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पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन की ज़मानत अर्ज़ी ख़ारिज, बाकी तीन सदस्यों की पहले ही हो चुकी ख़ारिज

यूपी पुलिस ने पिछले साल अक्टूबर में हाथरस जाने के रास्ते में केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन समेत चार युवकों को गिरफ़्तार किया था, जिसके बाद उन पर शांतिभंग और यूएपीए के तहत मामले दर्ज किए गए थे. आरोप है कि कप्पन और उनके साथी हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले के मद्देनज़र सांप्रदायिक दंगे भड़काने और सामाजिक सद्भाव को बाधित करने की कोशिश कर रहे थे.

केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन. (फोटो साभार: ट्विटर/@vssanakan)

मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में पिछले नौ माह से जेल में बंद केरल के मलप्पुरम के पत्रकार सिद्दीक कप्पन की जमानत अर्जी मंगलवार को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (प्रथम) की अदालत ने खारिज कर दी.

कप्पन की जमानत अर्जी पर सोमवार को भी सुनवाई हुई थी. इस दौरान बचाव पक्ष की ओर से उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखा.

गौरतलब है कि सिद्दीक कप्पन को उसके साथी मसूद अहमद, मोहम्मद आलम और अतीकुर्रहमान के साथ गत वर्ष 5 अक्टूबर को यमुना एक्सप्रेस-वे के रास्ते हाथरस जाते समय मांट टोल प्लाजा पर गिरफ्तार किया गया था.

ये लोग हाथरस में एक युवती के साथ हुए सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में उसके गांव जा रहे थे.

चारों पर दंगा फैलाने की साजिश रचने, विदेशी वित्तपोषण, आईटी एक्ट और राजद्रोह जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं. अप्रैल में इनके खिलाफ राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष कार्यबल (एसटीएफ) ने आरोप-पत्र दाखिल किया था.

जिला शासकीय अधिवक्ता शिवराम सिंह तरकर ने बताया कि इन चार आरोपियों में से तीन की जमानत याचिका पूर्व में खारिज हो चुकी है. उन्हीं में से एक सदस्य सिद्दीक कप्पन की जमानत अर्जी पर सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) की अदालत में बहस हुई जो मंगलवार को भी जारी रही.

कप्पन की ओर से उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता विल्स मैथ्यू ने पक्ष रखा.

उन्होंने अदालत से सिद्दीक कप्पन को जमानत देने की अपील की, लेकिन न्यायिक अधिकारी अनिल कुमार पांडेय ने भोजनोपरांत अर्जी पर फैसला देते हुए जमानत की अर्जी खारिज कर दी.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, वकील विल्स मैथ्यू ने कहा, ‘हम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में जमानत पाने की उम्मीद कर रहे थे, जिसने हमें जमानत पाने के लिए निचली अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा गया था. हालांकि आरोप पत्र दायर किया गया है, लेकिन कप्पन के खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया गया.’

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कप्पन के खिलाफ आरोप यह है कि उन्होंने सह-आरोपियों के साथ समाज के भीतर दुश्मनी को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित करने वाले कृत्यों को अंजाम दिया, जो सीधे तौर पर शांतिपूर्ण माहौल को बाधित करने और दंगे भड़काने से संबंधित है.

यह भी आरोप लगाया गया है कि कप्पन ने राष्ट्र की अखंडता को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से विदेशी धन प्राप्त किया था.

कप्पन के अलावा मामले के अन्य आरोपियों में अतिकुर्रहमान, आलम और मसूद अहमद शामिल हैं.

अदालत ने कहा, ‘हालांकि कप्पन ने कहा कि वह एक पत्रकार के रूप में हाथरस जा रहा था, गिरफ्तारी के समय उसके पास तेजस न्यूज का एक पहचान पत्र मिला था और यह संगठन दिसंबर 2018 से बंद था. जांच के दौरान यह भी पाया गया कि आरोपी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के लिए काम करता था और देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त था.’

अदालत ने कहा कि जांच के दौरान यह भी पाया गया कि कप्पन वर्तमान में एक ऑनलाइन मलयालम पोर्टल से जुड़े थे, एक योगदानकर्ता के रूप में उन्होंने जो लेख पोर्टल पर भेजे थे, वे ‘भड़काऊ’ पाए गए थे.

मालूम हो कि कप्पन और तीन अन्य को उस समय गिरफ्तार किया गया था. जब ये लोग हाथरस में एक युवती के साथ हुए सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में उसके गांव जा रहे थे. उनके गिरफ्तारी के दो दिन बाद यूपी पुलिस ने उनके खिलाफ राजद्रोह और यूएपीए के तहत विभिन्न आरोपों में अन्य मामला दर्ज किया था.

यूएपीए के तहत दर्ज मामले में आरोप लगाया गया था कि कप्पन और उनके सह-यात्री हाथरस सामूहिक बलात्कार-हत्या मामले के मद्देनजर सांप्रदायिक दंगे भड़काने और सामाजिक सद्भाव को बाधित करने की कोशिश कर रहे थे. कप्पन न्यायिक हिरासत में है.

पुलिस ने बाद में इस मामले में चार और लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया. इस साल अप्रैल में पुलिस ने मथुरा की स्थानीय अदालत में कप्पन सहित सभी आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी.

मथुरा की स्थानीय अदालत ने केरल के कप्पन और तीन अन्य लोगों को शांति भंग करने के आरोप से बीते 15 जून को मुक्त कर दिया था, क्योंकि पुलिस इस मामले की जांच तय छह महीने में पूरा नहीं कर पाई.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)