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बीएचयू: ‘समलैंगिक’ होने के कारण छात्रा को हॉस्टल से निकाला

बीए ऑनर्स की पहले साल की एक छात्रा को उसके समलैंगिक झुकाव के चलते हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है.

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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के महिला महाविद्यालय (एमएमवी) के महिला छात्रावास से जुड़े विवादों का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है. बीते दिनों छात्रावास के नियमों में भेदभाव को लेकर डाली गई याचिका सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने के बाद पिछले हफ़्ते एक छात्रा को ‘समलैंगिक’ होने के चलते हॉस्टल से निकाल दिया गया.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार एमएमवी में पढ़ने वाली ग्रेजुएशन के पहले साल की एक छात्रा को कथित तौर पर समलैंगिक या लेस्बियन झुकाव और अनुशासनहीनता के चलते हॉस्टल से निकाल दिया गया. हॉस्टल की डिसिप्लिनरी कमेटी की एक सदस्य ने गोपनीयता की शर्त पर इस अख़बार को बताया कि बीए ऑनर्स की पहले साल की एक छात्रा को उसके समलैंगिक झुकाव भरे व्यवहार के चलते हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया, जिससे हॉस्टल में अनुशासन और शांति बनी रहे.

ख़बर के मुताबिक एमएमवी में असिस्टेंट प्रोफेसर और कॉलेज के पांच छात्रावासों की मुख्य कोऑर्डिनेटर नीलम अत्री ने छात्रा के ख़िलाफ़ ये कार्रवाई हॉस्टल की करीब 16 छात्राओं द्वारा लिखित में शिकायत दर्ज करवाने के बाद की. उनके अनुसार निष्कासित की गई छात्रा बाकी लड़कियों को परेशान करती थी और उसकी बात न मानने पर आत्महत्या की धमकी देती थी.

हालांकि नीलम अत्री ने छात्रा के समलैंगिक होने के आरोप पर कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया. उनका कहना था, ‘ऐसा कुछ भी नहीं है… जो छात्राएं ऐसा कह रही हैं, वे विश्वविद्यालय की बदनामी करना चाहती हैं. ये भीतरी मसला है.’

उन्होंने ये भी बताया कि पिछले हफ़्ते उसके माता-पिता को भी कॉलेज बुलाकर उसका ‘इलाज’ करवाने के लिए कहा गया था. उन्होंने बताया, ‘वो अपने साथ की लड़कियों को पढ़ाई या किसी ऐसी ही बात में मदद न करने पर खुद को नुकसान पहुंचाने की धमकी दिया करती थी… वो ठीक नहीं है. वो डिप्रेशन में है और उसने खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी की थी. इसलिए हमने उसके परिवार को बुलाया और उसे अच्छे डॉक्टर को दिखाने को कहा. हमने उन्हें ये भी कहा है कि अगर वो ठीक हो जाती है, तो वापस हॉस्टल में आ सकती है.’

एक अन्य प्रोफेसर के अनुसार, ‘उसके लक्षण शुरुआती थे. हम साफ तौर पर तो नहीं कह सकते कि ये समलैंगिकता है कि नहीं, लेकिन हॉस्टल में अनुशासन और शांति के लिए उसे निकालना ज़रूरी हो गया था. छात्राओं में हमें लिखित में शिकायत दी थी कि उसके व्यवहार से उन्हें परेशानी हो रही थी. हमने उन्हें एडजस्ट करने को कहा लेकिन पिछले कुछ हफ़्तों से लगातार शिकायतें आने लगीं, तब हमें एक्शन लेना पड़ा.’

वहीं छात्राओं का रवैया इसे लेकर अलग है. एक छात्रा ने नाम न बताने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, ‘ये छात्रा एक आंख से देख नहीं सकती. कॉलेज प्रशासन को उसके प्रति ज़्यादा संवेदनशील होना चाहिए था. लेकिन बजाय इसके उन्होंने उसे बिना एन्क्वायरी या काउंसलिंग के सस्पेंड कर दिया गया. वो अब किस तरह अपनी क्लास का सामना करेगी? उसे उन्हीं लड़कियों के साथ पढ़ना है. वो लड़की और उसके माता-पिता सदमे हैं.’