पंजाब: किसान आंदोलन पर टिप्पणी करने वाले पूर्व मंत्री को भाजपा ने निष्काषित किया

पंजाब के पूर्व मंत्री अनिल जोशी कृषि क़ानूनों पर केंद्र को सही फीडबैक न देने के लिए पार्टी के राज्य नेतृत्व को ज़िम्मेदार ठहराते रहे हैं. उन्होंने कहा था कि पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए अपने घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. पार्टी से निकाले जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि राज्य के मुद्दों को उठाने के लिए उन्हें निष्कासित किया गया.

अनिल जोशी. (फोटो: फेसबुक)

पंजाब के पूर्व मंत्री अनिल जोशी कृषि क़ानूनों पर केंद्र को सही फीडबैक न देने के लिए पार्टी के राज्य नेतृत्व को ज़िम्मेदार ठहराते रहे हैं. उन्होंने कहा था कि पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए अपने घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. पार्टी से निकाले जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि राज्य के मुद्दों को उठाने के लिए उन्हें निष्कासित किया गया.

अनिल जोशी. (फोटो: फेसबुक)

चंडीगढ़: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पंजाब इकाई ने शनिवार को राज्य के पूर्व मंत्री अनिल जोशी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया.

भाजपा की राज्य इकाई ने जोशी को उनकी ‘पार्टी विरोधी’ गतिविधियों के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया था. इस नोटिस का जवाब देने के बाद जोशी के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है.

नोटिस के मुताबिक जोशी केंद्र सरकार, पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और नीतियों के खिलाफ बयान देते रहे हैं. पार्टी के एक बयान के अनुसार, जोशी को राज्य इकाई के प्रमुख अश्विनी शर्मा के निर्देश पर निष्कासित किया गया है.

बयान के अनुसार जोशी ने पार्टी के खिलाफ जाने के अपने जिद्दी रवैये को नहीं छोड़ा जिसके बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने एक अनुशासनात्मक समिति की सिफारिशों पर उन्हें छह साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया.

इससे पहले जोशी ने कारण बताओ नोटिस के दो पृष्ठ के अपने जवाब में कहा कि उन्होंने केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ कभी बात नहीं की और उन्होंने राज्य पार्टी प्रमुख से पूछा कि क्या किसानों के बारे में बात करना अनुशासनहीनता है.

अमृतसर उत्तर के पूर्व विधायक ने कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी के हितों के बारे में बात की. जोशी ने जवाब दिया, ‘मैंने न तो केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ और न ही केंद्रीय नेताओं के खिलाफ बात की.’

जोशी ने पंजाब भाजपा अध्यक्ष शर्मा से पूछा कि क्या किसानों के बारे में बात करना अनुशासनहीनता है. उन्होंने पूछा, ‘क्या आढ़तियों, उद्योगपतियों, छोटे व्यापारियों और मजदूरों के बारे में बात करना अनुशासनहीनता है.’

उन्होंने दावा किया कि कार्यकर्ता पार्टी छोड़ रहे हैं. उन्होंने पंजाब भाजपा प्रमुख से पूछा कि क्या पार्टी को बचाने के लिए सुझाव देना अनुशासनहीनता है.

जोशी ने यह भी कहा कि शुरू में राज्य में कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों की कुछ मांगें थीं और अगर भाजपा की पंजाब इकाई ने कुछ प्रयास किए होते तो इन मांगों से निपटा जा सकता था.

जोशी कृषि कानूनों पर केंद्र को सही फीडबैक नहीं देने के लिए पार्टी के राज्य नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं. उन्होंने कहा था कि पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए अपने घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अपने निष्कासन पर प्रतिक्रिया देते हुए जोशी ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि राज्य नेतृत्व उनकी बात सुनेगा. उन्होंने पार्टी में मेरी 37 साल की तपस्या खत्म कर दी.

2012-17 की अकाली दल-भाजपा सरकार के दौरान स्थानीय निकाय, चिकित्सकीय शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री रहे जोशी ने कहा, ‘क्या पंजाब के लोगों के बारे में बात करना गलत है? भाजपा कार्यकर्ताओं की पिटाई की जा रही है, कपड़े उतारे जा रहे हैं. क्या किसानों के विरोध का समाधान मांगना गलत है? पंजाब भाजपा अध्यक्ष अश्विनी शर्मा और उनकी टीम ने केंद्र को सही प्रतिक्रिया नहीं दी. ये वही लोग हैं जो मुझे निकाल रहे हैं. जो पार्टी को बचाने की बात कर रहा था, उसे बाहर कर दिया गया है.’

जोशी ने कहा कि उन्होंने कभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या केंद्र सरकार के खिलाफ बात नहीं की.

उन्होंने कहा, ‘मुझे गर्व है कि मुझे पंजाब के मुद्दों को उठाने के लिए निष्कासित कर दिया गया है और मैं सिर ऊंचा करके चलूंगा. वे मुझे पार्टी से निकाल सकते हैं लेकिन वे मुझे राज्य के लोगों के दिलों से नहीं निकाल सकते. यह मेरे लिए एक पदक है.’

इससे पहले, राज्य भाजपा नेतृत्व का मजाक उड़ाते हुए जोशी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा था कि दर्जनों बंदूकधारियों के साथ घूमने वाले नेताओं को पार्टी की लोकप्रियता का आकलन करने के लिए निकटतम गांवों का दौरा करने के लिए कहा जाना चाहिए.

उन्होंने कहा था कि जहां पार्टी के नेता 2022 विधानसभा क्षेत्रों में 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात करते हैं, वहीं कृषि कानूनों के विरोध के कारण उनके लिए एक भी गांव में प्रवेश करना मुश्किल होगा.

उन्होंने राज्य महासचिव सुभाष शर्मा पर भी कारण बताओ नोटिस जारी करने के लिए कहा था कि शर्मा एक चुनाव भी नहीं जीत सके, वह (जोशी) एक पूर्व मंत्री थे.

1990 के दशक की शुरुआत में तरनतारन जिले में आतंकवादियों द्वारा उनके पिता की हत्या कर दिए जाने के बाद अमृतसर उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से दो बार विधायक रहे जोशी आरएसएस और बाद में भाजपा से जुड़ गए. वह 2001 में पार्टी के ग्रामीण विंग के प्रमुख बने और 2007 में विधायक के रूप में अपना पहला चुनाव जीता.

हालांकि, भाजपा जोशी की तरह ही बयान देने वाले मोहनलाल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. पूर्व मंत्री मोहन लाल ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पर खुले तौर पर उनके राजनीतिक करियर को खराब करने का आरोप लगाया था. शर्मा अतीत में पठानकोट विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं जो कभी मोहन लाल का क्षेत्र था.

मोहन लाल ने पार्टी नेतृत्व पर किसानों के साथ न रहने और नई दिल्ली में पार्टी आलाकमान के सामने अपने मुद्दों को रखने में विफल रहने का भी आरोप लगाया था. उन्होंने किसानों के मुद्दों के समर्थन में जोशी के बयान का बचाव भी किया था.

इस बीच, ऐसी अफवाहें थीं कि जोशी अकाली दल में शामिल होने के लिए बातचीत कर रहे थे. इसके साथ ऐसी भी खबरें आई हैं कि जालंधर से भाजपा के एक अन्य वरिष्ठ नेता भी शिअद में शामिल होने की ओर अग्रसर हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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