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फ्रैंको मुलक्कल मामला: अदालत का सिस्टर लूसी को कॉन्वेंट में पुलिस सुरक्षा देने से इनकार

बलात्कार के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल का विरोध करने वाली सिस्टर लूसी से पिछले दिनों कॉन्वेंट छोड़ने को कहा गया था. उनके इसे छोड़ने से मना करने पर अदालत ने कहा कि अगर वे उन पर अनुशासनहीनता के आरोप लगाने वाले कॉन्वेंट में रहती रहेंगी, तो वहां के कर्मचारियों के साथ उनका टकराव जारी रहेगा.

केरल की नन सिस्टर लूसी कलाप्पुरा. (फोटो: एएनआई)

कोच्चि: केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि फ्रांसिस्कन क्लैरिस्ट कांग्रेगेशन (एफसीसी) के कान्वेंट से बेदखली के मामले में सिस्टर लूसी कलाप्पुरा को किसी प्रकार का पुलिस संरक्षण प्रदान नहीं किया जा सकता है. सिस्टर लूसी को एफसीसी से निष्कासित कर दिया गया है और इस समय कान्वेंट में रह रही हैं.

अदालत ने कहा कि पुलिस कॉन्वेंट के बजाय किसी अन्य निवास स्थान पर उनके जीवन और संपत्ति की सुरक्षा कर सकती है.

वायनाड जिले के करक्कमाला गांव में कॉन्वेंट में पुलिस सुरक्षा की मांग वाली उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राजा विजयराघवन ने कहा कि यदि वह कॉन्वेंट में रहने का इरादा रखती हैं तो पिछले साल पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का उच्च न्यायालय का आदेश अब और जारी नहीं रह सकता.

उन्होंने कहा कि अगर वह अनुशासनहीनता के आरोप लगाने वाले कॉन्वेंट में रहना जारी रखती हैं, तो वहां के कर्मचारियों या अधिकारियों के साथ उनका टकराव जारी रहेगा.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पुलिस सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर उनके वकील द्वारा वकालत छोड़ने के बाद सिस्टर लूसी ने पहली बार उच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखा.

उन्होंने अदालत से कहा कि वायनाड में कॉन्वेंट को खाली करने का आदेश देने पर उनके पास जाने के लिए और कोई जगह नहीं है. यह उसकी ननशिप के लिए महत्वपूर्ण है कि वह कॉन्वेंट में रहे.

व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखने वाली नन ने अदालत को बताया कि उन्होंने अपने निष्कासन के आदेश को एक दीवानी अदालत में चुनौती दी है और जब तक इस पर फैसला नहीं हो जाता तब तक वह कॉन्वेंट में रहना चाहती हैं.

सिस्टर लूसी ने कहा कि अदालत उन्हें दी गई पुलिस सुरक्षा वापस ले सकती है, लेकिन उन्हें कॉन्वेंट में रहने की अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि उनके पास जाने के लिए और कोई जगह नहीं है.

अदालत ने कहा कि वह उसे कॉन्वेंट में रहने की अनुमति देने का आदेश जारी नहीं कर सकता, क्योंकि एफसीसी के सदस्य के रूप में बने रहने का उसका अधिकार समाप्त हो गया है.

मालूम हो कि बीते जून महीने में लूसी कलाप्पुरा को उनका कॉन्वेंट खाली करने का आदेश दिया गया था. यह कदम अनुशासनात्मक आधार पर उनकी बर्खास्तगी के खिलाफ कैथोलिक चर्च में कानूनी फोरम पर उनकी अपील खारिज होने के बाद आया था.

केरल में फ्रांसिस्कन क्लेरिस्ट कांग्रेगेशन (एफसीसी) के सुपीरियर जनरल ने कहा था, ‘आपकी बर्खास्तगी को चुनौती देने के लिए कैथोलिक कानूनी प्रणाली के भीतर आपके लिए कोई और कानूनी उपाय उपलब्ध नहीं है. एफसीसी के सदस्य के रूप में बने रहने का आपका अधिकार अब निश्चित रूप से समाप्त हो गया है.’

बता दें कि सिस्टर लूसी की उनके समूह के साथ लंबे समय से अनबन चल रही है. उन्होंने 2018 में एक नन के साथ कथित बलात्कार के मामले में बिशप फ्रेंको मुलक्कल की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आंदोलन में भाग लिया था.

जनवरी 2019 में कलाप्पुरा ने बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था. मुलक्कल पर 2014 से 2016 के बीच एक साथी नन का बलात्कार करने का आरोप है.

अक्टूबर 2019 में एफसीसी ने उन्हें इस आधार पर बर्खास्त किया कि ‘वह अपनी जीवनशैली में नन के रूप में अपनी प्रतिज्ञा का उल्लंघन’ कर रही थीं. उस समय एफसीसी की रिपोर्ट में कहा गया था कि उन्हें वाहन चलाने, कविताएं लिखने और उन्हें प्रकाशित कराने और रोमन कैथोलिक बिशप मुलक्कल पर लगातार बलात्कार और उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली नन का समर्थन करने सहित कई कारणों के लिए बर्खास्त किया गया.

बिशप मुलक्कल के खिलाफ कोट्टायम अदालत में बलात्कार का मामला चल रहा है. उन पर बलात्कार, गलत तरीके से कैद करने, अप्राकृतिक अपराध और आपराधिक धमकी देने के आरोप लगे हैं. फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं.

मालूम हो कि एक नन ने जालंधर के बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर 2014 से 2016 के बीच उसके साथ 13 बार बलात्कार करने का आरोप लगाया है. यह घटना जालंधर डायोसीस द्वारा कोट्टयम जिले में संचालित कॉन्वेंट के बिशप के दौरे के दौरान हुई.

नन से बलात्कार के आरोप में बिशप फ्रैंको मुलक्कल को 21 सितंबर 2018 को गिरफ्तार किया गया था.  इसके बाद 15 अक्टूबर को उन्हें अदालत से सशर्त जमानत मिल गई थी. जमानत पर रिहा होने के बाद जालंधर में उनका फूल-माला से स्वागत हुआ.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)