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नंदीग्राम मामला: सुनवाई से अलग हुए जस्टिस चंदा, ममता बनर्जी पर पांच लाख का जुर्माना

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी की जीत को लेकर चुनाव आयोग के फ़ैसले को अदालत में चुनौती दी है. उन्होंने मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस कौशिक चंदा द्वारा राजनीतिक पक्षपात की आशंका जताते हुए उन्हें इस केस से हटाने की मांग उठाई थी.

ममता बनर्जी और जस्टिस कौशिक चंदा (फोटोः द वायर)

कोलकाताः कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस कौशिक चंदा ने नंदीग्राम विधानसभा सीट से भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के निर्वाचन को चुनौती देने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई से बुधवार को खुद को अलग कर लिया.

इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री बनर्जी पर पांच लाख का जुर्माना भी लगाया.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस चंदा ने बुधवार को कहा, याचिकाकर्ता के मामले पर सुनवाई को लेकर मेरा कोई व्यक्तिगत झुकाव नहीं है. मुझे इस मामले को उठाने में कोई हिचक नहीं है. चीफ झस्टिस द्वारा मुझे सौंपे गए मामले की सुनवाई करना मेरा संवैधानिक कर्तव्य है. हालांकि, मैंने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग करने का फैसला किया है.

जून महीने में ममता बनर्जी के वकील ने भाजपा के साथ जस्टिस चंदा के निजी, पेशेवर और वैचारिक संबंध होने का हवाला देकर उन्हें मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की मांग की थी.

तृणमूल कांग्रेस ने इससे पहले जस्टिस चंदा और पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष की तस्वीरें जारी की थी.

जस्टिस चंदा ने बुधवार को कहा कि अगर उन्होने खुद को मामले की सुनवाई से अलग नहीं किया तो ‘मुसीबतें पैदा करने वाले’ इस मामले को भुनाते रहेंगे.

उन्होंने यह भी कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के स्थाई जज के तौर पर उनकी पुष्टि को लेकर ममता की आपत्ति उनके मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने के लिए प्रासंगिक नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘याचिकाकर्ता न्यायाधीश की नियुक्ति के संबंध में अपनी सहमति या आपत्ति के आधार पर इनकार नहीं कर सकता.’

उल्लेखनीय है कि बनर्जी ने जस्टिस कौशिक चंदा पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाकर याचिका पर सुनवाई से जस्टिस को अलग करने की मांग उठाई थी.

जस्टिस चंदा ने कहा, ‘इस याचिका से पहले उनके फैसले को प्रभावित करने का जानबूझकर एवं सोचा समझा प्रयास किया गया.’

बता दें कि बनर्जी की याचिका में जस्टिस चंदा के सुनवाई से अलग होने का अनुरोध करते हुए दावा किया गया था कि वह 2015 में भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किए जाने तक भाजपा के सक्रिय सदस्य थे और चूंकि भाजपा के एक उम्मीदवार के निर्वाचन को चुनौती दी गई है, इसलिए फैसले में पूर्वाग्रह होने की आशंका है.

जस्टिस चंदा ने कहा था कि वह भाजपा के विधिक प्रकोष्ठ के संयोजक कभी नहीं रहे, लेकिन पार्टी की ओर से अनेक मामलों में कलकत्ता हाईकोर्ट में पेश हुए थे.

न्यायाधीश को फैसले से अलग करने की मांग पर जस्टिस चंदा ने ममता बनर्जी पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए कहा कि जुर्माने की रकम दो हफ्ते के भीतर पश्चिम बंगाल बार काउंसिल में जमा करवाई जाए.

आदेश में जस्टिस चंदा ने कहा, ‘सुनवाई से अलग करने की मांग को लेकर इस तरह के सोचे-समझे, मनोवैज्ञानिक और आक्रामक प्रयास का सख्ती से प्रतिरोध करना आवश्यक है और याचिकाकर्ता पर पांच लाख रूपये का जुर्माना लगाया जाता है.’

जस्टिस चंदा ने बनर्जी की चुनाव संबंधी याचिका को अपनी अदालत से हटा दिया है. अब मामला किसी दूसरी पीठ को सौंपने के लिए कार्यवाहक चीफ जस्टिस राजेश बिंदल को भेजा जाएगा.

मालूम हो कि भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को 1,956 वोटों से हरा दिया था. इस पर मुख्यमंत्री बनर्जी ने आरोप लगाया था कि रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा था कि उन्हें धमकी दी गई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)