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बैंक एनपीए और डिफॉल्टर्स की जानकारी सार्वजनिक करने के आरबीआई के फ़ैसले पर सीआईसी की रोक

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सीआईसी ने आरबीआई के उस फ़ैसले पर रोक लगा दी है जिसमें उन्होंने आरटीआई एक्ट के तहत सारस्वत बैंक की निरीक्षण रिपोर्ट, एनपीए और डिफ़ॉल्टर्स की सूची सार्वजनिक करने को कहा था.

(इलस्ट्रेशन: द वायर)

नई दिल्ली: नागरिक सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के माध्यम से प्रासंगिक जानकारी प्राप्त कर सकें यह सुनिश्चित करने के लिए स्थापित निकाय केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्होंने सारस्वत को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के शीर्ष डिफॉल्टर्स और एनपीए की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा था.

आरटीआई कानून के तहत सीआईसी अपीलीय संस्था है, जो विवाद की स्थिति उत्पन्न होने पर किसी सूचना के खुलासे पर निर्णय लेता है.

इस मामले में आरटीआई दायर करने वाले खुद केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेष गांधी थे.

25 अक्टूबर 2019 को दायर किए अपने आवेदन में गांधी ने सारस्वत को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के पिछले तीन साल की निरीक्षण रिपोर्ट, बैंक को जारी कारण बताओ नोटिस या इस पर लगाए गए जुर्माने, बैंक के कुल एनपीए और इसके टॉप-5 डिफॉल्टर्स की सूची मांगी थी.

इस जानकारी का खुलासा करने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बनाम जयंतीलाल एन. मिस्त्री मामले का हवाला दिया, जिसमें न्यायालय ने कहा था कि ऐसी सभी सूचनाएं जनता को सार्वजनिक की जानी चाहिए.

इसे लेकर आरबीआई के प्रथम अपीलीय अधिकारी ने फैसला लिया था कि ये जानकारी आवेदनकर्ता को मुहैया कराई जानी चाहिए, लेकिन सारस्वत बैंक ने अपनी छवि बिगड़ने और अपूरणीय क्षति का हवाला देते हुए सीआईसी में इसके खिलाफ अपील दायर की, जिसके बाद आयोग ने आरबीआई के आदेश पर रोक लगा दी.

केंद्रीय सूचना आयुक्त सुरेश चंद्रा ने चार जून 2021 को दिए अपने आदेश में कोई कारण बताए बिना लिखा, ‘प्रार्थना के संदर्भ में द्वितीय अपील स्वीकार की जाती है और अत्यावश्यकता को ध्यान में रखते हुए एफएए (प्रथम अपीलीय अधिकारी) के दिनांक 15/02/2021 के आदेश के क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है.’

इस फैसले पर आश्चर्य जताते हुए शैलेष गांधी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब नेशनल बैंक और यूनियन बैंक की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमें निरीक्षण रिपोर्ट और बैंकों के डिफॉल्टरों की सूची साझा करने के आरबीआई के फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई थी. इसके बावजूद सीआईसी ने आरबीआई के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें सारस्वत बैंक की निरीक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के लिए कहा गया था.

पूर्व सूचना आयुक्त ने कहा कि सीआईसी उन सूचनाओं को सार्वजनिक करने से रोक रही है, जिसका सुप्रीम कोर्ट ने खुलासा करने को कहा है.

इसे लेकर गांधी ने सीआईसी के फैसले के खिलाफ 19 जून 2021 को एक अपील दायर कर अपने आदेश को वापस लेने को कहा है.

अपनी अपील में गांधी ने मुख्य सूचना आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जयंतीलाल एन. मिस्त्री फैसले की याद दिलाई है, जिसमें न्यायालय ने इन मामलों से संबंधित केंद्रीय सूचना आयोग के 11 आदेशों को बरकरार रखा था.

उन्होंने कहा, ‘मांगी गई जानकारी स्पष्ट रूप से सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दायरे में है, इसलिए प्रथम अपीलीय अधिकारी ने इन सूचनाओं को सार्वजनिक करने को कहा था.’

आरटीआई एक्टिविस्ट ने यह भी कहा कि आयोग ने सारस्वत बैंक की इस दलील पर सूचना को सार्वजनिक करने से रोक लगाई है कि ये दस्तावेज ‘कॉन्फिडेंशियल’ हैं. उन्होंने सीआईसी को याद दिलाया कि आरटीआई एक्ट के तहत ‘कॉन्फिडेंशियल’ सूचनाओं को सार्वजनिक करने से कोई रोक नहीं है और आयोग का ये कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का घोर उल्लंघन है.

गांधी ने आयोग से यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश पर रोक नहीं लगाई है और उलटे कोर्ट ने इस फैसले की समीक्षा के लिए दायर किए गए आवेदनों को अस्वीकार कर दिया है.

उन्होंने कहा कि भले ही कोर्ट का आदेश इस केस से जुड़ा हुआ नहीं था, लेकिन न्यायालय ने अपने आदेश में ऐसे मामलों को डील करने का आधार तैयार किया है.

याचिकाकर्ता ने गिरीश मित्तल बनाम पार्वती वी. सुंदरम (2019) मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने यह माना था कि आरबीआई ने उस जानकारी का खुलासा नहीं करके अवमानना की है, जिसके लिए कोर्ट ने निर्देश जारी किए थे.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)