलीमुद्दीन के कातिलों का माल्यार्पण होता है, अखलाक़ के हत्यारे की लाश पर तिरंगा लगाया जाता है, आसिफ़ को मारने वालों के समर्थन में महापंचायत बुलाई जाती है, जहां भाजपा का प्रवक्ता पूछता है कि क्या हम हत्या भी नहीं कर सकते?’

ओवैसी ने कहा, ‘कायरता, हिंसा और क़त्ल करना गोडसे की हिंदुत्व वाली सोच का अटूट हिस्सा है. मुसलमानों की लिंचिंग भी इसी सोच का नतीजा है.’

गले नहीं उतर रहा संघ प्रमुख का बयान: मायावती

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने सभी भारतीयों का डीएनए एक होने के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान को किसी के गले ना उतरने वाला करार देते हुए कहा कि संघ और भाजपा की कथनी और करनी में अंतर जगजाहिर है.

मायावती ने बयान में कहा, ‘संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा कल गाजियाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत में सभी धर्मों के लोगों का डीएनए एक होने और हिंसा के हिंदुत्व के खिलाफ होने की जो बात कही गई है वह किसी के भी गले से नहीं उतर रही है, क्योंकि संघ, भाजपा एंड कंपनी के लोगों तथा सरकार की कथनी और करनी में अंतर सभी देख रहे हैं.’

मायावती ने यह भी कहा कि संघ प्रमुख का बयान ‘मुंह में राम, बगल में छुरी’ की तरह है.

उन्होंने कहा कि भागवत देश की राजनीति को विभाजनकारी बताकर कोस रहे हैं, वह ठीक नहीं है. सच्चाई तो यह है कि जिस भाजपा और उसकी सरकारों को वह आंख बंद करके समर्थन देते चले आ रहे हैं, उसी का परिणाम है कि जातिवाद, राजनीतिक द्वेष और सांप्रदायिक हिंसा का जहर सामान्य जनजीवन को त्रस्त कर रहा है.

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि संघ प्रमुख ने गाजियाबाद में अपने बयान में बड़ी-बड़ी बातें तो कहीं, संघ के सहयोग और समर्थन के बिना भाजपा का अस्तित्व कुछ भी नहीं है फिर भी संघ अपनी कही गई बातों को भाजपा तथा उसकी सरकारों से लागू क्यों नहीं करवा पा रहा है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)